किचन का स्पंज बन सकता है सेहत के लिए खतरा, बर्तन धोते समय निकल रहे लाखों माइक्रोप्लास्टिक, स्टडी में खुलासा

बर्तन धोने के लिए ज्यादातर घरों में स्पंज का इस्तेमाल होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोजमर्रा की यह छोटी-सी चीज पर्यावरण ही नहीं, आपकी सेहत के लिए भी चिंता का कारण बन सकती है.

dishwashing sponge
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:05 AM IST

बर्तन धोने के लिए ज्यादातर घरों में स्पंज का इस्तेमाल होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोजमर्रा की यह छोटी-सी चीज आपकी सेहत के लिए भी चिंता का कारण बन सकती है. एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि बर्तन साफ करते समय स्पंज से लगातार माइक्रोप्लास्टिक के बेहद छोटे कण निकलते हैं, जो पानी के जरिए पर्यावरण में पहुंच जाते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि ये सूक्ष्म प्लास्टिक कण मानव शरीर में भी प्रवेश कर सकते हैं.

तीन तरह के स्पंज पर किया गया अध्ययन
जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ बॉन के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में तीन प्रकार के किचन स्पंज शामिल किए. इनमें एक पारंपरिक यूरोपीय स्पंज, एक उत्तरी अमेरिकी स्पंज और एक ऑर्गेनिक स्पंज शामिल था. इन स्पंजों का कई हफ्तों तक घरों में सामान्य इस्तेमाल कराया गया और बाद में उनका वजन तथा संरचना जांची गई.

अध्ययन में पाया गया कि सभी स्पंज इस्तेमाल के दौरान धीरे-धीरे घिसते हैं और उनके छोटे-छोटे कण पानी में मिल जाते हैं. यही कण आगे चलकर माइक्रोप्लास्टिक का रूप लेते हैं.

हर साल ग्रामों में निकल रहा प्लास्टिक
रिपोर्ट के अनुसार, स्पंज के प्रकार के आधार पर एक व्यक्ति के उपयोग से सालाना 0.68 ग्राम से लेकर 4.21 ग्राम तक माइक्रोप्लास्टिक निकल सकता है. यह मात्रा सुनने में कम लग सकती है, लेकिन यदि किसी देश की पूरी आबादी अधिक प्लास्टिक वाले स्पंज का उपयोग करे तो हर साल करीब 355 टन माइक्रोप्लास्टिक पर्यावरण में पहुंच सकता है.

कौन-सा स्पंज सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाता है?
शोध में सामने आया कि यूरोपीय स्पंज में सबसे ज्यादा प्लास्टिक मौजूद था. इसमें करीब 59.3% प्लास्टिक पाया गया. वहीं अमेरिकी स्पंज में 41.9% और ऑर्गेनिक स्पंज में केवल 15.9% प्लास्टिक था. इसी वजह से यूरोपीय स्पंज से सबसे ज्यादा माइक्रोप्लास्टिक निकला, जबकि ऑर्गेनिक स्पंज सबसे कम प्रदूषण फैलाने वाला साबित हुआ.

सेहत पर क्या असर पड़ सकता है?
वैज्ञानिक अभी भी माइक्रोप्लास्टिक के दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं. हालांकि कई शोधों में संकेत मिले हैं कि ये सूक्ष्म कण शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश कर सकते हैं और उनके सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं. माइक्रोप्लास्टिक कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है. ध्ययन में यह भी पाया गया कि बर्तन धोने से होने वाले कुल पर्यावरणीय प्रभाव का 85 से 97 प्रतिशत हिस्सा पानी की खपत से जुड़ा है.

कौन से स्पंज बेहतर?
कम प्लास्टिक वाले या ऑर्गेनिक स्पंज का इस्तेमाल किया जाए. साथ ही बर्तन धोते समय पानी की बचत पर भी ध्यान देना चाहिए. 

  • सेल्यूलोज स्पंज

  • लूफा से बने स्पंज

  • नारियल के रेशों से बने स्पंज

  • पौधों से बने ऑर्गेनिक स्पंज

 

Read more!

RECOMMENDED