मच्छरों से ही होगा मच्छरों का खात्मा...वैज्ञानिकों की इस तकनीक से डेंगू का खतरा हो जाता है 70% तक कम

सिंगापुर की रिसर्च में वैज्ञानिकों ने एक स्मार्ट तरीका अपनाया है जिससे डेंगू फैलने से रोका जा सके. इसमें प्रयोगशाला में Wolbachia बैक्टीरिया वाले नर मच्छर तैयार किए जाते हैं. ये मच्छर जंगली मादाओं के साथ प्रजनन तो करते हैं, लेकिन नए मच्छर पैदा नहीं होते.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 25 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:29 AM IST
  • डेंगू पर काबू पाने की नई वैज्ञानिक पहल
  • 15 इलाकों में किया गया गोल्ड-स्टैंडर्ड ट्रायल

डेंगू हर साल लाखों लोगों को अपनी चपेट में लेता है. यह बीमारी मच्छरों के जरिए फैलती है और एक बार होने के बाद दोबारा संक्रमण जानलेवा भी हो सकता है. ऐसे में मच्छरों को नियंत्रित करने के नए तरीके की तलाश लंबे समय से चल रही थी. अब सिंगापुर में हुए एक बड़े ट्रायल ने उम्मीद जगाई है.

क्या है पूरा मामला?
सिंगापुर की नेशनल एनवायरनमेंट एजेंसी के तहत काम करने वाले Environmental Health Institute के वैज्ञानिकों ने 15 घनी आबादी वाले इलाकों में एक खास तकनीक का परीक्षण किया. इस तकनीक को Wolbachia आधारित IIT-SIT (Incompatible Insect Technique-Sterile Insect Technique) कहा जाता है.

इसमें लैब में पाले गए नर मच्छरों को छोड़ा जाता है, जिनमें Wolbachia नाम का बैक्टीरिया डाला जाता है. जब ये नर मच्छर मादा मच्छरों के साथ प्रजनन करते हैं, तो अंडे विकसित नहीं हो पाते. इससे धीरे-धीरे मच्छरों की आबादी कम होने लगती है.

यह तकनीक पहले भी दुनिया के कुछ हिस्सों में अपनाई गई थी, लेकिन पहली बार इसे रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल के जरिए परखा गया.

कैसे किया गया परीक्षण?
वैज्ञानिकों ने 15 इलाकों को दो समूहों में बांटा. एक समूह में Wolbachia वाले नर मच्छर छोड़े गए, जबकि दूसरे समूह को ऐसे ही छोड़ दिया. 20 महीने तक मच्छरों की संख्या और डेंगू के मामलों पर नजर रखी गई. खास बात यह रही कि शुरुआत में वैज्ञानिकों को खुद नहीं पता था कि किस इलाके में मच्छर छोड़े गए हैं, ताकि नतीजों में पक्षपात न हो.

क्या रहे नतीजे?
2024 में ट्रायल खत्म होने तक जिन इलाकों में Wolbachia वाले मच्छर छोड़े गए थे, वहां मच्छरों की संख्या में 77% तक गिरावट दर्ज की गई. डेंगू के मामलों में भी बड़ा फर्क दिखा. कंट्रोल एरिया में डेंगू के 21% मामले दर्ज हुए, जबकि जिन इलाकों में यह तकनीक अपनाई गई, वहां केवल 6% मामले सामने आए. यानी डेंगू के प्रसार में करीब 71% की कमी आई.

क्यों है यह बड़ी सफलता?
यह पहला वैज्ञानिक और मजबूत प्रमाण है कि Wolbachia आधारित IIT-SIT तकनीक न सिर्फ मच्छरों की संख्या घटाती है, बल्कि डेंगू जैसे खतरनाक रोग के फैलाव को भी कम करती है. दुनिया इस समय डेंगू के बढ़ते मामलों से जूझ रही है. ऐसे में यह तरीका उन देशों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है, जहां डेंगू हर साल बड़ी चुनौती बन जाता है.

 

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