Brihaspati Grah
Brihaspati Grah
ग्रहों में बृहस्पति सर्वाधिक शुभ और पवित्र है. मात्र कुंडली में इसके शुभ होने पर व्यक्ति पर ईश्वर की कृपा बनी रहती है. यह अकेला संतान, धन और विवाह के मामलों को उत्तम कर देता है. इसकी दृष्टि गंगाजल के समान पवित्र होती है. बृहस्पति की दृष्टि जिस ग्रह और जिस भाव पर पड़ती है, उसके अशुभ प्रभाव को नष्ट कर देती है
बृहस्पति के अशुभ प्रभाव पड़ने पर क्या होता है?
बृहस्पति के कमजोर होने से व्यक्ति के संस्कार कमजोर होते हैं. विद्या और धन प्राप्ति में बाधा के साथ-साथ व्यक्ति को बड़ों का सहयोग पाने में मुश्किलें आती हैं. व्यक्ति का पाचन तंत्र कमजोर होता है. कैंसर और लीवर की सारी गंभीर समस्याएं बृहस्पति ही देता है. संतान पक्ष की समस्याएं भी परेशान करती हैं. कभी-कभी तो संतान ही नहीं होती. अगर बृहस्पति का सम्बन्ध विवाह भाव से बन जाए तो विवाह होना असंभव हो जाता है. शनि की अशुभ स्थिति से व्यक्ति की समस्याओं का निवारण हो सकता है लेकिन बृहस्पति के बुरे असर का निवारण बहुत ही मुश्किल होता है.
बृहस्पति के अशुभ प्रभाव दूर करने का सबसे अचूक उपाय
बृहस्पति स्वयं शिव का स्वरुप है. अतः शिव भक्ति से बृहस्पति के अशुभ प्रभाव दूर हो जाते हैं. नित्य प्रातः शिवलिंग पर जल अर्पित करें. प्रातः और सायं नमः शिवाय का जप करें. आहार, व्यवहार और विचार में पूरी सात्विकता रखें. मांस-मदिरा का प्रयोग करना बंद कर दीजिए. भोजन करने से पहले हाथ जोड़ करके प्रार्थना करिए. भगवान की कृपा के लिए आभार व्यक्त करिए. भोजन में बेसन जरूर खाएं और भोजन के साथ या भोजन के बाद थोड़ा सा मीठा भी खाएं. पीले फल का और केसर का प्रयोग करें. भोजन करने के पहले प्रभु को भोजन का भोग लगाएं और इसके बाद भोजन ग्रहण करें.
बृहस्पति की अशुभ या मारक दशा चल रही हो तो क्या उपाय करें?
नित्य प्रातः शिवलिंग पर जल अर्पित करें. प्रातः और सायं महामृत्युंजय मन्त्र का जप करें. हर बृहस्पतिवार को चने की दाल या केले का दान करें. सोना और पीला रंग प्रयोग करने से परहेज करें. आहार को पूरी तरह से सात्विक रखें.