Grah
Grah
ग्रहों का एक विशेष अवस्था में विशेष राशी में पाया जाना, उनको उच्च और नीच का बना देता है. ग्रह उच्च और नीच के होने पर विशेष और महत्वपूर्ण परिणाम देते हैं. ग्रह जब नीच राशी में होते हैं तब कुंडली के तमाम अच्छे और बुरे परिणामों को बुरी तरह प्रभावित करते हैं. कभी-कभी एक अकेला नीच ग्रह भी सब कुछ बदल सकता है. धारणा है कि नीच ग्रह हमेशा अशुभ होते हैं जबकि ऐसा हमेशा नहीं होता है.
कौन सा ग्रह कब नीच का हो जाता है
1. सूर्य तुला राशी में नीच का होता है. यह आंखों की समस्या देता है. यह सेहत खराब करता है और पिता के लिए अच्छा नहीं होता.
2. चंद्रमा वृश्चिक में नीच का होता है. यह मन को असंतुलित करता है. हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है और माता को कष्ट देता है.
3. मंगल कर्क राशी में नीच का होता है. यह क्रोध पैदा करता है. संपत्ति बनाने में बाधा देता है और भाई-बहनों को कष्ट देता है.
4. बुध मीन राशी में नीच का होता है. यह भ्रम पैदा करता है तथा आर्थिक रूप से नुकसान करता है और ननिहाल पक्ष के लिए अच्छा नहीं होता.
5. बृहस्पति मकर राशी में नीच का होता है. यह जीवन में स्थायित्व नहीं आने देता. साथ ही विवाह के मामले में समस्या पैदा करता है.
6. शुक्र कन्या राशी में नीच का होता है. यह व्यक्ति को व्यभिचार की तरफ ले जाता है. अपयश देता है और सुख का अनुभव नहीं होता.
7. शनि मेष राशी में नीच का होता है. इसके होने से काफी दुर्घटनाए घटती हैं. नौकरी में बाधा आती है तथा स्नायु तंत्र की समस्या होती है.
क्या कभी नीच ग्रह फायदा भी देते हैं और क्या हैं इनके फायदे
1. सूर्य: चिकित्सक बना सकता है. परिवार से दूर होने पर अत्यंत मान सम्मान देता है.
2. चंद्रमा: आध्यात्मिक विकास करवाता है. यात्राओं से लाभ होता है और कम आयु में नौकरी मिल जाती है.
3. मंगल: अच्छा शल्य चिकित्सक बनाता है. प्रशासन में लाभकारी होता है. स्त्री पक्ष से फायदा होता है.
4. बुध: वाणी और चालाकी से खूब धन कमवा सकता है. शिक्षा क्षेत्र में लाभ देता है.
5. बृहस्पति: ईश्वर कि तरफ झुकाव पैदा करता है. संतान को योग्य बनाता है.
6. शुक्र: फिल्म मीडिया अथवा ग्लैमर में व्यक्ति को सफलता दिलवाता है.
7. शनि: संपूर्ण प्रशासनिक अधिकार देता है. उतार-चढ़ाव में स्थिर बनाए रखता है.
नीच के ग्रह कर रहे हों नुकसान तो क्या हो समाधान
यदि सूर्य नीच का हो तो सूर्य को जल अर्पित करें. ताम्बा धारण करें. अगर चन्द्रमा नीच राशि में हो तो पूर्णिमा का उपवास रखें. शिव जी की पूजा करें. मंगल के नीच राशि में होने पर नमक का सेवन कम करें. विद्यर्थियों की सहायता करें. अगर बुध नीच का हो तो देर तक मत सोयें, विष्णु जी की उपासना करें,आयरन युक्त खाद्य खाएं. यदि बृहस्पति नीच राशि में हो तो झूठ मत बोलें. मांस-मदिरा से बचें. अपने गुरु और माता पिता की सेवा करें. शुक्र के नीच राशि में होने पर चरित्र पर नियंत्रण रखें. हनुमान जी की उपासना करें. शनि यदि नीच का हो तो वाहन चलाने में सावधानी रखें. योगाभ्यास करें. कृष्ण जी की उपासना करें.