Makar Sankranti (File Photo: PTI)
Makar Sankranti (File Photo: PTI)
Khichdi Kab Hai: हिंदू धर्म में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के पर्व को अत्यंत पवित्र माना जाता है. हिंदू पंचांग के मुताबिक जब सूर्यदेव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का महापर्व मनाया जाता है. इस दिन सूर्य भगवान की पूजा की जाती है.
मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य उत्तरायण होते हैं और दिन बड़े होने लगते हैं. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, पूजा-पाठ करने और दान-दक्षिणा देने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. मकर संक्रांति को कई नामों से जाना जाता है जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में इसे मकर संक्रांति या खिचड़ी, पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी, असम में माघ बिहू या भोगाली बिहू, गुजरात में उत्तरायण और तमिलनाडु में पोंगल.
कब है मकर संक्रांति
वैसे तो हर साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाती है लेकिन कुछ एक बार तिथि आगे भी बढ़ जाती है. इसके चलते 15 जनवरी को भी मकर संक्रांति मनाई जाती है. इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी दिन बुधवार को मनाई जाएगी. इस दिन सूर्यदेव मकर राशि में दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर प्रवेश करेंगे.
इस दिन पुण्य काल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरू होगा और महापुण्य काल भी दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर शाम 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. पुण्यकाल और महापुण्य काल में स्नान-दान और ध्यान करना सबसे अच्छा माना जाता है. आप मकर संक्राति के दिन गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक कर सकते हैं. यह भी स्नान करने का शुभ मुहूर्त है. आपको मालूम हो कि कुछ ज्योतिषाचार्य 15 जनवरी दिन गुरुवार को भी मकर संक्रांति मनाने की बात कर रहे हैं. ठाकुर प्रसाद पंचांग में भी इस साल मकर संक्रांति 15 जनवरी को है.
मकर संक्रांति का महत्व
पुराण के मुताबिक मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव से मिलने आते हैं, जो मकर राशि के स्वामी हैं. मकर संक्रांति भगवान विष्णु की असुरों पर विजय के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है. मकर संक्रांति के दिन से खरमास खत्म होता है और शुभ व मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है. मकर संक्रांति का वर्णन्न महाभारत में भी मिलता है. भीष्म पितामह सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा में बाणों की शैया पर पड़े रहे और इसी काल में उन्होंने देह त्याग की. एक अन्य कथा के मुताबिक इसी दिन गंगा जी राजा भगीरथ के पीछे-पीछे कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में मिली थीं.
खगोलशास्त्र के मुताबिक सूर्य का दो अयन पहला उतरायण और दूसरा दक्षिणायन है. एक वर्ष में 12 महीने होते हैं और सूर्य के दो अयन होने के कारण एक अयन की अवधि 6 महीने की होती है. मकर संक्रांति के दिन से सूर्य उतरायण होते हैं और आगे 06 महिना तक सूर्य उतरायण ही रहते हैं. मान्यता यह है जब सूर्य उतरायण होते है तो देवताओं का दिन की शुरुआत माना जाता है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान करने से कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है. इस दिन गंगा सहित अन्य नदियों में हजारों लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं. इस दिन तिल, गुड़, खिचड़ी, गर्म कपड़े, कंबल और अन्न दान का विशेष महत्व है.
मकर संक्रांति के दिन क्या करें
1. मकर संक्रांति के दिन शुभ मुहूर्त में गंगा या फिर किसी अन्य पवित्र जल तीर्थ पर जाकर स्नान करना चाहिए.
2. यदि गंगा में स्नान करने के लिए जाना संभव न हो तो पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.
3. इस दिन स्नान करने के बाद पीले वस्त्र पहनें. इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें.
4. अर्घ्य के जल में रोली, चावल और लाल पुष्प डालें. ऊं घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें.
5. तिल-गुड़ के लड्डू, खिचड़ी और मौसमी व्यंजन बनाकर भगवान को अर्पित करें.
6. श्रद्धा अनुसार मंदिर के पुजारी या किसी गरीब को दान करें.
7. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इन कामों को करने से सूर्य देव की कृपा से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है.