scorecardresearch

Magh Mela: 11000 रुद्राक्ष वाले संत, 5 साल के बाहुबली महाराज... प्रयागराज के माघ मेले में अनोखे संत

प्रयागराज में माघ मेले में साधु-संतों का जमावड़ा लगा है. मेले में कई अनोखे संत आए हैं. इसमें नागा साधु दिगंबर अजयगिरी शामिल हैं. वो श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. उन्होंने अपने शरीर पर 11,000 रुद्राक्ष धारण किए हैं. उधर, 5 साल के श्रीश बाहुबली महाराज भगवान राम के वेश में नजर आए.

Magh Mela Magh Mela

प्रयागराज की पावन धरती पर माघ मेले का आयोजन श्रद्धा, साधना और संस्कृति के अद्भुत रंगों को समेटे हुए है. संगम किनारे हजारों श्रद्धालु और साधु-संतों का जमावड़ा लगा है. इस मेले में गृहस्थी कल्पवासी संयमित जीवन जीते हुए सनातनी परंपरा का पालन कर रहे हैं. साधु-संत कथा वाचन, ईश्वर भजन और सत्संग के माध्यम से जीवन मूल्यों की सीख दे रहे हैं.

नागा साधु और 11,000 रुद्राक्ष-
माघ मेले में श्री तपोनिधि निरंजनी पंचायती अखाड़ा से जुड़े नागा साधु दिगंबर अजयगिरी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. उन्होंने अपने शरीर पर 11,000 रुद्राक्ष धारण किए हैं, जिनका वजन लगभग 30 किलो है. रुद्राक्ष बाबा के नाम से प्रसिद्ध यह साधु शिव के गण के रूप में दिखते हैं और छह महीने केदारनाथ धाम में साधना करते हैं. उन्होंने कहा कि जब हम परमात्मा के ध्यान में रहते हैं तो परमात्मा हमारा ध्यान रखते हैं.

भगवान राम के वेश में 5 साल के श्रीश-
माघ मेले में पांच वर्षीय श्रीश बाहुबली महाराज भगवान राम के वेश में नजर आए. उन्होंने संगम तट पर मां गंगा की पूजा अर्चना की और कविताओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि सारे बच्चे दुनिया के अपने माता-पिता की बात माने और राम बने. उनके दर्शन और संदेश ने श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया.

आस्था के रंग-
माघ मेले के बाद श्रद्धालु अयोध्या और काशी पहुंचे, जहां रामलला के दर्शन के लिए भारी संख्या में लोग उमड़े. गया में बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने अपनी आस्था का प्रदर्शन किया. पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में गंगा सागर मेले की शुरुआत से पहले ही भक्ति का माहौल बन चुका है.

विदेशी श्रद्धालु और भक्ति का अनोखा अंदाज-
संगम नगरी में विदेशी श्रद्धालु भी पहुंचे, जो भारतीय संस्कृति और सनातनी परंपरा से प्रभावित हुए. मेले में भक्ति का अनोखा अंदाज और रंग-बिरंगे परिधान चर्चा का विषय बने.

माघ मेले की भव्यता और विविधता ने एक बार फिर सनातनी परंपरा, तपस्या और आध्यात्मिक चेतना को जीवंत कर दिया है. यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्वास, सेवा और संस्कृति की जीती-जागती मिसाल है.

ये भी पढ़ें: