Ergos
Ergos
खेती को अक्सर मेहनत और जोखिम से भरा काम माना जाता है. किसान सालभर मेहनत करता है, लेकिन जब फसल बेचने की बारी आती है तो उसे सही दाम नहीं मिल पाता. बिहार से एक ऐसी पहल सामने आई है, जिसने इस समस्या का बड़ा समाधान दिया है. 'एरगोस' नाम का डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों को ग्रेन बैंक अकाउंट की सुविधा दे रहा है, जिससे वे अब अपनी फसल को सही समय पर और बेहतर कीमत पर बेच पा रहे हैं.
क्या है ग्रेन बैंक अकाउंट मॉडल?
इस मॉडल के तहत गांव स्तर पर आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से गोदाम बनाए गए हैं. किसान अपनी फसल को इन गोदामों में सुरक्षित जमा कर सकता है. इसके बदले उसे एक डिजिटल अकाउंट मिलता है, जिसे ग्रेन बैंक अकाउंट कहा जाता है.
इस अकाउंट में उसकी जमा फसल की पूरी जानकारी दर्ज रहती है. किसान अपने मोबाइल फोन से कभी भी यह देख सकता है कि उसकी फसल कितनी है और बाजार में उसका क्या भाव चल रहा है.
पहले मजबूरी थी अब फैसला किसान के हाथ में
पहले किसान को कटाई के तुरंत बाद फसल बेचनी पड़ती थी क्योंकि भंडारण की कमी होती है. अगर फसल घर में रखी जाती, तो खराब होने का खतरा रहता था. ऐसे में किसान Kishor Kumar Jha और Praveen Kumar ने Ergos के रूप में इसका समाधान निकाला, जिसका उद्देश्य बिचौलियों को खत्म करना और किसानों को अपनी फसल की बिक्री के फैसले पर पूरा नियंत्रण देना है.
किसान बिचौलियों के बताए दाम पर ही बेचने को मजबूर होता था. अब इस मॉडल के आने से स्थिति बदल गई है. किसान अपनी फसल सुरक्षित रख सकता है और बाजार के सही समय का इंतजार कर सकता है. जब कीमत बढ़ती है, तब वह मोबाइल के जरिए फसल बेच देता है. इससे उसे सीधा फायदा मिलता है और कमाई बढ़ती है.
सस्ते कर्ज की सुविधा भी मिलती है
इस व्यवस्था का एक बड़ा फायदा यह भी है कि किसान को पैसों की जरूरत होने पर उसे महंगे ब्याज पर कर्ज नहीं लेना पड़ता. ग्रेन बैंक में जमा फसल के आधार पर किसान को बहुत कम ब्याज (करीब 1%) पर लोन मिल जाता है. आमतौर पर गांवों में किसान 50-60% तक ब्याज पर कर्ज लेते हैं, जिससे वे कर्ज के जाल में फंस जाते हैं. लेकिन इस मॉडल में जब किसान अपनी फसल बेचता है, तो उसी रकम से कर्ज अपने आप कट जाता है. इससे किसान पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता.
अनाज की बर्बादी में भी आएगी कमी
भारत में हर साल करीब 18% अनाज खराब हो जाता है, जिसका मुख्य कारण सही भंडारण की कमी है. ग्रेन बैंक में अनाज को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखा जाता है, जिससे खराब होने की संभावना काफी कम हो जाती है. इससे न सिर्फ किसान को फायदा होता है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होती है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस मॉडल को देशभर में लागू किया जाए, तो यह खेती की तस्वीर बदल सकता है. इससे किसानों की आय बढ़ेगी, बिचौलियों की भूमिका कम होगी और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी.