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EMI के लेट होने पर कब होता है क्रेडिट स्कोर हिट? 90 दिन बाद कैसे बढ़ता है खतरा.. कैसे बचा सकते हैं अपना सिबिल स्कोर?

लोग अपनी जरूरत के हिसाब के कई प्रकार के लोन लेते हैं. कई बार EMI समय से लेट हो जाती है. अगर पेमेंट 30 दिन से ज्यादा लेट हो जाती है तो सिबिल स्कोर हिट होता है.

Missed EMI Missed EMI

आज के समय में ज्यादातर लोग होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में हर महीने EMI भरना एक आम बात बन चुकी है. लेकिन कई लोग यह सोचकर एक EMI मिस कर देते हैं कि अगले महीने एडजस्ट कर लेंगे और इससे कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा. जबकि सच्चाई यह है कि सिर्फ एक EMI मिस होना भी आपकी फाइनेंशियल हेल्थ पर भारी असर डाल सकता है.

एक EMI पड़ सकती भारी
जब कोई व्यक्ति समय पर EMI या क्रेडिट कार्ड बिल नहीं भरता, तो बैंक और फाइनेंस कंपनियां इसे गंभीर संकेत मानती हैं. इससे उन्हें लगता है कि ग्राहक की रीपेमेंट कमजोर हो रही है. यही वजह है कि भविष्य में नया लोन लेने के दौरान ज्यादा जांच-पड़ताल शुरू हो जाती है. चाहे आप होम लोन लें, बिजनेस लोन लें या किसी दूसरी फाइनेंसिंग के लिए आवेदन करें, खराब रिकॉर्ड परेशानी बढ़ा सकता है.

30 दिन की देरी सबसे बड़ा खतरा
अगर EMI कुछ दिन लेट होती है, तो शुरुआत में केवल लेट फीस लगती है. लेकिन असली दिक्कत तब शुरू होती है जब पेमेंट 30 दिन से ज्यादा ओवरड्यू हो जाती है. इसके बाद बैंक आपके अकाउंट की जानकारी क्रेडिट ब्यूरो जैसे CIBIL, Experian या Equifax को भेज देते हैं. फिर यह नेगेटिव रिकॉर्ड आपकी क्रेडिट हिस्ट्री में जुड़ जाता है और कई साल तक दिखाई दे सकता है.

ज्यादा देरी का मतलब ज्यादा नुकसान
अगर भुगतान 30 से 59 दिन तक लेट रहता है, तो इसे हल्की वित्तीय परेशानी माना जाता है. 60 से 89 दिन की देरी गंभीर तनाव का संकेत देती है. वहीं 90 दिन से ज्यादा देरी होने पर अकाउंट NPA यानी Non-Performing Asset की कैटेगरी में जा सकता है. हर स्टेज पर आपका क्रेडिट स्कोर तेजी से गिरता है.

फिनटेक कंपनियां क्यों करती हैं जल्दी एक्शन?
आजकल कई डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म और फिनटेक कंपनियां रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल करती हैं. ऐसे में EMI लेट होते ही तुरंत अलर्ट जारी हो सकता है. इससे आपका क्रेडिट लिमिट घट सकता है या भविष्य में लोन मंजूरी मुश्किल हो सकती है.

अगर EMI मिस होने वाली हो तो क्या करें?

  • सबसे जरूरी बात यह है कि पहले 30 दिन किसी भी हालत में खराब न होने दें. 
  • अगर पैसे की परेशानी है, तो समय रहते बैंक या लेंडर से बात करें. उनसे पेमेंट डेट बढ़ाने या नई किस्त व्यवस्था की मांग करें.
  • अगर लंबे समय तक आर्थिक दबाव रहने वाला है, तो लोन रीस्ट्रक्चरिंग पर विचार किया जा सकता है. साथ ही सबसे पहले जरूरी EMI भरने पर ध्यान दें.