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New Tax Regime Benefits: टैक्सपेयर ध्यान दें! ITR भरने के लिए न्यू टैक्स रिजीम से बचे नहीं, जानें इसके 7 बड़े फायदे

New Tax Regime: न्यू टैक्स रिजीम भले ही कम छूट वाला हो लेकिन इसमें ऐसे कई फायदे हैं, जिनसे टैक्सपेयर अपना टैक्स घटा सकते हैं. आप नए रिजीम को समझकर प्लानिंग करते हैं, तो फिर कम छूट के बावजूद भी ज्यादा बचत संभव है. यहां आप जान सकते हैं न्यू टैक्स रिजीम चुनने के 7 बड़े फायदे.

New Tax Regime Benefits New Tax Regime Benefits

इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) यानी आईटीआर (ITR) दाखिल करने के लिए टैक्सपेयर्स (Taxpayers) को दो विकल्प पहला ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) और दूसरा न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) मिलते हैं. ओल्ड टैक्स रिजीम में ढेर सारी टैक्स छूट दी जाती है जैसे HRA, होम लोन के ब्याज पर 2 लाख तक की छूट, सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख तक का निवेश टैक्स फ्री, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम, एजुकेशन लोन का ब्याज और डोनेशन पर टैक्स छूट. ऐसे में टैक्सपेयर्स को लगता है कि ओल्ड टैक्स रिजीम चुनना ही उनके लिए बेहतर है लेकिन यह सही नहीं है. असल में न्यू टैक्स रिजीम में भले ही कम छूट मिलते हैं लेकिन इसमें ऐसे कई फायदे हैं, जिनसे करदाता अपना टैक्स घटा सकते हैं.

न्यू टैक्स रिजीम में सालाना इतनी कमाई पर नहीं देना पड़ता है टैक्स
आपको मालूम हो कि न्यू टैक्स रिजीम में यदि किसी की सालाना इनकम 12 लाख रुपए तक है तो कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है. नौकरी करने वाले लोगों को 75000 रुपए का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलता है. ऐसे में उनकी 12.75 लाख रुपए तक की सालाना सैलरी पर टैक्स जीरो हो जाता है. इसके अलावा नया टैक्स रिजीम में मील वाउचर, कंपनी की ओर से कार सुविधा, 15000 रुपए तक के गिफ्ट और NPS में एम्प्लॉयर का योगदान जैसे कुछ फायदे भी मिलते हैं.

ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और फैमिली पेंशन पर भी तय सीमा तक छूट मिलती है. न्यू टैक्स रिजीम में किसी निवेश को दिखाने की जरूरत नहीं, यहां कैलकुलेशन काफी सरल और सीधा है. आपको मालूम हो कि सरकार नया टैक्स रिजीम इसलिए लेकर आई क्योंकि वह रिजीम को आसान बनाना चाहती थी. पुराना टैक्स रिजीम जटिल था. ओल्ड टैक्स रिजीम में कई सारे डिडक्शन, ज्यादा कागजी काम और टैक्स कैलकुलेशन करना मुश्किल था. उधर, न्यू टैक्स रिजीम में कम टैक्स स्लैब है. फाइलिंग की प्रक्रिया काफी आसान है.

नए टैक्स रिजीम के फायदे
1. स्टैंडर्ड डिडक्शन: नए टैक्स रिजीम में सैलरी पाने वालों कों स्टैंडर्ड डिडक्शन 75000 रुपए मिलता है. इससे टैक्सपेयर की टैक्सेबल इनकम सीधे घटती है.

2. NPS का मिलात है फायदा: न्यू टैक्स रिजीम में NPS का फायदा मिलात है. सेक्शन 80CCD(2) के तहत एंप्लॉयर का योगदान टैक्स फ्री है. यह नई कर व्यवस्था में सबसे अच्छा टैक्स बचाने वाला टूल है.

3. रिटायरमेंट पर लाभ: न्यू टैक्स रिजीम में नौकरी से रिटायरमेंट पर फायदा मिलता है. ग्रेच्युटी, लीव एन्कैशमेंट बेनिफिट्स टैक्स फ्री रहते हैं. ऐसे में नौकरी बदलते या रिटायर होते समय बड़ी राहत मिलती है.

4. सैलरी स्ट्रक्चर से बचा सकते हैं टैक्स: न्यू टैक्स रिजीम में सैलरी स्ट्रक्चर से टैक्स बच सकता है. कंपनी का घर, कार, बाकी भत्ते की सही प्लानिंग कर टैक्स बचाया जा सकता है.

5. न्यू टैक्स रिजीम में छूट: न्यू टैक्स रिजीम में अभी भी कई छोटी छूट मिलती है. जैसे ₹200 तक फ्री मील, ₹15000 तक गिफ्ट. ये छोटे-छोटे फायदे मिलकर बड़ा असर डालते हैं.

6. ब्याज पर छूट: यदि प्रॉपर्टी किराए पर है तो ब्याज पर छूट मिलती है. यानी कि होमओनर्स के लिए राहत है.

7. क्या टैक्स स्लैब से होता है फायदा: अब सवाल है कि क्या न्यू टैक्स रिजीम में टैक्स स्लैब से फायदा मिलता है तो इसका जवाब हां है. नए सिस्टम में टैक्स दर कम है. मिडिल क्लास को राहत है. न्यू टैक्स रिजीम में फाइलिंग आसान है. यदि आप सैलरीड हैं तो अपनी इनकम स्ट्रक्चर समझें. NPS ऑप्शन देखें. कंपनी के भत्ते का सही इस्तेमाल करें. आपको समझना चाहिए कि कम छूट में ही ज्यादा प्लानिंग जरूरी है. 

न्यू टैक्स रिजीम में कितनी सालाना आय पर कितना लगता है टैक्स
1. 4 लाख रुपए तक की सालाना इनकम पर 0 प्रतिशत टैक्स.
2. 4 से 8 लाख रुपए तक की सालाना इनकम पर 5 प्रतिशत टैक्स.
3. 8 से 12 लाख रुपए तक की सालाना इनकम पर 10 प्रतिशत टैक्स.
4. 12 से 16 लाख रुपए तक की सालाना इनकम पर 15 प्रतिशत टैक्स.
5. 16 से 20 लाख रुपए तक की सालाना इनकम पर 20 प्रतिशत टैक्स.
6. 20 से 24 लाख रुपए तक की सालाना इनकम पर 25 प्रतिशत टैक्स.
7. 24 लाख रुपए से अधिक की सालाना इनकम पर 30 प्रतिशत टैक्स.
8. न्यू टैक्स रिजीम में 4 से 8 लाख रुपए तक की इनकम पर 5 प्रतिशत टैक्स और 8 से 12 लाख रुपए तक की इनकम पर 10 प्रतिशत टैक्स सरकार सीधे माफ कर देती है.