यूनिकॉर्न उन कंपनियों को कहा जाता है जिसकी वैल्यू 1 अरब डॉलर यानी 75,400 करोड़ रुपए से ज्यादा होती है.
यूनिकॉर्न उन कंपनियों को कहा जाता है जिसकी वैल्यू 1 अरब डॉलर यानी 75,400 करोड़ रुपए से ज्यादा होती है.
भारतीय मूल के लोग तो पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवा ही चुके हैं अब भारतीय स्टार्टअप्स ने भी दुनिया पर राज करने की तैयारी कर ली है. अब तक भारत की 54 कंपनियों को यूनिकॉर्न का दर्जा मिल चुका है. हुरुन इंडिया द्वारा हाल में जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक इस रेस में भारत ने ब्रिटेन जैसे विकसित देश को भी पछाड़ दिया है. दरअसल इस रिपोर्ट में भारत को 54 यूनिकॉर्न के साथ तीसरी रैंक दी गई है. इसी के साथ भारत ने यूनिकॉर्न उन कंपनियों को कहा जाता है जिसकी वैल्यू 1 अरब डॉलर यानी 75,400 करोड़ रुपए से ज्यादा होती है.
बायजू सबसे वैल्यूएबल यूनिकॉर्न
इस रिपोर्ट में थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड द्वारा भारत में चलाई जा रही एडटेक स्टार्टअप, बायजू सबसे वैल्यूएबल यूनिकॉर्न है. बायजू का कुल वैल्यूएशन 21 अरब डॉलर यानी लगभग 16 लाख करोड़ रुपए है. 12 अरब डॉलर के साथ इनमोबी दूसरे, 9.5 अरब डॉलर के साथ ओयो तीसरे और 7.5 अरब डॉलर के साथ रेजरपे चौथे नंबर पर है.
बेंगलुरु में हैं सबसे ज्यादा यूनिकॉर्न
भारत में अकेले बेंगलुरु में 28 यूनिकॉर्न हैं जो एक ही शहर से ओरिजिनेट हुए यूनिकॉर्न्स की सातवीं सबसे बड़ी संख्या है. रिपोर्ट की मानें तो भारत के बेंगलुरु में बोस्टन, पालो ऑल्टो, पेरिस, बर्लिन, शिकागो जैसे शहरों से ज्यादा यूनिकॉर्न हैं. बता दें, 2020 में, भारत में यूनिकॉर्न्स की संख्या 33 थी जो 2021 में बढ़कर 54 हो गई है. वहीं, फिलहाल ब्रिटेन में 39 यूनिकॉर्न हैं, जो पिछले साल की तुलना में 15 अधिक है.
इस साल 28% स्टार्टअप्स बने यूनिकॉर्न
कुल मिलाकर, भारतीयों ने 119 गेंडा की स्थापना की, जिनमें से 54 भारत में हैं. हुरुन रिसर्च ने कहा कि भारत के प्रवासी यूनिकॉर्न फाउंडर्स की संख्या सबसे अधिक है. इसके बाद चीन, इजराइल और रूस का स्थान है. दुनिया के 74% यूनिकॉर्न अमेरिका और चीन में हैं. इस साल 28% स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न कंपनियां बनें, वहीं 7% यानी 39 कंपनियां वैल्यू कम होने के कारण यूनिकॉर्न की कैटेगरी से बाहर हो गईं. पूरी दुनिया में कुल 673 स्टार्टअप यूनिकॉर्न बनें, जबकि 201 सूची से बाहर हो गए.