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हर साल बजट के दौरान 'टैक्स हॉलिडे' शब्द जरूर सुनने को मिलता है, लेकिन बहुत से लोग इसे सिर्फ बड़ी कंपनियों या अमीर निवेशकों से जोड़कर देखते हैं. हकीकत इससे अलग है. अगर आप स्टार्टअप चला रहे हैं, नया बिजनेस शुरू करने की योजना बना रहे हैं या निवेश के मौके तलाश रहे हैं, तो टैक्स हॉलिडे आपके लिए एक बड़ा अवसर हो सकता है. आसान शब्दों में कहें तो यह सरकार की तरफ से दी जाने वाली ऐसी राहत है, जिससे आप अपने कारोबार को तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं.
टैक्स हॉलिडे का मतलब है तय समय के लिए टैक्स में छूट. इस अवधि में सरकार आपसे पूरा टैक्स नहीं लेती या कई मामलों में बिल्कुल भी टैक्स नहीं वसूलती. इसका सीधा फायदा यह होता है कि जो पैसा टैक्स में जाता, वही पैसा आप बिजनेस के विस्तार, नई मशीनरी, कर्मचारियों की भर्ती, सेविंग या निवेश में लगा सकते हैं.
सरकार टैक्स हॉलिडे क्यों देती है?
सरकार टैक्स हॉलिडे बिना वजह नहीं देती. इसका मकसद नए उद्योगों को बढ़ावा देना, पिछड़े या कम विकसित क्षेत्रों में निवेश लाना, स्टार्टअप और छोटे कारोबार को शुरुआती सहारा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना होता है. इसके अलावा विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करने में भी टैक्स हॉलिडे अहम भूमिका निभाता है. कुल मिलाकर सरकार चाहती है कि उद्योग आगे बढ़ें, अर्थव्यवस्था मजबूत हो और लोगों को रोजगार मिले.
टैक्स हॉलिडे की अवधि कितनी होती है?
टैक्स हॉलिडे हमेशा के लिए नहीं होता. यह एक निश्चित समय के लिए दिया जाता है, जैसे 3 साल, 5 साल, 10 साल या कुछ खास मामलों में इससे भी ज्यादा. तय अवधि खत्म होने के बाद सामान्य टैक्स नियम दोबारा लागू हो जाते हैं.
टैक्स हॉलिडे से कंपनियों की लागत कम होती है और मुनाफा बढ़ता है. शुरुआती दौर में स्टार्टअप को बड़ी राहत मिलती है, जिससे वे मजबूती से खड़े हो पाते हैं. इसके साथ ही नए उद्योग खुलने से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और अलग-अलग सेक्टर में तेजी देखने को मिलती है.
टैक्स हॉलिडे के अलग-अलग प्रकार
टैक्स हॉलिडे कई तरह के हो सकते हैं. कुछ कंपनियों को इनकम टैक्स में छूट मिलती है, एक्सपोर्ट से जुड़ी यूनिट्स को टैक्स राहत दी जाती है, वहीं IT, मैन्युफैक्चरिंग जैसे खास सेक्टर को भी इसका फायदा मिलता है. स्टार्टअप्स के लिए अलग टैक्स छूट, पिछड़े इलाकों में काम करने वालों को राहत, ग्रीन एनर्जी और रिसर्च से जुड़ी कंपनियों को छूट.