
Muzaffarpur Shahi Litchi Agarbatti
Muzaffarpur Shahi Litchi Agarbatti
बिहार के मुजफ्फरपुर की विश्वप्रसिद्ध शाही लीची अब सिर्फ अपने स्वाद और मिठास के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी खास खुशबू के कारण भी चर्चा में है. शहर के शुक्ला रोड निवासी मोहम्मद सलाउद्दीन उर्फ मुन्ना भाई ने शाही लीची की सुगंध वाली अगरबत्ती तैयार कर एक अलग पहचान बनाई है. 'शाही लीची अगरबत्ती' नाम से बिक रहा यह उत्पाद अब देश के कई राज्यों के साथ-साथ विदेशों तक पहुंचने की तैयारी में है.
शाही लीची अगरबत्ती बनाने का ऐसे आया आइडिया
मोहम्मद सलाउद्दीन बताते हैं कि उन्हें यह आइडिया दूसरे शहरों की यात्रा के दौरान आया. हैदराबाद में कराची बिस्कुट की लोकप्रियता देखने के बाद उन्होंने सोचा कि मुजफ्फरपुर की पहचान शाही लीची को भी किसी नए उत्पाद के जरिए देश-दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है. इसी सोच से शाही लीची खुशबू वाली अगरबत्ती बनाने की शुरुआत हुई.
ऐसे तैयार की जाती है अगरबत्ती
अगरबत्ती तैयार करने की प्रक्रिया भी खास है. बांस की पतली सींक पर लकड़ी का बुरादा, चारकोल पाउडर और जिगट पाउडर का मिश्रण चढ़ाया जाता है. इसके बाद इसे सुखाकर विशेष तरीके से तैयार शाही लीची फ्रेगरेंस मिलाई जाती है. जलने के बाद इसकी खुशबू बिल्कुल शाही लीची जैसी मीठी महक देती है. इसकी खास बात यह है कि लोग घरों में इसे जलाकर शाही लीची के एहसास को महसूस कर सकते हैं. पूजा-पाठ के अलावा कई लोग इसे घरों और कार्यालयों में वातावरण को सुगंधित और ताजगीभरा बनाने के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं.

कर रहे सालाना 50 से 60 लाख रुपए तक का कारोबार
फिलहाल शाही लीची अगरबत्ती के 10 और 50 रुपए के पैकेट बाजार में उपलब्ध हैं. सलाउद्दीन के मुताबिक शाही लीची अगरबत्ती से सालाना 50 से 60 लाख रुपए तक का कारोबार हो रहा है. इसे दो करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य है. देश के कई राज्यों में इसकी डिमांड है. अब दुबई, थाईलैंड और बांग्लादेश से भी डिस्ट्रीब्यूटर संपर्क कर रहे हैं. इस कारोबार से 50 से 60 कारीगरों को रोजगार भी मिला है. मुजफ्फरपुर की शाही लीची अब स्वाद के साथ-साथ अपनी खुशबू से भी दुनिया में नई पहचान बना रही है.
(मुजफ्फरपुर से मणि भूषण शर्मा की रिपोर्ट)