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Petrol and Diesel Excise Duty Cut: क्या होती है एक्साइज ड्यूटी? मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क घटाने का लिया फैसला, तेल की कीमत में राहत की उम्मीद

Excise Duty: मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटा कर बड़ी खुशखबरी दी है. पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपए प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया है. इससे आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमत कम होने की उम्मीद है. आइए जानते हैं आखिर क्या होती है एक्साइज ड्यूटी?

Petrol and Diesel Excise Duty Cut Petrol and Diesel Excise Duty Cut

इजराइल-अमेरिका बनाम ईरान युद्ध के चलते भारत समेत दुनिया के कई देशों में होने वाली गैस और तेल की सप्लाई बाधित हुई है. इसी बीच मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटा कर बड़ी खुशखबरी दी है.

पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपए प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया है. इससे सरकार ने तेल कंपनियों को बड़ी राहत दी है. आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमत कम होने की उम्मीद है. सरकार ने साफ किया है कि देश ने अगले 60 दिन के लिए अन्य स्रोतों से पर्याप्त कच्चे तेल की आपूर्ति सुरक्षित कर ली है. आइए जानते हैं आखिर क्या होती है एक्साइज ड्यूटी? आपको मालूम हो कि देश में तेल की कीमतें केंद्र और राज्य सरकार की ओर से लगाए जाने वाले टैक्स पर निर्भर हैं. केंद्र सरकार जहां एक्साइज ड्यूटी लगाती है, वहीं राज्य सरकारों की ओर से वैट यानी वैल्यू एडेड टैक्स लगाया जाता है.

अभी कहां और क्या है पेट्रोल-डीजल की कीमत 
1. दिल्ली: यहां पेट्रोल की कीमत ₹94.77 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹87.67 प्रति लीटर है. 
2. नोएडा: यहां पेट्रोल की कीमत ₹94.85 और डीजल की कीमत ₹87.98 है. 
3. मुंबई: यहां पेट्रोल की कीमत 103.54 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 90.03 रुपए प्रति लीटर है. 
4. चेन्नई: यहां पेट्रोल की कीमत ₹100.80-₹101.06 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹92.38-₹92.61 प्रति लीटर के बीच है. 
5. लखनऊ: यहां पेट्रोल की कीमत ₹94.69 से ₹94.84 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹87.81 से ₹88.05 प्रति लीटर के बीच है.

क्या होती है एक्साइज ड्यूटी
एक्साइज ड्यूटी जिसे एक्साइज टैक्स और हिंदी में उत्पाद शुल्क कहा जाता है. एक्साइज ड्यूटी को अब सेंट्रल वैल्यू ऐडेड टैक्स (CENVAT) भी कहा जाता है. एक्साइज ड्यूटी देश के भीतर गुड्स के प्रॉडक्शन व उसकी बिक्री पर केंद्र सरकार की ओर से लगाया जाने वाला टैक्स है. यह एक तरह से अप्रत्यक्ष कर है. आपको मालूम हो कि कोई वस्तु बनाने वाला मैन्यूफैक्चरर यानी निर्माता अपने उत्पाद पर लगाई जाने वाली एक्साइज ड्यूटी, उस वस्तु पर लगाए जाने वाले बाकी टैक्स के साथ जोड़कर ग्राहकों से वसूलता है. इसके बाद निर्माता अपने उत्पाद पर ग्राहकों से वसूल की गई एक्साइज ड्यूटी की रकम को सरकार के पास जमा कर देता है. इससे सरकार को करोड़ों रुपए की इनकम होती है. किसी भी उत्पाद पर एक्साइज ड्यूटी लगाने का मुख्य उद्देश्य देश के लिए राजस्व इकट्ठा करना है, ताकि विकास कार्यों और जनकल्याण के काम में उसका इस्तेमाल किया जा सके. आपको मालूम हो कि अपने देश में आजादी से पहले से ही एक्साइज ड्यूटी का नियम लागू है. एक्साइज ड्यूटी को 26 जनवरी 1944 को लागू किया गया था. 

तीन तरह की होती है एक्साइज ड्यूटी 
1. बेसिक एक्साइज ड्यूटी
2. एडिशनल एक्साइज ड्यूटी 
3. स्पेशल एक्साइज ड्यूटी. 

तीनों एक्साइज ड्यूटी में क्या होता है अंतर  
एक्साइज ड्यूटी 1944 के सेंट्रल एक्साइज एंड साल्ट एक्ट के सेक्शन 3 के तहत नमक को छोड़कर देश में बनाए गए सभी एक्साइजेबल गुड्स पर बेसिक एक्साइज ड्यूटी लागू होती है. यह टैक्स सेट्रल एक्साइज टैरिफ एक्ट 1985 के तहत लगाया जाता है. उधर, एडिशनल ड्यूटीज ऑफ एक्साइज एक्ट 1957 के सेक्शन 3 के तहत लिस्टेड सामानों पर एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लगाई जाती है. स्पेशल एक्साइज ड्यूटी के तहत कुछ स्पेशल तरह के गुड्स आते हैं, जिन पर एक्साइज ड्यूटी लगाई जाती है. इनका जिक्र पहले से ही फाइनेंस एक्ट में किया जाता है.

क्या होता है एक्साइजेबल गुड्स और किन्हें देनी होती है एक्साइज ड्यूटी
एक्साइजेबल गुड्स का मतलब उन सभी वस्तुओं से है जो सेंट्रल एक्साइज टैरिफ एक्ट 1985 के पहले और तीसरे शेड्यूल के अंतर्गत आती हैं. इन सभी गुड्स पर एक्साइज ड्यूटी लगाई जाती है. आपको मालूम हो कि कोई भी सामान बनाने वाले व्यक्ति या कंपनी को एक्साइज ड्यूटी देनी जरूरी है. इसमें तीन तरह की पार्टियां शामिल हैं. पहला जो खुद सामान बनाए, दूसरा जो कर्मचारियों से सामान बनवाए और तीसरा जो किसी अन्य पार्टी से गुड्स मैन्युफैक्चर कराए.