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पंजाब कैबिनेट ने पहली एक्साइज पॉलिसी को दी मंजूरी, सूबे में शराब की कीमतों में 30 से 40% की कमी आने की उम्मीद 

Punjab liquor prices: पंजाब कैबिनेट ने पहली एक्साइज पॉलिसी को मंजूरी दे दी है. इस नई पॉलिसी के आ जाने का बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि सूबे में शराब की कीमतों में 30 से 40% की कमी आ जाएगी.

Liquor Liquor
हाइलाइट्स
  • माफियाओं के नेक्सस को तोडना है उद्देश्य 

  • स्पेशल बटालियन भी की है अप्रूव 

Punjab liquor prices: पंजाब सरकार ने पहली एक्साइज पॉलिसी फाइनल कर ली है और बुधवार को कैबिनेट ने इस पॉलिसी को मंजूरी भी दे दी है. इस नई पॉलिसी से सूबे में जिससे शराब की कीमतों में कम से कम 30 से 40% की कमी आने की उम्मीद की जा रही है. इसके बाद पंजाब में शराब के दाम केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और हरियाणा के बराबर हो जाएंगे.  

शराब की तस्करी को रोकने की है कोशिश 

आपको बता दें, ये पॉलिसी पड़ोसी राज्यों से बढ़ रही शराब की तस्करी पर कड़ी नजर रखने के उद्देश्य से लाई जा रही है. बता दें, ये इस साल 1 जुलाई से 31 मार्च 2023 तक नौ महीने की अवधि के लिए लागू रहेगी. 

लाइव मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, एक मुख्यमंत्री कार्यलय के प्रवक्ता ने बताया कि इस कदम से राज्य सरकार 9,647.85 करोड़ रुपये के राजस्व सृजन की उम्मीद कर रही है, जो पिछले साल शराब कारोबार से जुटाए गए राजस्व से 40% अधिक है. 

माफियाओं के नेक्सस को तोडना है उद्देश्य 

नई एक्साइज पॉलिसी का उद्देश्य शराब कारोबार में शामिल माफियाओं के नेक्सस को तोड़ना है. इसके अलावा, मैन्युफैक्चरर, थोक विक्रेता और फुटकर विक्रेता एक दूसरे से दूरी पर होंगे और पूरी तरह से अलग-थलग होंगे, जिससे उनके बीच कोई कॉमन स्टेकहोल्डर नहीं होगा.  

स्पेशल बटालियन भी की है अप्रूव 

बता दें, कैबिनेट एक्साइज डिपार्टमेंट में पुलिस की दो विशेष बटालियनों को भी अप्रूव किया है. वर्तमान में जो भी बल शराब की तस्करी पर नजर रख रहा है उनसे हटकर ये स्पशल बटालियन भी अलग से चोरी पर निगरानी रखेगी.  इससे दूसरे राज्य से आ रही अवैध शराब पर निगरानी रखी जा सकेगी.

क्या कहती है नई पॉलिसी? 

नई एक्साइज पॉलिसी के अनुसार खुदरा लाइसेंसधारियों द्वारा आईएमएफएल और बीयर उठाने के लिए कोई कोटा तय नहीं किया गया है. पहले शराब ठेकों की अलॉटमेंट के साथ ही सरकार शराब और बीयर का भी एक निश्चित कोटा तय करती है, लेकिन अब नई पॉलिसी में ऐसा नहीं हो सकेगा. कोई कोटा फिक्स नहीं रखा जायेगा. कोटा फिक्स न करने से राज्य सरकार को उम्मीद है कि राजस्व में भारी बढ़ोतरी होगी.