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RBI Repo Rate: RBI ने रेपो रेट 5.25% पर रखा बरकरार, EMI में फिलहाल राहत या झटका नहीं

रिजर्व बैंक ने नए वित्त वर्ष की दूसरी मीटिंग में रेपो रेट में बदलाव नहीं किया है. इसे 5.25% पर बरकरार रखा है. RBI ने आर्थिक विकास दर यानी GDP ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है.

RBI on Repo Rates RBI on Repo Rates

रिजर्व बैंक ने नए वित्त वर्ष की दूसरी मीटिंग में रेपो रेट में बदलाव नहीं किया है. इसे 5.25% पर बरकरार रखा है. RBI का कहना है कि फिलहाल महंगे कच्चे तेल, वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावट और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के असर को समझने के लिए इंतजार करना जरूरी है. इससे पहले अप्रैल में भी रेपो रेट में बदलाव नहीं हुआ था.

क्यों नहीं बदली ब्याज दर?
RBI के सामने इस समय दोहरी चुनौती है. एक तरफ खुदरा महंगाई (CPI Inflation) अभी केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव आने वाले महीनों में महंगाई को बढ़ा सकते हैं. RBI ने आर्थिक विकास दर यानी GDP ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है. अब चालू वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ आउटलुक को 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है.

गवर्नर ने कहा कि अभी तक वैश्विक झटकों का असर घरेलू कीमतों पर सीमित रहा है, लेकिन अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो महंगाई का दबाव बढ़ सकता है. इसी वजह से MPC ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया.

मिडिल ईस्ट का संकट सबसे बड़ी चिंता
RBI ने अपनी समीक्षा में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को सबसे बड़ा जोखिम बताया है. इस तनाव की वजह से ऊर्जा बाजार, व्यापारिक मार्ग और वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रहे हैं. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर दिखने लगा है. RBI का मानना है कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो महंगाई और आर्थिक वृद्धि दोनों पर दबाव बढ़ सकता है.

आर्थिक विकास पर भी मंडरा रहा खतरा
महंगाई के साथ-साथ RBI ने आर्थिक विकास दर को लेकर भी चिंता जताई है. देश में मांग अभी मजबूत बनी हुई है और मैन्युफैक्चरिंग व सर्विस सेक्टर का विस्तार जारी है. हालांकि कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी आर्थिक संकेतकों में सुस्ती के शुरुआती संकेत दिखने लगे हैं. ऊंची ऊर्जा लागत और सप्लाई संबंधी दिक्कतें आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं.

कमजोर मानसून और एल-नीनो ने बढ़ाई टेंशन
वैश्विक कारणों के अलावा घरेलू मोर्चे पर भी RBI सतर्क है. मौसम विभाग की ओर से सामान्य से कम मानसून और एल-नीनो की आशंका जताई गई है. अगर बारिश कम होती है तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं. इससे महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ने का खतरा रहेगा.

आम लोगों पर क्या होगा असर?
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने का मतलब है कि फिलहाल होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज की ब्याज दरों में बड़ी राहत या बढ़ोतरी की संभावना नहीं है. यानी EMI में निकट भविष्य में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा.

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