Gross Income vs Net Income vs Taxable Income
Gross Income vs Net Income vs Taxable Income
इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग सिस्टम में 1 अप्रैल 2026 से बड़ा बदलाव होने जा रहा है. टैक्सपेयर्स को इन बदलावों के बारे में तो जानना जरूरी है साथ ही इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय ग्रॉस इनकम (Gross Income), नेट इनकम (Net Income) और टैक्सेबल इनकम (Taxable Income) के बीच अंतर को भी समझना बेहद जरूरी है. अधिकांश लोग ग्रॉस इनकम, नेट इनकम और टैक्सेबल इनकम को एक ही समझ लेते हैं और गलत आईटीआर दाखिल कर देते हैं. ऐसा करने पर ज्यादा टैक्स तो देना ही पड़ता है साथ ही आयकर विभाग से आए नोटिस का सामना भी करना पड़ता है. आइए जानेत हैं ग्रॉस-नेट और टैक्सेबल इनकम में क्या है अंतर?
1. क्या है ग्रॉस इनकम?
ग्रॉस इनकम आपकी कुल कमाई होती है. इसमें सभी स्रोतों से हुई आय बिना किसी कटौती के शामिल होती है. इसमें सैलरी, बिजनेस इनकम, किराए की आय, ब्याज, फ्रीलांस या साइड इनकम, कैपिटल गेन सबकुछ शामिल होती है. यदि आप कहीं जॉब करते हैं तो आपकी ग्रॉस सैलरी में बेसिक सैलरी, हाउस रेंट अलाउंस, ट्रैवल अलाउंस, महंगाई भत्ता, स्पेशल अलाउंस, अन्य अलाउंस, लीव इनकैशमेंट आदि शामिल होते हैं.
ग्रॉस सैलरी को टेक होम सैलरी भी कहा जाता है. आपकी ग्रॉस इनकम कितनी है ये जहां आप काम करते हैं उस कंपनी की तरफ से दिए गए फॉर्म-16 में लिखा होता है. टैक्सेबल इनकम की गणना के लिए ग्रॉस इनकम पता होना जरूरी है. मान लीजिए आपकी सैलरी 800000 रुपए है. FD ब्याज 50000 रुपए, फ्रीलांस इनकम 100000 रुपए है तो आपकी ग्रॉस इनकम 950000 रुपए हुई.
2. क्या होती है नेट इनकम?
नेट इनकम खर्च या जरूरी कटौतियां के बाद बची आय होती है. यह बिजनेस खर्च, प्रोफेशनल खर्च आदि घटाने के बाद बचती है. आपको मालूम हो कि सैलरी वालों के लिए नेट इनकम अक्सर सीटीसी से अलग होती है. आपकी ग्रॉस सैलरी में से जब लीव ट्रैवल अलाउंस, हाउस रेंट अलाउंस, अर्न्ड लीव इनकैशमेंट जैसे तमाम अलाउंस को घटा दिया जाता है तो ये आपकी नेट सैलरी बन जाती है. मान लीजिए आपकी ग्रॉस इनकम 950000 रुपए है. बिजनेस/खर्च 150000 रुपए है तो आपकी नेट इनकम 800000 रुपए होगी.
3. क्या होती टैक्सेबल इनकम?
टैक्सेबल इनकम वह आय होती है, जिस पर सरकार कर यानी टैक्स लगाती है. यह नेट इनकम में से टैक्स छूट (Standard Deductions) व Exemptions घटाने के बाद बनती है. आपको मालूम हो कि नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में स्टैंडर्ड डिडक्शन 50000 रुपए से बढ़ाकर 75000 रुपया कर दिया गया है. टैक्सेबल इनकम में स्टैंडर्ड डिडक्शन कम किया जाता है. इसके साथ ही टैक्स बचाने के लिए 80सी के तहत किए गए निवेशों को घटाया जाता है. हेल्थ इंश्योरेंस और लाइफ इंश्योरेंस के प्रीमियम को घटाया जाता है.
किसी तरह के मेडिकल खर्च को आप दिखाते हैं तो उसे भी घटाया जाता है. Home Loan Interest (Section 24) को घटाया जाता है. इतना सब होने के बाद इनकम टैक्स में मिलने वाली छूट की रकम को घटाया जाता है. इसके बाद जो इनकम बचती है, वह टैक्सेबल इनकम होती है. इस पर आपको टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना होता है. इसको उदाहरण से आप ऐसे समझ सकते हैं मान लीजिए आपकी ग्रॉस इनकम 950000 रुपए है. Expenses/Adjustments 150000 रुपए है. नेट इनकम 800000 रुपए है. डिडक्शन (80C, 80D आदि) 200000 रुपए है तो टैक्सेबल इनकम 600000 रुपए होगी. यदि आप ग्रॉस इनकम, नेट इनकम और टैक्सेबल इनकम में अंतर नहीं समझेंगे तो गलत ITR फाइल हो सकता है. ज्यादा टैक्स कट सकता है. रिफंड कम मिल सकता है. नोटिस आने का खतरा बढ़ सकता है.