PF Deduction (AI)
PF Deduction (AI)
प्राइवेट नौकरी करने वाले लोग इस बात से तो अच्छी तरह हैं कि उनकी सैलरी से कुछ हिस्सा पीएफ के रूप में कटता है. लेकिन इसे कौन काटता और आखिर क्यों काटता है, वह इस बात को लेकर अंजान होते हैं. साथ ही इसको काटने का फायदा आपको मिलता है या फिर कंपनी को, लोगों को इस बारे में भी नहीं पता होता है. तो चलिए आपको पीएफ से जुड़े कुछ सवालों के बारे में बताते हैं.
पीएफ को दरअसल कर्मचारियों के फ्यूचर को ध्यान में रखकर काटा जाता है. असल में कर्मचारियों के फ्यूचर कोृ का ध्यान में रखते हुए भारत सरकार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को अस्तित्व में लाई थी. ईपीएफओ के तहत पीएफ काटा जाता है. लेकिन सवाल उठता है कि क्या हर कंपनी है पीएफ कटता है?
नियम के तहत 20 कर्मचारियों से ज्यादा संख्या वाली कंपनियों को खुद को EPFO में रजिस्टर करवाना होता है. रजिस्टर होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी से पीएफ कटता है. कुछ लोगों का पीएफ ज्यादा कटता है तो कुछ का कम. ऐसे में दिमाग में इस सवाल की भी उपज होती है, कि ज्यादा पीएफ कटने से नुकसान होता है या फायदा?
किसी भी कर्मचारी की पीएफ कटौती उसके फ्यूचर को ध्यान में रखकर की जाती है. साथ ही यह कटौती एक प्रकार से सेविंग्स भी है, जो अनजाने में होती रहती है और कर्मचारी को इसका बोझ भी महसूस नहीं होता. केवल यही नहीं, इस कटौती पर जुड़े हुए अमाउंट पर ब्याज़ भी मिलता है. साथ ही ऐसा-वैसा ब्याज नहीं बल्कि कम्पाउंडिंग वाला ब्याज. यानी हर साल आपके ब्याज़ पर भी ब्याज मिलेगा. ऐसे में साफ है कि अगर आपका पीएफ ज्यादा है तो ज्यादा ब्याज ही मिलेगा. यानी यह एक तरह का फायदा ही है.
पीएफ को आप एक ऐसे अमाउंट के तौर पर भी देख सकते हैं, जो किसी एमरजेंसी के दौरान काम आ सकता है. साथ ही पीएफ के तौर पर हुई इस सेविंग को निकालना भी काफी आसान होता है. सरकार ने जिस प्रकार सभी प्रोसेस को डिजिटल किया है, उसके चलते आप पीएफ को भी डिजिटल तरीके से सीधा अपने बैंक खाते में मंगवा सकते हैं.
कई लोग अपनी नौकरी को छोड़ते ही पीएफ अमाउंट को मिकाल लेते हैं, जो कि एक बड़ी गलती है. दरअसल आपके नौकरी छोड़ने के बाद भी EPFO आपके खाते में ब्याज देता रहता है. साथ ही जब आप 58 की उम्र में रिटायर होते हैं तो उस समय संगठन आपको आपके खाते में मौजूद अमाउंट पर तीन साल तक लगातार ब्याज देता है.