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ईपीएफओ की कर्मचारी पेंशन स्कीम के तहत न्यूनतम पेंशन बढ़ाने को लेकर कयासों पर सरकार की तरफ से लोकसभा में जवाब आया है. सरकार ने लोकसभा में बताया कि न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी का कोई फैसला नहीं किया गया है. EPS 95 के तहत आने वाले लाखों पेंशनधारकों को न्यूनतम पेंशन बढ़ाकर 7500 रुपए होने की उम्मीद थी. इसको लेकर बीजेपी सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने सवाल किया था, जिसका जवाब केंद्रीय राज्य मंत्री ने दिया.
पेंशन बढ़ोतरी पर सरकार ने क्या कहा?
लोकसभा में बीजेपी सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने गुरुवार को सवाल पूछा. जिसके जवाब में श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने सरकार की तरफ से जवाब दिया और कहा कि न्यूनतम पेंशन 7500 रुपए करने का कोई फैसला नहीं है. मंत्री ने कहा कि सरकार ईपीएस फंड की स्थिरता और भविष्य की देनदारियों को देखते हुए मौजूदा व्यवस्था जारी रखेगी. सरकार ने साफ कर दिया कि ईपीएस-95 कर्मचारी पेंशन योजना के तहत न्यूनतम 1000 रुपए की पेंशन जारी रहेगी.
मंत्री ने बताया कि सरकार इसके लिए बजटीय प्रावधान भी करती है और कर्मचारियों के पेंशन फंड में योगदान करती है. ईपीएस फंड में नियोक्ता की तरफ से 8.33 फीसदी योगदान और सरकार की तरफ से 1.16 फीसदी योगदान की व्यवस्था है.
कितनी है न्यूनतम पेंशन?
मौजूदा समय में न्यूनतम मासिक पेंशन एक हजार रुपए है. यह व्यवस्था एक सितंबर 2014 से लागू है. सरकार ईपीएस के तहत एक हजार रुपए की न्यूनतम पेंशन के लिए केंद्रीय बजटीय मदद देती है.
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक ईपीएस के तहत 85 लाख 84 हजार 604 पेंशनधारक मासिक पेंशन ले रहे थे. वित्त वर्ष 2025-26 तक योजना के तहत कुल 15819.28 करोड़ रुपए की पेंशन बांटी गई थी.
पेंशनर्स संगठनों का मानना है कि 1000 रुपए की न्यूनतम पेंशन की सीमा बहुत कम है. इसको लेकर प्रदर्शन भी हो चुके हैं. दिल्ली के जंतर मंतर पर बड़ी संख्या में पेंशनधारक जुटे थे.
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