Students (File Photo: PTI)
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कुंडली में पांचवां भाव बुद्धि का होता है. यह शिक्षा का केंद्रीय भाव भी है. चतुर्थ भाव और द्वितीय भाव शिक्षा के सहायक भाव होते हैं. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सूर्य शिक्षा का मुख्य ग्रह है. इसके अलावा बुध बुद्धि को और बृहस्पति ज्ञान को मजबूत करता है. इस सब स्थितियों को देखकर शिक्षा का ठीक-ठीक अनुमान लगाया जा सकता है.
शिक्षा में कब आ जाती है बाधा
कुंडली में चतुर्थ या पंचम भाव के खराब होने पर, द्वितीय भाव में पाप ग्रहों के होने पर, बुध और सूर्य के कमजोर होने पर, कुंडली में अग्नि तत्व के मजबूत होने पर, मूलांक 02, 06, 07 और 08 वालों के शिक्षा में भी अक्सर बाधा आ जाती है. ज्योतिषी कहते हैं ग्रहों की स्थिति का बच्चे के सफल होने या असफल होने में बहुत बड़ा हाथ है. ग्रहों को मजबूत बनाकर बच्चों को सफलता का स्वाद चखाया जा सकता है.
शिक्षा में बाधा आने के कारण और निवारण
कुंडली में सूर्य कमजोर हो तो व्यक्ति शिक्षा बीच में छोड़ देता है. जल्दी धन कमाने के चक्कर में शिक्षा पर ध्यान नहीं देता. बुध की गड़बड़ी के कारण शिक्षा में मन ही नहीं लगता. बार-बार विषयों और तरीकों में बदलाव करता रहता है. बृहस्पति गड़बड़ हो तो डिग्री मिल पाने में समस्या होती है. पढ़ाई पूर्ण करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है.
शिक्षा ठीक हो, इसके लिए क्या करें उपाय
नित्य प्रातः सूर्य को जल अर्पित करें. गायत्री मंत्र का जप जरूर करें. सप्ताह में एक दिन धार्मिक स्थल पर जरूर जाएं. पढ़ने की जगह पर ढेर सारे प्रकाश की व्यवस्था करें. सलाह लेकर एक माणिक्य या पन्ना धारण करें. बच्चा 9 या 27 बार गायत्री मंत्र पढ़ सके तो उत्तम होगा. बच्चे के पेंसिल बॉक्स का रंग पीला या हरा रखें. बच्चे को चन्दन की सुगंध लगा रुमाल दें.
अपने बच्चे का पढ़ाई में ऐसे लगाएं मन
1. बच्चे के पढ़ने की एक ही जगह निश्चित कीजिए.
2. वहां पर चन्दन की सुगंध का प्रयोग करें.
3. वहां भगवान कृष्ण का चित्र भी लगाएं.
4. बच्चे के पढ़ने के स्थान पर खूब प्रकाश का प्रयोग करें.
5. बच्चे को पढ़ाते समय मन को शांत रखें.
बच्चा पढ़ा हुआ याद न कर पा रहा हो तो क्या करें
1. बच्चे को रोज प्रातः गायत्री मंत्र पढ़कर सुनाएं.
2. बच्चे के माथे या कंठ पर चन्दन का तिलक लगाएं.
3. बच्चे को एक साथ बहुत सारा खाना न खिलाएं.
4. बच्चे को अखरोट जरूर खिलाएं.