Vishal with his Parents
Vishal with his Parents
गोरखपुर के गोरखनाथ थाना क्षेत्र के मिर्जापुर पचपेड़वा कॉलोनी में रहने वाले 23 वर्षीय विशाल तिवारी ने अपनी मेहनत और लगन से ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो हर किसी के लिए प्रेरणा बन गया है. ऑटो चालक के बेटे विशाल ने नीट यूजी परीक्षा में 720 में से 605 अंक हासिल कर सफलता प्राप्त की है. उन्होंने यह सफलता चौथे प्रयास में हासिल की. रिजल्ट आने के बाद पूरे परिवार में खुशी का माहौल है.विशाल के पिता संतोष तिवारी शहर में ऑटो चलाकर परिवार का खर्च चलाते हैं. उनकी मां राधिका तिवारी गृहिणी हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी. घर का खर्च बड़ी मुश्किल से चलता था. इसके बावजूद माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई नहीं रुकने दी. उन्होंने इधर-उधर से रुपए उधार लेकर विशाल का एक कोचिंग सेंटर में दाखिला कराया, ताकि वह अपने सपने को पूरा कर सके.
और पूरी मेहनत के साथ शुरू की तैयारी
विशाल ने सरस्वती विद्या मंदिर से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की. उन्होंने वर्ष 2022 में बायोलॉजी विषय से 12वीं पास की. 12वीं के बाद उन्होंने नीट की तैयारी शुरू की. आर्थिक तंगी के कारण पहले दो साल तक उन्होंने बिना किसी कोचिंग के सिर्फ सेल्फ स्टडी की, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बाद परिवार ने कोचिंग की व्यवस्था की और विशाल ने फिर पूरी मेहनत के साथ तैयारी शुरू की.
सुबह से दोपहर तक की कोचिंग में पढ़ाई
12वीं पास करने के बाद परिवार ने विशाल की शादी सिद्धार्थनगर निवासी कल्पना पांडे से कर दी. शादी के दो साल बाद उनके घर बेटे विराट का जन्म हुआ. परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ने के बावजूद विशाल ने पढ़ाई नहीं छोड़ी. उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी ने हर कदम पर उनका साथ दिया. उन्होंने कभी किसी बात की शिकायत नहीं की और घर व बेटे की पूरी जिम्मेदारी संभाली, जिससे वह बिना किसी तनाव के पढ़ाई कर सके. विशाल ने बताया कि घर के छोटे-मोटे खर्च पूरे करने के लिए वह रोज करीब दो घंटे होम ट्यूशन पढ़ाते थे. सुबह से दोपहर तक कोचिंग में पढ़ाई करते. इसके बाद घर-घर जाकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते. फिर शाम को लाइब्रेरी पहुंचकर रात करीब 11 बजे तक पढ़ाई करते थे. इसी मेहनत और अनुशासन का परिणाम उन्हें आज सफलता के रूप में मिला.
पापा ने मेडिकल की तैयारी करने की दी थी सलाह
विशाल ने बताया कि उन्हें बचपन से गणित पसंद था और वह इंजीनियर बनना चाहते थे. लेकिन उनके बड़े पापा ने उन्हें मेडिकल की तैयारी करने की सलाह दी. इसके बाद उन्होंने बायोलॉजी को चुना और डॉक्टर बनने का लक्ष्य तय किया. लगातार चार वर्षों तक उन्होंने इसी लक्ष्य के लिए मेहनत की. नीट में सफलता मिलने के बाद विशाल ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी इच्छा डॉक्टर बनकर अपने पिता के लिए एक कार खरीदने की है. उन्होंने कहा कि पिता ने ऑटो चलाकर परिवार को संभाला और उनकी पढ़ाई पूरी कराई. अब वह चाहते हैं कि उनकी मेहनत का फल उन्हें मिले और वह अपने पिता का सपना पूरा कर सकें.
माता-पिता बेहद खुश
विशाल की सफलता से उनके माता-पिता बेहद खुश हैं. परिवार का कहना है कि कठिन आर्थिक हालात के बावजूद उन्होंने कभी बेटे की पढ़ाई रुकने नहीं दी. विशाल ने भी लगातार मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग के दम पर अपना सपना पूरा किया. उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं.