Nasreen
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हौसले बुलंद हो तो मंजिल खुद राह दिखाने लगती है. हौसले को गरीबी नहीं रोक सकती. बिहार के बगहा की बेटी नासरीन प्रवीण ने इसे सच साबित कर दिखाया. नासरीन ने बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा में 477 अंक हासिल किया और आर्ट्स में पूरे बिहार में तीसरा स्थान प्राप्त किया है. इतना ही नहीं, नासरीन ने उत्तर बिहार में वह पहला स्थान हासिल किया है.
पिता दिल्ली में करते हैं सिलाई का काम-
पश्चिम चम्पारण जिले के बगहा-2 प्रखंड के छोटे से गांव बोरवल नरवल की रहने वाली नासरीन की सफलता की कहानी जितनी बड़ी है, संघर्ष उतना ही गहरा है. एक साधारण परिवार की इस बेटी के पिता अब्दुल्लाह अंसारी दिल्ली में सिलाई का काम कर परिवार चलाते हैं. घर में एक भाई और चार बहनों के बीच पली-बढ़ी नासरीन ने अभावों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया.
ऑनलाइन पढ़ाई करके हासिल की सफलता-
नासरीन ने गांव के ही स्कूल से पढ़ाई की और घर पर रहकर, सीमित संसाधनों में ऑनलाइन पढ़ाई करते हुए अपने सपनों को जिंदा रखा. कई बार हालात ऐसे रहे, जब पढ़ाई और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना मुश्किल था, लेकिन उसने हार नहीं मानी.
जब रिजल्ट आया, तो पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई. जिस घर में कभी चुप्पी और संघर्ष था, वहां आज जश्न है, मिठाइयां बांटी जा रही हैं और हर आंख में गर्व के आंसू हैं.
सरकारी वकील बनना चाहती हैं नासरीन-
मां रोबैदा खातून की आंखें खुशी से नम हैं. वो कहती हैं कि हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारी बेटी इतना बड़ा नाम करेगी. नासरीन की सोच सिर्फ खुद तक सीमित नहीं है. वह आगे चलकर सरकारी वकील बनना चाहती है, ताकि समाज के गरीब और कमजोर लोगों को न्याय दिला सके.
नासरीन ने कहा कि बेटियों को मौका दीजिए, वे भी परिवार और समाज का नाम रोशन कर सकती हैं. आज नासरीन सिर्फ एक टॉपर नहीं, बल्कि उन लाखों बेटियों की उम्मीद बन गई है, जो मुश्किल हालात में भी अपने सपनों को जिंदा रखे हुए हैं.
(अभिषेक पांडेय की रिपोर्ट)
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