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लोगों को एक तरफ डर सता रहा है कि एआई उनकी नौकरी को खा जाएगा. वहीं दूसरी तरफ ऐसे कोर्स या स्किल्स की मांग बढ़ रही है, जो फिलहाल अभी एआई की पहुंच से दूर हैं. अगर आप भी किसी ऐसी स्किल को सीखना चाहते हैं, जिसमें आपकी नौकरी को एआई से जाने का खतरा कम हो, तो आप साइकोलॉजी की पढ़ाई कर सकते हैं.
साइकोलॉजी में इंसान के बिहेवियर को समझा जाता है. एआई एक तय पैटर्न के हिसाब के काम करता है, लेकिन असल ज़िंदगी में हर इंसान अलग होता है और उसका बिहेवियर भी अलग होगा. ऐसे में एआई के लिय हर इंसान के लिए एक अलग पैटर्न को पकड़ना मुश्किल होगा. साथ ही यहां एक ह्यूमन ही दूसरे ह्यूमन के बिहेवियर को बेहतर तरीके से समझ सकता है. तो चलिए आपको बताते हैं कि कैसे आप साइकोलॉजी से जुड़ा कोर्स कर सकते हैं. साथ ही इससे जुड़े किन सेक्टर में नौकरी की संभावना है.
इसकी पढ़ाई के लिए आप 12वीं के बाद साइकोलॉडी में बीए कर सकते हैं. बीए के बाद आप चाहें को किसी स्पेशियालाइजेशन के साथ इसमें पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई भी कर सकते हैं. साइकोलॉजी में पीजी डिप्मोला कोर्स भी अवेलेबल होते हैं. अगर आप मेडिकल सेक्टर में काम करना चाहते हैं को क्लिनिकल साइकोलॉजी में एम.फिल की डिग्री हासिल कर सकते हैं. इसके अलावा आप साइकोलॉजी में डॉक्टरेट भी कर सकते हैं.
साइकोलॉजी की डिग्री के बाद आप काउंसलर, करियर काउंसलर, क्लिनिकल साइकॉलजिस्ट, करियर काउंसलर, फॉरेंसिक, साइकॉलजिस्ट, इंड्ट्रियल या ऑर्गनाइजेशनल साइकॉलजिस्ट के तौर पर काम कर सकते हैं.
इस फील्ड में 20- 25 हजार रुपए से शुरुआत कर सकते हैं. जो बाद में आपके अनुभव के साथ बढ़ती जाएगी. इसके अलावा आप किस सेक्टर में काम कर रहे है, आपकी सैलरी इस बात पर भी डिपेंड करती है. अगर मेडिकल से जुड़ी फ्रीलांस साइकोलॉजी करना चाहते हैं तो साइकोलॉजी में एम.फिल करने के बाद अपना खुद का क्लिनिक खोल सकते हैं. इससे आपके पास जनरेट होने वाली इनकम की कोई सीमा नहीं होगी. जितने रोगी आपके पास आएंगे, इनकम उतनी ज्यादा होगी.