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CBSE OSM Controversy: क्या है Coempt Edu Teck? सीबीएसई के डिजिटल मार्किंग सिस्टम पर उठ रहे सवाल, जानें पूरा विवाद

CBSE Answer Sheet Controversy: CBSE के 12वीं बोर्ड की कॉपियों की चेकिंग के लिए लागू किए गए डिजिटल मार्किंग सिस्टम पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. अब यह मामला सियासी रंग ले चुका है. राहुल गांधी ने सीबीएसई के OSM सिस्टम का जिम्मा उठाने वाली कंपनी Coempt Edu Teck की विश्वसनियता को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है. 

CBSE OSM Controversy CBSE OSM Controversy

Coempt Edu Teck CBSE contract: CBSE के 12वीं बोर्ड की कॉपियों की चेकिंग के लिए लागू किए गए नई ऑनलाइन मार्किंग और स्कैन कॉपी सिस्टम को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. अब यह मामला सियासी रंग ले चुका है. राहुल गांधी ने सीबीएसई के OSM सिस्टम का जिम्मा उठाने वाली कंपनी Coempt Edu Teck की विश्वसनियता को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है.

OSM सिस्टम पर क्यों उठ रहे सवाल
आपको मालूम हो कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने इस साल डिजिटल मार्किंग सिस्टम यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया था. इसमें आंसर शीट स्कैन करके ऑनलाइन जांची जाती हैं. कई स्टूडेंट्स पोर्टल क्रैश, स्कैनिंग एरर, धुंधली कॉपी और गलत अपलोड जैसी समस्याओं की शिकायत कर चुके हैं. सोशल मीडिया पर भी OSM सिस्टम को लेकर काफी नाराजगी देखने को मिल रही है. आरोप है कि 12वीं के छात्र मोक्ष यादव को री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के दौरान उसकी जगह किसी दूसरे छात्र की आंसर-शीट भेज दी गई. 

मोक्ष ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2025-26 में अंग्रेजी विषय में कम नंबर आने के बाद अपनी स्कैन आंसर-शीट मंगवाई थी. लेकिन जब उसे ऑनलाइन कॉपी मिली तो उसमें बड़ी गड़बड़ी सामने आई. छात्र का दावा है कि कॉपी का पहला पेज तो उसका था, लेकिन बाकी पेज किसी दूसरे छात्र के थे. हाल के दिनों में कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाए हैं कि उन्हें जो स्कैन कॉपी मिली, वह उनकी नहीं थी या उसमें कई पेज गायब थे. हाल ही में एक अन्य छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने भी दावा किया था कि उसे फिजिक्स की गलत आंसर शीट भेजी गई है. मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद CBSE ने गलती स्वीकार की और छात्र को सही कॉपी उपलब्ध कराई. आपको मालूम हो कि बीते दिन तो एक सिक्योरिटी रिसर्चर ने ओएसएम सिस्टम को हैक करने का दावा तक कर दिया. रिसर्चर ने बकायदा वीडियो जारी करके बताया था कि उसने कैसे मार्किंग सिस्टम को हैक किया. हालांकि, सीबीएसई ने दावे को नकार दिया. बोर्ड ने बयान जारी करके कहा सोशल मीडिया का दावा झूठा है. इस घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों में बोर्ड की परीक्षा प्रक्रिया को लेकर चिंता बढ़ गई है.

राहुल गांधी ने लगाया यह आरोप 
कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने सीबीएसई के नए मार्किंग सिस्टम पर सवाल उठाया है. विवाद के केंद्र में Coempt Edu Teck नाम की कंपनी है, जो बोर्ड की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को संभाल रही है. राहुल गांधी का आरोप है कि जिस कंपनी COEMPT को यह जिम्मेदारी मिली, वह पहले Globarena के नाम से तेलंगाना में यही कारनामा कर चुकी है. राहुल गांधी का कहना है कि इसके बाद भी इस कंपनी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई? हालांकि सीबीएसई ने राहुल गांधी के Coempt edustech को कंन्ट्रैक्ट दिए जाने से संबंधित आरोपों को खारिज किया है. बोर्ड ने कहा है विपक्षी दल के नेता के आरोप भ्रामक हैं. 

क्या है Coempt Edu Teck 
आपको मालूम हो कि Coempt Edu Teck पहले भी परीक्षा से जुड़े एक अन्य विवाद के कारण आलोचना का सामना कर चुकी है. यह कंपनी पहले Globarena Technologies के नाम से काम करती थी. साल 2019 में तेलंगाना इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में गड़बड़ियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद Globarena Technologies का नाम तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा से जुड़े एक विवाद में सामने आया था. इसमें 3 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों ने नंबर में गड़बड़ी की शिकायत की थी. उस समय जब जांच हुई तो कहा गया कि बिना टेस्ट किए ही इस सिस्टम को लागू कर दिया गया है. इससे ये समस्या सामने आई. फिर Globarena कंपनी का कंट्रैक्ट रद्द कर दिया गया.

नाम बदलने का भी आरोप
अब आरोप लग रहा है कि Globarena Technologies कंपनी ने नाम बदलकर Coempt Edu Teck रख लिया और फिर से बिड किया. यह विवाद तब और गरमा गया जब सोशल मीडिया पोस्ट्स में यह दावा किया गया कि आईआईटी मद्रास के एक पूर्व प्रोफेसर कंपनी में डायरेक्टर हैं और इसी IIT मद्रास के प्रोफेसर OSM की तकनीकी गड़बड़ी की जांच की थी.

हालांकि Coempt के मुख्य कार्यकारी वीएसएन राजू ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि कंपनी ने तकनीकी और वित्तीय दोनों मापदंडों पर खरा उतरने के बाद ही टेंडर हासिल किया था. आपको मालूम हो कि कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार Coempt का दावा है कि उसे सर्टिफिकेट देने वाली संस्थाओं के लिए परीक्षा प्रणालियों को ऑटोमेट करने में 25 साल से ज्यादा का एक्सपीरिएंस है. कंपनी का कहना है कि वह परीक्षा से पहले का मैनेजमेंट, प्रश्न पत्रों को संभालना, AI-बेस्ड ऑनलाइन एग्जाम्स, आंसर शीट का डिजिटलीकरण, डिजिटल इवैल्यूशन और परीक्षा के बाद की सेवाओं सहित कई सेवाएं प्रदान करती है. कंपनी ने जाने-माने शिक्षाविद सदगोपन  को अपना चेयरमैन भी नियुक्त किया है.

OSM कैसे करता है काम 
CBSE ने OSM प्रणाली को हाल ही में समाप्त हुए शैक्षणिक सत्र के दौरान पहली बार शुरू किया था. इस डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत, उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके ऑनलाइन अपलोड किया जाता है ताकि टीचर्स कागज की कॉपियों को हाथ से जांचने के बजाय उन्हें स्क्रीन पर देखकर जांच सकें.

मूल्यांकन के बाद यदि छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं का सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन करवाना चाहते हैं तो वे एक निर्धारित शुल्क का भुगतान करके अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां देख सकते हैं. आपको मालूम हो कि इस साल कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 18 लाख से अधिक स्टूडेंट्स शामिल हुए थे, जिनकी लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन और डिजिटाइज किया जाना था. इतने बड़े पैमाने पर की गई स्कैनिंग और डेटा मैनेजमेंट में आई तकनीकी खामियों ने ही अब इस बड़े विवाद को जन्म दे दिया है.