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कठिन हालातों में भी नहीं टूटा हौसला! पैरालिसिस से जूझती मां की देखभाल के बीच मिस्बाह ने हासिल किए 92% अंक

मिस्बाह कहती हैं, मैं अपने माता-पिता की अकेली संतान हूं. मां की तबीयत खराब होने के कारण उनकी पूरी जिम्मेदारी मेरे ऊपर थी. फिर भी मैंने पढ़ाई नहीं छोड़ी. हालांकि मुझे अपने 92% नंबरों से पूरी संतुष्टि नहीं है.

Misbah Bari Misbah Bari
हाइलाइट्स
  • मां की बीमारी के बीच संभाली घर की जिम्मेदारी

  • संसाधनों की कमी के बावजूद पिता बने सहारा

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और लखनऊ के छात्रों ने CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन किया है. जयपुरिया स्कूल, आकांक्षा स्कूल और LPIS के छात्रों ने अच्छे अंक हासिल कर सफलता का परचम लहराया. LPIS की छात्रा मिस्बाह बारी ने 92% अंक हासिल कर न सिर्फ अपने स्कूल बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है. लेकिन ये सफलता सिर्फ नंबरों की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, जिम्मेदारियों और हिम्मत की मिसाल है.

मां की बीमारी के बीच संभाली घर की जिम्मेदारी
मिस्बाह बारी की मां पिछले एक साल से पैरालिसिस अटैक के कारण बिस्तर पर हैं. ऐसे कठिन समय में घर की पूरी जिम्मेदारी और मां की देखभाल के साथ-साथ पढ़ाई करना उनके लिए आसान नहीं था. उनकी दिनचर्या बेहद चुनौतीपूर्ण रही. सुबह मां की सेवा, घर की जिम्मेदारियां और फिर समय पर स्कूल पहुंचना. इन सबके बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई को कभी पीछे नहीं जाने दिया.

अगर मां ठीक होतीं तो और बेहतर कर पाती- मिस्बाह
मिस्बाह कहती हैं, मैं अपने माता-पिता की अकेली संतान हूं. मां की तबीयत खराब होने के कारण उनकी पूरी जिम्मेदारी मेरे ऊपर थी. फिर भी मैंने पढ़ाई नहीं छोड़ी. हालांकि मुझे अपने 92% नंबरों से पूरी संतुष्टि नहीं है. अगर मां स्वस्थ होतीं, तो शायद मैं और बेहतर कर पाती. मिस्बाह का सपना आगे चलकर सिविल सर्विसेज में जाकर देश की सेवा करना है.

संसाधनों की कमी के बावजूद पिता बने सहारा
मिस्बाह के पिता एक टेलर मास्टर हैं. आर्थिक और पारिवारिक चुनौतियों के बीच भी उन्होंने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. LPIS की प्रिंसिपल शालिनी तिवारी ने मिस्बाह की सफलता को प्रेरणादायक बताया. उन्होंने कहा कि यह उन छात्रों के लिए एक उदाहरण है, जिन्हें सभी सुविधाएं मिलने के बावजूद पढ़ाई में रुचि नहीं होती. इतनी कठिन परिस्थितियों में भी मिस्बाह ने जिस लगन से सफलता हासिल की है, वह सराहनीय है.

अवंतिका वर्मा ने भी किया कमाल, 96.2% अंक
इसी स्कूल की एक और छात्रा अवंतिका वर्मा ने 96.2% अंक हासिल कर शानदार प्रदर्शन किया है. डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली अवंतिका का कहना है कि उन्होंने परीक्षा के समय सोशल मीडिया और मोबाइल से दूरी बनाकर पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया.

जयपुरिया स्कूल के छात्रों का दबदबा
बाराबंकी के जयपुरिया स्कूल के छात्रों ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है. तन्मय साहू ने 98.6% अंक हासिल कर जिला स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया. विभूति मिश्रा ने 98% अंक के साथ दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि अहम सिंह ने 97.8% अंक पाकर तीसरा स्थान प्राप्त किया.

-सैयद रेहान मुस्तफा रिजवी की रिपोर्ट