NCERT,
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कक्षा 11वीं और 12वीं की राजनीतिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तकें तैयार करने के लिए NCERT की ओर से गठित 20 सदस्यीय टेक्स्टबुक डेवलपमेंट टीम में RSS और उसके सहयोगी संगठनों से जुड़े सदस्यों की मौजूदगी को लेकर NSUI ने सवाल उठाए हैं.
नई टीम पर NSUI का सवाल-
NCERT ने 14 अगस्त 2026 को राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों के लिए नई टीम का पुनर्गठन किया है. यह टीम राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2023 के तहत कक्षा 11वीं और 12वीं के लिए पाठ्यपुस्तकें और शिक्षण सामग्री तैयार करेगी.
NSUI ने टीम के चार सदस्यों की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध प्रोफाइल और संस्थागत पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए उनके RSS या उससे जुड़े संगठनों के साथ संबंधों पर सवाल उठाए हैं.
संगठन ने यदुनाथ देशपांडे के ABVP में विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियों से जुड़े रहे होने का उल्लेख किया है. वहीं, प्राशांत दिवेकर के पुणे स्थित ज्ञान प्रबोधिनी से जुड़े होने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. NSUI ने JNU की प्रोफेसर वंदना मिश्रा के पूर्व ABVP राष्ट्रीय सचिव होने और JNU के एसोसिएट प्रोफेसर रवि रमेशचंद्र शुक्ला के RSS से जुड़े रामभाऊ म्हाळगी प्रबोधिनी द्वारा प्रकाशित जर्नल के संपादकीय बोर्ड में शामिल होने का भी जिक्र किया है.
IKS और ‘सांस्कृतिक जड़ों’ पर भी सवाल-
नई टीम के Terms of Reference में ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली’ (Indian Knowledge Systems-IKS) और ‘सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव’ (cultural rootedness) को पाठ्यपुस्तकों में क्रॉस-कटिंग थीम के तौर पर शामिल किया गया है.
NSUI ने इन प्रावधानों को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि भारतीय ज्ञान परंपराओं को पाठ्यक्रम में शामिल करने के दौरान भारत की विविध बौद्धिक, सामाजिक और लोकतांत्रिक परंपराओं को समान रूप से जगह मिलनी चाहिए.
NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में संविधान, लोकतंत्र, मौलिक अधिकार, धर्मनिरपेक्षता, संघवाद और सामाजिक न्याय जैसे विषयों की संतुलित समझ जरूरी है. उनके मुताबिक, पाठ्यपुस्तक तैयार करने वाली टीम में अकादमिक और वैचारिक विविधता सुनिश्चित की जानी चाहिए.
टीम के पुनर्गठन की मांग-
NSUI ने मौजूदा 20 सदस्यीय टीम को भंग कर स्वतंत्र शिक्षाविदों, राजनीतिक विज्ञान के विशेषज्ञों, संवैधानिक विशेषज्ञों और अनुभवी शिक्षकों को शामिल करते हुए नई टीम गठित करने की मांग की है.
संगठन ने सभी सदस्यों की योग्यता, विशेषज्ञता और चयन के मानदंड सार्वजनिक करने तथा पाठ्यपुस्तकों के मसौदों की स्वतंत्र अकादमिक समीक्षा और सार्वजनिक परामर्श की प्रक्रिया अपनाने की भी मांग की है.
NSUI का कहना है कि NCERT की पाठ्यपुस्तकों में संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आलोचनात्मक सोच को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
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