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63 साल की साइंस टीचर का कमाल! क्लासरूम से लेकर YouTube तक... नेशनल टीचर्स अवॉर्ड विनर डॉ. रेणु त्रिपाठी का किस्सा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की रहने वाली 63 साल की साइंस टीचर डॉ. रेणु त्रिपाठी को नेशनल टीचर्स अवॉर्ड 2026 के लिए चुना गया है. डॉ. रेणु 12 किताबें लिख चुकी हैं. डॉ. रेणु क्लासरूम के साथ-साथ YouTube पर भी बच्चों को साइंस पढ़ाती हैं.

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Dr. Renu Tripathi Dr. Renu Tripathi

उम्र महज एक नंबर है और अगर सीखने-सिखाने का जज्बा हो तो उम्र की कोई सीमा नहीं होती. गाजियाबाद की 63 साल की डॉ. रेणु त्रिपाठी इसकी मिसाल हैं. सरकारी स्कूल में विज्ञान पढ़ाने वाली रेणु त्रिपाठी आज भी नई तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं. क्लासरूम के साथ-साथ YouTube पर भी बच्चों को साइंस पढ़ाती हैं. 12 किताबें लिख चुकी हैं और अब उनके इसी समर्पण को राष्ट्रीय सम्मान मिलने जा रहा है.

नेशनल टीचर्स अवॉर्ड के लिए चुनी गईं रेणु-
डॉ. रेणु त्रिपाठी को नेशनल टीचर्स अवॉर्ड 2026 के लिए चुना गया है. देशभर से चुने गए 48 स्कूल शिक्षकों में उनका नाम शामिल है. 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करेंगी.

2 यूट्यूब चैनल चलाती हैं डॉ. रेणु-
डॉ. रेणु त्रिपाठी गाजियाबाद के विजय नगर स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की विज्ञान शिक्षिका हैं. उनके पढ़ाए बच्चे आज डॉक्टर इंजीनियर साइंटिस्ट और सरकारी नौकरी में हैं. 63 साल की उम्र में भी उनमें पढ़ाने का ऐसा जुनून है कि क्लासरूम से निकलकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच गईं हैं. रेणु त्रिपाठी अपने दो YouTube चैनलों के जरिए बच्चों को विज्ञान के अलग-अलग विषय पढ़ाती हैं.

खास है डॉ. रेणु का पढ़ाने का तरीका- 
रेणु मैडम का पढ़ाने का तरीका सिर्फ किताब और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं है. वो बच्चों को विज्ञान समझाने के लिए मॉडल, प्रयोग और फील्ड विजिट का सहारा लेती हैं, ताकि बच्चे सिर्फ किताबों में पढ़ें नहीं, बल्कि विज्ञान को देखकर और समझकर सीखें. 

NEP 2020 के तहत भी उन्होंने कई ऐसे शिक्षण संसाधन तैयार किए हैं, जिनमें गतिविधियों और प्रयोगों के जरिए विज्ञान को आसान बनाने की कोशिश की गई है.

प्रोजेक्ट ऑफिसर के तौर पर 60 गांवों की बदल दी थी तस्वीर-
रेणु त्रिपाठी का सफर भी खास है. उन्होंने साल 1987 में उत्तर प्रदेश सरकार में प्रोजेक्ट ऑफिसर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी. उनका काम स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ना था. उस वक्त उन्हें मुरादनगर का इलाक़ा मिला था. रेणु बताती हैं कि उनकी मेहनत ऐसी रंग लाई कि 60 गांव में एक भी ऐसा बच्चा नहीं था, जो स्कूल नहीं जा रहा था.

सरकारी नौकरी छोड़ बन गईं टीचर-
शिक्षा के प्रति इसी जुड़ाव ने उन्हें आगे चलकर शिक्षक बनने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने अपनी पहली सरकारी नौकरी छोड़ी और टीचर बन गईं. साल 2006 से वो गाजियाबाद के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में विज्ञान पढ़ा रही हैं. डॉ. रेणु त्रिपाठी अब तक विज्ञान और शिक्षा से जुड़ी 12 किताबें लिख चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने ऑनलाइन साइंस ई-कंटेंट भी तैयार किया है.

अगले साल रिटायर होंगी डॉ. रेणु-
आनुवंशिकता, जैव विकास, पादप कोशिका और परमाणु की संरचना जैसे मुश्किल विषयों को भी वो बच्चों के लिए आसान तरीके से समझाने की कोशिश करती हैं.

रेणु अगले साल रिटायर हो रहीं हैं. लेकिन उनका कहना है कि शिक्षा मशाल वो हमेशा थामे रखेंगी. रिटायरमेंट के बाद वो गरीब और अनाथ बच्चों की शिक्षा का बीड़ा उठाने की तैयारी में हैं.

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