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इस गांव में एक छात्र के लिए खुलता है स्कूल! अकेले बच्चे के लिए रोज क्लास लगाते हैं शिक्षक, वायरल हो रही अनोखी कहानी

आंध्र प्रदेश के पेडाबोंडापल्ली गांव के सरकारी प्राथमिक स्कूल में अब सिर्फ एक छात्र पढ़ता है. कक्षा 2 के मेकला अरविंद के लिए शिक्षक रोज क्लास लगाते हैं. कभी बच्चों से गुलजार रहने वाले इस स्कूल में घटते नामांकन ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है.

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स्कूल में पढ़ता है केवल एक छात्र. स्कूल में पढ़ता है केवल एक छात्र.

एक स्कूल, एक छात्र और एक शिक्षक. सुनने में यह किसी कहानी का हिस्सा लगता है, लेकिन यह हकीकत है. आंध्र प्रदेश के पेड़ा बोंडापल्ली गांव के सरकारी प्राथमिक स्कूल में अब सिर्फ एक बच्चा पढ़ने आता है. कक्षा 2 के छात्र मेकला अरविंद के लिए पूरा स्कूल ही उसकी दुनिया बन गया है. शिक्षक गौरा नायडू रोज उसके लिए क्लास लगाते हैं. कभी बच्चों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला यह स्कूल आज सन्नाटे के बीच सिर्फ एक बच्चे की पढ़ाई का गवाह बना हुआ है.

दरअसल, पेड़ा बोंडापल्ली गांव की रेड्डी वीधि में स्थित मंडल परिषद प्राथमिक स्कूल में इस समय केवल एक छात्र पढ़ रहा है. कक्षा 2 में पढ़ने वाले मेकला अरविंद अब स्कूल के इकलौते विद्यार्थी हैं. शिक्षक गौरानायडू रोज स्कूल पहुंचकर अरविंद को पढ़ाते हैं और उसकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दे रहे हैं.

पिछले साल दो छात्र थे, एक के जाने से अकेला रह गया अरविंद
बताया जा रहा है कि पिछले साल स्कूल में कुल दो छात्र पढ़ते थे. इनमें से एक छात्र कक्षा 2 पास करने के बाद कक्षा 3 में पहुंच गया. चूंकि इस स्कूल में पढ़ाई केवल कक्षा 2 तक ही होती है, इसलिए उसे आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे स्कूल में जाना पड़ा. इसके बाद अरविंद स्कूल में अकेला रह गया.

एक छात्र के बावजूद शिक्षक और स्टाफ तैनात
स्कूल में सिर्फ एक छात्र होने के बावजूद यहां शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं. इसके अलावा एक अन्य कर्मचारी मध्याह्न भोजन और साफ-सफाई से जुड़े कामों को संभालता है. यानी एक बच्चे के लिए भी स्कूल की नियमित व्यवस्था जारी है.

कभी बच्चों से भरा रहता था स्कूल
ग्रामीणों के मुताबिक, एक समय इस स्कूल में गांव के कई बच्चे पढ़ने आते थे. धीरे-धीरे बच्चों की संख्या कम होती गई. परिवारों के दूसरे स्थानों पर जाने और बच्चों का दूसरे स्कूलों में दाखिला कराने से सरकारी स्कूल में नामांकन लगातार घटता गया. अब ग्रामीणों को डर है कि अगर विद्यार्थियों की संख्या इसी तरह कम होती रही तो भविष्य में स्कूल को बंद या किसी दूसरे स्कूल के साथ मर्ज किया जा सकता है. यह मामला ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन और पलायन से पैदा हो रही चुनौती की ओर भी ध्यान खींचता है.

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