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अक्सर पेपर के समय लोगों को लगता है कि अगर वह घंटों तक पढ़ेंगे, तो ज्यादा पढ़ पाएंगे और अच्छें नंबर लाएंगे. लेकिन यह सोच पूरी तरह सही नहीं है. लंबे समय तक किताब के सामने बैठे रहने से हमेशा ज्यादा सीखने में मदद नहीं मिलती. लगातार पढ़ने से दिमाग थकने लगता है और कुछ समय बाद पढ़ी हुई बातें याद रखना मुश्किल हो जाता है. इसलिए पढ़ाई में समय से ज्यादा सही तरीका मायने रखता है.
कई छात्रों को लगता है कि बिना ब्रेक के लंबे समय तक पढ़ना ही मेहनत है. लेकिन लंबे समय तक पढ़ने पर ध्यान धीरे-धीरे कम होने लगता है. ऐसे में किताब सामने होती है, लेकिन दिमाग पूरी तरह पढ़ाई पर नहीं रहता. इसलिए कम समय के छोटे और ध्यान से किए गए पढ़ाई के सेशन ज्यादा उपयोगी हो सकते हैं.
पढ़ते समय जरूरी लाइनों को हाईलाइट करना आसान लगता है. इससे ऐसा महसूस होता है कि हमने अच्छी पढ़ाई कर ली है. लेकिन केवल लाइन पर रंग लगाने से जानकारी लंबे समय तक याद रहे, यह जरूरी नहीं है. इसके बजाय पढ़ने के बाद खुद से सवाल पूछना और बिना किताब देखे जवाब याद करने की कोशिश करना ज्यादा मदद कर सकता है. इसे एक्टिव रिकॉल कहा जाता है.
पढ़ाई में खुद को पूरी तरह थका देने की जरूरत नहीं है. जब आपको लगे कि ध्यान और समझने की क्षमता काफी कम हो रही है, तो थोड़ा ब्रेक लेना बेहतर है. पढ़ाई को छोटे हिस्सों में बांटकर लगातार करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. आप पढ़ने का समय 5 हिस्सों में बांटे. 4 हिस्से तक पढ़ाई करें और 1 हिस्सा ब्रेक लें.
आप कहां और कैसे पढ़ते हैं, इसका भी ध्यान और याददाश्त पर असर पड़ सकता है. इसलिए पढ़ाई के लिए एक शांत और तय जगह रखना अच्छी आदत हो सकती है. इससे दिमाग को पढ़ाई के माहौल की आदत पड़ती है.
अच्छी पढ़ाई के लिए पर्याप्त नींद भी जरूरी है. नींद के दौरान दिमाग दिनभर सीखी गई जानकारी को व्यवस्थित करने में मदद करता है. इसलिए देर रात तक पढ़ते रहने के बजाय पढ़ाई, ब्रेक और नींद का सही संतुलन बनाना बेहतर है.