NCERT Book
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नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की 8वीं क्लास की नई टेक्स्टबुक पर विवाद के बाद एनसीईआरटी ने सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगते हुए बुक का सर्कुलेशन बंद कर दिया है. इस बुक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर कंटेंट शामिल किया गया था. सोशल साइंस पार्ट-2 में जुडिशरी करप्शन चैप्टर पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए तीखी टिप्पणी की थी.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एनसीईआरटी के इस कदम को न्यायपालिका पर पहली गोली चलाने जैसा बताया. CJI ने निर्देश दिया कि केंद्र और राज्य सरकार के साथ मिलेकर एनसीईआरटी सुनिश्चित करेगा कि किताब को हर जगह से हटा लिया गया है. इसमें हार्ड और सॉफ्ट दोनों कॉपी शामिल हैं. अब लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर एनसीईआरटी का सिलेबस और किताबें बनाता कौन है और उनकी सामग्री को अंतिम मंजूरी कौन देता है? आइए इन सवालों का जवाब जानते हैं. आपको मालूम हो कि एनसीईआरटी एक स्वायत्त संस्था है. यह संस्था भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है.
एक पूरा सिस्टम करता है काम
एनसीईआरटी की किताब कोई एक लेखक नहीं लिखता है बल्कि एनसीईआरटी की बुक को लिखने के पीछे एक पूरा सिस्टम होता है, जो चरणबद्ध तरीके से काम करता है. नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के तहत एनसीईआरटी ने साल 2023 में सिलेबस और नई किताबों को अंतिम रूप देने के लिए 19 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति बनाई है. इस समिति का नाम टेक्स्टबुक डेवलेपमेंट कमेटी (TDC) है. इस समिति में विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर्स, स्कूल टीचर्स, रिसर्चर्स, सब्जेक्ट एक्सपर्ट, मुख्य सलाहाकार और एनसीईआरटी फैकल्टी के सदस्य शामिल होते हैं. यही समिति नए सिलेबस और किताबों को तैयार करने का काम करती है. कोई बड़ा बदलाव करने के लिए राष्ट्रीय स्तर की हाई लेवल समितियां भी बनाई जाती हैं. ये समितियां सेलेबस और किताबों को अंतिम रूप देती हैं.
सिलेबस और किताब बनाने का पहला चरण
एनसीईआरटी की किताब के लिए सिलेबस और किताब बनाने का पहला चरण नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) से होता है. नई एजुकेशन पॉलिसी 2020 पर एनसीएफ आधारित है. एनसीएफ यह तय करता है कि बुक के लिए कंटेंट का तरीका कैसा होगा, किन विषयों पर अधिक ध्यान रहेगा और पढ़ाने की दिशा क्या होगी? ये सब प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद हर क्लास और हर सब्जेक्ट का सिलेबस अलग-अलग तैयार किया जाता है. हर क्लास और चैप्टर के लिए राइटर्स का ग्रुप बनाया जाता है. इसके बाद ही बुक लिखने वाली टीम अपना काम शुरू करती है.
बुक का ड्राफ्ट किया जाता है तैयार
टेक्स्टबुक डेवलेपमेंट कमेटी द्वारा इसके बाद बुक का ड्राफ्ट तैयार किया जाता है. फिर इस किताब को समीक्षा समितियों के पास भेजा जाता है. समितियां तथ्यों की जांच, भाषा, संतुलन आदि की जांच की जाती है. यह भी देखा जाता है कि यह किताब जिस क्लास के बच्चों को पढ़ाया जाएगा, वह उनके हिसाब से ठीक है या नहीं. जरूरत पड़ने पर फील्ड ट्रायल यानी बाकी शिक्षकों और एक्सपर्ट्स से फीडबैक लिया जाता है. इस तरह से किताब पब्लिश होने से पहले कई विद्वानों की नजरों से गुजरती है.
कई सुधारों और संशोधनों के बाद किताब को अंतिम रूप दिया जाता है. बुक को अंतिम मंजूरी नेशनल सिलेबल एंड ट्रेनिंग लर्निंग मटेरियल कमेटी (NSTC) देती है. नई शिक्षा व्यवस्था के तहत एनसीईआरटी द्वारा गठित एक राष्ट्रीय संचालन समिति नई स्कूल टेक्स्टबुक्स को आखिरी मंजूरी देती है. गवर्निंग बॉडी या कमेटी की मंजूरी के बाद किताब प्रिंट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए भेजी जाती है. आपको मालूम हो कि यह पहली बार नहीं है जब एनसीईआरटी को किताबों में बदलाव करना पड़ रहा है. पहले भी कई बार बुक को अपडेट किया जा चुका है. बड़े पैमाने पर होने वाले बदलाव या विवाद की वजह पर हाई लेवल समीक्षा होती है. मंत्रालय के पास निगरानी रखने का अधिकार होता है.