Saman Gaon
Saman Gaon
टिहरी जनपद का समण गांव देशभक्ति और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है. इस गांव के 38 युवा वर्तमान में भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना में देश की सेवा कर रहे हैं, जबकि 4 सैनिक सेवानिवृत्त हो चुके हैं. इसी गांव के राजकीय जूनियर हाईस्कूल से पढ़कर निकले कई युवा आज सेना के साथ-साथ विभिन्न सरकारी विभागों में अधिकारी और कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं लेकिन विडंबना यह है कि जिस विद्यालय ने देश को इतने सैनिक दिए, आज उसी विद्यालय में 72 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रही है.
बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित
ग्रामीणों का कहना है कि भिलंगना ब्लॉक के इस एकमात्र जूनियर हाईस्कूल में वर्षों से शिक्षकों की कमी बनी हुई है. विद्यालय में छात्र संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सरकार की ओर से अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जा रही है. ऐसे में एक शिक्षक को सभी कक्षाओं की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि देश को सैनिक और योग्य नागरिक देने वाले इस गांव के विद्यालय में जल्द से जल्द आवश्यक शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके और गांव की गौरवशाली परंपरा आगे भी कायम रहे.
पढ़ाई के साथ सरकारी कार्य भी पड़ते हैं निपटाने
विद्यालय शिक्षक जोत सिंह ने बताया कि मैं यहां पिछले 8 सालों से कार्यरत हूं जबकि पिछले 2 वर्षों से अकेले यहां पर बच्चों को पढ़ा रहा हूं. उन्होंने बताया कि बच्चों की पढ़ाई के साथ साथ अनेकों सरकारी कार्य भी निपटाने पड़ते हैं. उन्होंने बताया कि जब मैं यहां आया था तो तब इस विद्यालय में 42 विद्यार्थी थे लेकिन आज 73 स्टूडेंट्स हैं. दो सालों से मैं अकेला इस स्कूल को संभाल रहा हूं, यहां पर पर्याप्त छात्र-छात्राओं के साथ साथ सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं लेकिन शिक्षकों की कमी के चलते पठन-पाठन में काफी दिक्कतें आ रही है.
सिर्फ आश्वासन ही मिला
ग्राम प्रधान कृष्णा देवी ने बताया कि समण गांव की आबादी करीब दो हजार है और यह गांव आज भी पलायन से लगभग अछूता है. गांव के प्राथमिक विद्यालय में 92 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि करीब 300 बच्चे राजकीय इंटर कॉलेज धोपड़धार में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जूनियर हाईस्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर कई बार शासन और प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला.
...ताकि गांव की गौरवशाली परंपरा आगे भी रहे कायम
ग्रामीण संजय बड़ोनी ने कहा कि समण गांव आज भी पलायन को मात देने वाला गांव है. यहां के युवाओं ने सेना और सरकारी सेवाओं में अपनी अलग पहचान बनाई है, लेकिन सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने में गंभीरता नहीं दिखा रही है. उन्होंने कहा कि यदि समय रहते विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो इसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा. ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि देश को सैनिक और योग्य नागरिक देने वाले इस गांव के विद्यालय में जल्द से जल्द आवश्यक शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके और गांव की गौरवशाली परंपरा आगे भी कायम रहे.
शिक्षकों को भेजने पर चल रही वार्ता
खंड शिक्षा अधिकारी भिलंगना सुमेर सिंह कैंतुरा ने बताया कि राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय समण गांव में 72 छात्र संख्या है. वहां पर एक अध्यापक हैं. वहां पर एक अतिरिक्त शिक्षक की व्यवस्था की गई थी लेकिन किन्हीं कारणों से उन्हें उनकी तैनाती वाले स्कूल भेज दिया है. अभी आसपास के स्कूलों से शिक्षकों को भेजने पर वार्ता चल रही है.