Pcs topper
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कड़ी मेहनत, असफलताओं से लड़ने का जज्बा और परिवार का अटूट साथ इन तीन ताकतों के दम पर दीप्ति वर्मा ने वह मुकाम हासिल कर लिया, जिसका सपना उन्होंने 12वीं कक्षा में देखा था. उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (PCS) परीक्षा में तीसरे प्रयास में सफलता हासिल करते हुए उन्होंने छठा स्थान प्राप्त किया और यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती.
हरदोई जिले के मल्लावां विकासखंड के पुरवा गांव की मूल निवासी दीप्ति वर्मा वर्तमान में लखनऊ के विकासनगर में अपने परिवार के साथ रहती हैं. उनके पिता देवेंद्र सिंह वर्मा LIC में अभिकर्ता हैं, जबकि माता पूनम वर्मा गृहिणी हैं. परिवार ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी, जिसका सकारात्मक प्रभाव दीप्ति की पढ़ाई पर साफ दिखाई देता है. दीप्ति ने लखनऊ के सेंट फिदेलिस इंटर कॉलेज से हाईस्कूल में 90.4% और इंटरमीडिएट में 94.5% अंक हासिल किए. इसके बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी में 72% अंक प्राप्त किए. वह बताती हैं कि उन्होंने 12वीं के बाद ही प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था, जो उनके पूरे सफर की सबसे बड़ी ताकत बना.
UPSC में 5 बार असफलता, फिर भी नहीं टूटा हौसला
दीप्ति का पहला लक्ष्य UPSC था, जिसके लिए उन्होंने लगातार 5 प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली. हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और हर असफलता से सीख लेकर खुद को बेहतर बनाया. जहां कई अभ्यर्थी असफलताओं से टूट जाते हैं, वहीं दीप्ति ने इसे अपनी ताकत बना लिया. UPSC के अनुभवों के आधार पर उन्होंने PCS की तैयारी को नई दिशा दी. तीसरे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल कर छठा स्थान प्राप्त किया. उनकी तैयारी का मुख्य आधार अनुशासन, सीमित और उपयोगी अध्ययन सामग्री, नियमित रिवीजन और मॉक टेस्ट रहे. वह रोजाना सुबह से शाम 7 बजे तक लाइब्रेरी में पढ़ाई करती थीं.
परिवार बना सबसे बड़ा सहारा
तैयारी के दौरान उनकी मां की तबीयत अक्सर खराब रहती थी, जिससे मानसिक दबाव भी बना. इसके बावजूद परिवार ने उनका मनोबल बढ़ाया. दीप्ति मानती हैं कि पिता, माता और भाई का सहयोग उनकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत रहा.
दीप्ति वर्मा की कहानी यह सिखाती है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सीखने का अवसर है. निरंतर प्रयास, सही रणनीति और परिवार का सहयोग मिल जाए, तो सफलता निश्चित है.
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