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UPSC Prelims 2026 में इन 5 सवालों ने उड़ाए एस्पिरेंट्स के होश, क्या आप दे पाएंगे सही जवाब?

UPSC CSE Prelims 2026 का GS Paper-1 इस बार अभ्यर्थियों के लिए किसी बड़े चैलेंज से कम नहीं रहा. 100 सवाल और सिर्फ 120 मिनट के बीच उम्मीदवारों को ऐसे प्रश्नों का सामना करना पड़ा, जिनमें सिर्फ रटकर याद किए गए फैक्ट्स नहीं, बल्कि गहरी समझ, लॉजिक और एनालिसिस की जरूरत थी.

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हाइलाइट्स
  • 6 मिनट में 5 सवाल हल करने की चुनौती

  • क्यों कठिन मानी जा रही है UPSC 2026 परीक्षा?

यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (UPSC CSE) 2026, 24 मई को कराई गई. हर साल की तरह इस साल भी लाखों उम्मीदवारों ने IAS, IPS, IFS जैसी सर्विसेज के लिए यूपीएससी सीएसई प्रीलिम्स एग्जाम दिया. लेकिन इस बार GS पेपर-1 अभ्यर्थियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया. 100 सवाल और सिर्फ 120 मिनट का समय. यानी हर सवाल पर औसतन 72 सेकेंड. ऊपर से निगेटिव मार्किंग का दबाव.

सोशल मीडिया, टेलीग्राम ग्रुप और कोचिंग प्लेटफॉर्म पर पूरे दिन इसी पेपर की चर्चा रही. कई UPSC मेंटर्स और पुराने चयनित अभ्यर्थियों ने भी माना कि इस बार का GS पेपर-1 पिछले कई वर्षों में सबसे मुश्किल रहा. कई सवाल ऐसे थे जिनमें गहरी समझ और एनालिसिस की जरूरत थी. उम्मीदवारों का कहना है कि पेपर में सिर्फ फैक्ट्स याद होना काफी नहीं था.

अभ्यर्थियों का कहना है कि मुश्किल सिर्फ सवालों की नहीं थी, बल्कि हर प्रश्न को पढ़ने और समझने में ही काफी समय लग रहा था. कई प्रश्न केस स्टडी की तरह थे, जिनमें Mr. X और Ms. X जैसे काल्पनिक पात्रों के जरिए प्रशासनिक और नैतिक दुविधाएं पूछी गईं. मेंटर्स ने कहा कि पेपर में कई ऐसे सवाल थे, जो सामान्य अध्ययन से ज्यादा एथिक्स या CSAT जैसे लग रहे थे. कुछ सवालों में दुर्लभ ऐतिहासिक संदर्भ और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों जैसी कम चर्चित जानकारियां पूछी गईं.

6 मिनट में 5 सवाल हल करने की चुनौती
अगर आपको लगता है कि अभ्यर्थियों की शिकायत बढ़ा-चढ़ाकर कही जा रही है, तो यह चुनौती देखिए. 6 मिनट का टाइमर लगाइए. यही समय एक अभ्यर्थी को इन 5 सवालों के लिए मिल सकता था.

1. प्रीलिम्स में एथिक्स का सवाल
सुश्री X एक बड़े शहर के शहरी विकास विभाग में मध्यम स्तर की सिविल सेवा अधिकारी हैं. हाल ही में वह एक सार्वजनिक अवसंरचना परियोजना नए सामुदायिक पार्क के लिए ठेका मंजूर करने की प्रक्रिया में शामिल थीं. मंजूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें गोपनीय जानकारी मिली कि शॉर्टलिस्ट किए गए ठेकेदारों में से एक का अन्य शहरों में खराब कार्य गुणवत्ता और भ्रष्टाचार के आरोपों का इतिहास रहा है, हालांकि कानूनी रूप से कुछ भी सिद्ध नहीं हुआ था.

विभागाध्यक्ष श्री Y ने उन्हें सलाह दी कि वह यह जानकारी परियोजना समिति या जनता के सामने प्रकट न करें, क्योंकि इससे परियोजना में देरी हो सकती है और शहर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है. हालांकि, सुश्री X का मानना था कि ऐसी जानकारी छिपाना पारदर्शिता और जनविश्वास के खिलाफ है.

निम्नलिखित में से सुश्री X को अब क्या करना चाहिए?
तुरंत परियोजना समिति और जनता के सामने जानकारी उजागर करना
परियोजना की शुचिता बनाए रखने के लिए ठेकेदार को शॉर्टलिस्ट से हटाने की सिफारिश करना
सीमित रूप से किसी निगरानी समिति को जानकारी देना, लेकिन फिलहाल जनता से गोपनीय रखना

नीचे दिए गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर चुनिए:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 3

(c) केवल 2 और 3

(d) 1, 2 और 3

2. आदिवासी जमीन विवाद वाला सवाल
एक बहु-जातीय जिले में आर्थिक प्रतिस्पर्धा और ऐतिहासिक शिकायतों के कारण अक्सर सामुदायिक तनाव बना रहता है. ऐसे में सरकार ने एक आदिवासी बस्ती के पास कचरा प्रबंधन संयंत्र के लिए जमीन आवंटित करने का फैसला किया, जिसके बाद आदिवासी समुदाय ने विरोध शुरू कर दिया. उनका दावा था कि यह भूमि पवित्र है और उनकी सांस्कृतिक पहचान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

दूसरी ओर, शहरी निवासी और स्थानीय उद्योग इस परियोजना के समर्थन में थे. उनका कहना था कि उचित कचरा निपटान स्थल की कमी के कारण गंभीर ठोस अपशिष्ट और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो रही हैं.

मध्यस्थता के लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारी के रूप में निम्नलिखित पर विचार कीजिए:

सफल विवाद समाधान प्रक्रिया की शुरुआत तकनीकी विकल्पों पर चर्चा से पहले आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक चिंताओं को स्वीकार करने से होनी चाहिए.
शहरी स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए सरकार को बिना देरी परियोजना आगे बढ़ानी चाहिए, क्योंकि वे छोटे समूह की भावनाओं से अधिक महत्वपूर्ण हैं.
आदिवासी नेताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों और नगर प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए बहु-हितधारक संवाद मंच बनाना.
स्वतंत्र पर्यावरण एवं सामाजिक प्रभाव आकलन (ESIA) कराना और उसकी रिपोर्ट पारदर्शी तरीके से साझा करना.

उपरोक्त में से कौन-से कदम समाधान प्रक्रिया में योगदान देंगे?

(a) केवल 1, 3 और 4

(b) केवल 2, 3 और 4

(c) केवल 1 और 2

(d) 1, 2, 3 और 4

3. UN पीसकीपिंग मिशन वाला सवाल

सूची-I को सूची-II से मिलाइए और नीचे दिए गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर चुनिए:

सूची-I (कार्यकाल)
सूची-II (संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन)

2007–2010 - A. UNMIL
2002–2005 -B. MINURCAT
2003–2018 - C. MINUSTAH
2004–2017-D. UNMISET

कूट:

ABCD

(a) 3412

(b) 3142

(c) 2143

(d) 2413

भारतीय वन सेवा अधिकारी राहुल कुमार गुप्ता ने इस सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'ऐसे सवालों की तैयारी करने या इन्हें हल करने की जरूरत नहीं. ये सिर्फ अभ्यर्थियों में घबराहट पैदा करने के लिए होते हैं.'

4. अनुच्छेद 13 वाला कानूनी सवाल
X संविधान के भाग-III के अनुच्छेद 13 में दिए गए ‘विधि’ (Law) शब्द के अर्थ पर एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे. X ने बताया कि संविधान में ‘विधि’ शब्द का अर्थ बहुत व्यापक है. इसमें अध्यादेश, आदेश और नियम-विनियम भी शामिल हैं.
Y ने कहा कि अनुच्छेद 13 में ‘विधि’ के अंतर्गत भारत के क्षेत्र में लागू प्रथा या परंपरा (Custom or Usage) भी आती है, लेकिन X इससे सहमत नहीं थे.

उपरोक्त के आधार पर सही निष्कर्ष चुनिए-

(a) X की व्याख्या सही है, जिसमें प्रथा को शामिल न करने का दृष्टिकोण भी सही है.

(b) Y का यह दृष्टिकोण सही नहीं है कि ‘विधि’ में प्रथा भी शामिल है.

(c) X और Y दोनों के विचार सही हैं.

(d) केवल Y का दृष्टिकोण सही है.

5. क्षेत्र-पत्नी वाला इतिहास प्रश्न

'क्षेत्र-पत्नी' (mistress of the field) शब्द निम्नलिखित में से किस ग्रंथ में उत्पन्न हुआ है?

(a) ऋग्वेद

(b) अथर्ववेद

(c) अष्टाध्यायी

(d) अर्थशास्त्र

UPSC मेंटर अमित किल्होर ने दावा किया कि उन्होंने यह सवाल तीन AI मॉडल्स से पूछा, लेकिन तीनों ने अलग-अलग जवाब दिए. उन्होंने कहा, 'अगर प्रीमियम AI मॉडल भी सही जवाब तय नहीं कर पा रहे, तो छात्र कैसे करेंगे. यह सवालों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है.'

क्या वाकई सबसे कठिन था UPSC प्रीलिम्स 2026?
अभ्यर्थियों का कहना है कि समस्या सिर्फ कठिनाई नहीं थी, बल्कि सवालों का पैटर्न पूरी तरह बदल गया था. GS पेपर-1 में ऐसी विश्लेषणात्मक और निर्णय आधारित परिस्थितियां दी गईं, जो आमतौर पर CSAT या एथिक्स पेपर में देखने को मिलती हैं.

क्यों कठिन मानी जा रही है UPSC 2026 परीक्षा?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि UPSC ने इस बार परीक्षा का स्तर काफी ऊंचा रखा. इस बार फैक्ट्स आधारित प्रश्नों की जगह एनालिटिकल और मल्टी-डिसिप्लिनरी प्रश्नों को प्राथमिकता दी गई. यही वजह है कि कई अनुभवी उम्मीदवार भी परीक्षा के बाद सवालों को लेकर चर्चा करते नजर आए.