NEET PG काउंसलिंग को लेकर सड़कों पर डॉक्टर
NEET PG काउंसलिंग को लेकर सड़कों पर डॉक्टर
NEET PG परीक्षा को लेकर देश भर के मेडिकल छात्र और रेजिडेंट डॉक्टर्स गुस्से में हैं. हालांकि मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है. कोर्ट के आदेश से ही NEET PG की परीक्षा का नतीजा आने के बावजूद छात्रों की काउंसलिंग अभी तक नहीं हो पाई है. क्योंकि सरकार NEET एग्जाम के जरिए पास होकर PG में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए आरक्षित वर्ग में ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी को भी आरक्षण का लाभ दे रही है. कुछ छात्रों ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है.
अब इस मामले पर छह जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और जस्टिस बीवी नागरत्नाना की पीठ आगे सुनवाई करेगी. लेकिन इस दौरान देश भर के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में रेजिडेंटशिप कर रहे डॉक्टरों ने सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए देशव्यापी सामूहिक इस्तीफे की धमकी तक दे डाली है. उनकी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट प्राथमिकता के आधार पर इस मसले को जल्द से जल्द सुलझाए चाहे फास्ट ट्रैक सुनवाई क्यों न करनी पड़े.
24 से 29 अक्टूबर तक होनी थी छात्रों की काउंसलिंग
तय परीक्षा कार्यक्रम के मुताबिक 2021 के लिए हुए NEET PG इम्तिहान के नतीजे आने के बाद 24 से 29 अक्टूबर तक उत्तीर्ण छात्रों की काउंसलिंग होनी थी. देश भर में NEET परीक्षा देकर उत्तीर्ण हुए करीब 50 हजार छात्र कोर्ट के निर्णय और दाखिले के लिए काउंसलिंग शुरू होने का बेचैनी से इंतजार कर रहे हैं. दरअसल इस मामले में पेंच आरक्षण में हिस्सेदारी को लेकर है. केंद्र सरकार की केंद्रीय चिकित्सा काउंसलिंग समिति (MCC) ने 2021 में NEET के जरिए PG कोर्स में दाखिले के लिए आरक्षण के दायरे में लाभार्थियों के लिए नई व्यवस्था बनाई.
अभ्यर्थियों ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
इसके तहत पुरानी व्यवस्था के साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 फीसदी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के परीक्षार्थियों के लिए 10 फीसदी आरक्षण का लाभ देने के लिए तय नियम शर्तों में घालमेल की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने काउंसलिंग रोक रखी है. आरक्षण की तरह इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए NEET PG के कुछ अभ्यर्थी छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कोर्ट ने सरकार से आरक्षण का लाभ उठाने के लिए अभ्यर्थियों की अधिकतम सालाना आय आठ लाख रुपए की सीमा शर्त तय करने पर भी जवाब मांगा था. कोर्ट का कहना है कि पहले ये पेंच खुल जाए फिर काउंसलिंग और दाखिला होकर पढ़ाई शुरू हो.
सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए समान आय वर्ग आठ लाख रुपए तय किए जाने के पीछे का आधार पूछा था. कोर्ट ने पूछा था कि इस बाबत कोई सर्वेक्षण कराया गया या फिर कोई रिपोर्ट है? इसके अलावा कोर्ट ने ये भी पूछा था कि इन दिनों वर्ग के उम्मीदवारों को आरक्षण का लाभ दिए जाने की पात्रता क्या रखी गई है? सरकार को छह जनवरी को होने वाली सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट के इन सभी सवालों के जवाब देने होंगे.