scorecardresearch

SIR में मिला चुनाव आयोग का नोटिस तो घबराएं नहीं, इन 4 सवालों के आसान जवाब जानिए

दिल्ली में मतदाता सूची के SIR प्रोसेस को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. कई लोग घबराए हुए हैं. अगर आपको चुनाव आयोग का नोटिस मिला है तो घबराने की जरूरत नहीं है. आप नोटिस का जवाब आसानी से दे सकते हैं और अपनी गलतियों को सुधार सकते हैं. चलिए इससे संबंधित 4 सवालों के जवाब बताते हैं.

Advertisement
SIR SIR

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को लेकर इन दिनों काफी विवाद चल रहा है. अलग अलग लोगों के बयानों से विवादों का रायता काफी फैल गया है. हालांकि उसे समेटने के लिए निर्वाचन आयोग कई बार अलग अलग माध्यम से स्पष्टीकरण दे चुका है. आयोग के मुताबिक एसआईआर के इस चरण की प्रक्रिया के तहत करीब 33 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं. 

जयशंकर से लेकर केजरीवाल तक को नोटिस-
नोटिस पाने वालों में विदेश मंत्री एस जयशंकर, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई और लालकृष्ण आडवाणी के परिणामजनों सहित कई वीवीआईपी भी शामिल हैं. इस पूरी प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों पर निर्वाचन आयोग व प्रशासनिक अधिकारियों ने जवाब भी दिए हैं. 
आइए कुछ सवालों और जवाबों से रूबरू होते हैं.

सवाल 1: यह SIR नोटिस क्यों भेजे जा रहे हैं और 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' क्या है? अचानक लाखों लोगों को 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' (तार्किक गड़बड़ी) और 'अनमैप्ड' (Unmapped) का टैग देकर नोटिस क्यों थमा दिए गए हैं? इससे लोगों में भ्रम है. 

जवाब: इस पर दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी यानी CEO अशोक कुमार के मुताबिक दिल्ली में मतदाता सूची को पूरी तरह दुरुस्त और सटीक बनाने के लिए यह जांच की जा रही है. लगभग 13.79 लाख ऐसे वोटर हैं जिनका डेटा 2002 की पिछली SIR सूची से मेल नहीं खा रहा है. उन्हें 'Unmapped with Last SIR' श्रेणी में रखते हुए नोटिस भेजे गए हैं. वहीं, 19.33 लाख वोटर्स के डेटा में कुछ तार्किक कमियां जैसे नाम, उम्र या पते में विसंगति पाई गई हैं. जिन्हें 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' कहा जा रहा है. यह नोटिस सिर्फ डेटा सुधार और सत्यापन के लिए है.

सवाल 2: क्या नोटिस मिलने का मतलब यह है कि वोटर लिस्ट से नाम काट दिया जाएगा? 

जवाब: एसआईआर प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं का नाम काटने की साजिश रची जा रही है. आम नागरिकों और किराएदारों में डर है कि उनका वोट कट जाएगा. दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने का यह मतलब कतई नहीं है कि मतदाता का नाम सूची से हटा दिया गया है या काट दिया जाएगा. नियम के अनुसार, किसी भी मतदाता का नाम तब तक नहीं हटाया जा सकता, जब तक उसे अपनी बात रखने (सुनवाई) का पूरा मौका न दिया जाए. यह केवल एक वेरिफिकेशन प्रक्रिया है.

सवाल 3: इस प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों नहीं है? नियम क्या हैं? 
जवाब: इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि चुनाव आयोग ने वह क्राइटेरिया (मापदंड) या एल्गोरिदम सार्वजनिक नहीं किया है, जिसके आधार पर लोगों को इस श्रेणी में डाला गया है. साथ ही, यह लिस्ट पब्लिक डोमेन में न होने से आम लोगों को परेशानी हो रही है. निर्वाचन आयोग के उच्च पदस्थ अधिकारियों के अनुसार, 31 अगस्त को जारी की गई मतदाता सूची की प्रारंभिक ड्राफ्ट लिस्ट दिल्ली सीईओ की आधिकारिक वेबसाइट के साथ-साथ सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) के दफ्तरों और पोलिंग स्टेशनों पर उपलब्ध कराई गई है. सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में नियमों और गाइडलाइंस की समीक्षा के लिए सुनवाई करने पर सहमत हो गया है.

सवाल 4: नोटिस मिलने पर मतदाताओं को अब क्या करना होगा?

जवाब: यदि आपको या आपके किसी परिचित को SIR का नोटिस मिला है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. इन स्टेप्स का पालन करें:
 
नोटिस की जांच करें: सबसे पहले नोटिस पर अपना नाम, EPIC (वोटर आईडी) नंबर, भाग संख्या (Part Number) और कारण (Reason) ध्यान से देखें. नोटिस में ERO के सामने पेश होने की तारीख, समय और स्थान लिखा होगा. विसंगति को ठीक करने के लिए आपको अपने जरूरी दस्तावेजों की सेल्फ-अटेस्टेड (स्व-सत्यापित) कॉपियां जमा करनी होंगी. इसके लिए चुनाव आयोग ने 12 मुख्य दस्तावेजों की सूची जारी की है, जिनमें से आप कोई भी दे सकते हैं:

  • आधार कार्ड, पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र
  • 1 जुलाई 1987 से पहले सरकारी विभागों, बैंकों, पोस्ट ऑफिस या LIC द्वारा जारी दस्तावेज  
  • 10वीं/मैट्रिकुलेशन का सर्टिफिकेट
  • सरकारी/PSU कर्मचारी या पेंशनर आईडी कार्ड
  • स्थायी निवास प्रमाण पत्र

निर्वाचन अधिकारी इन सभी नोटिसों का निपटारा 29 अक्टूबर 2026 तक पूरा कर लेंगे. इसके बाद, दिल्ली की फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन 4 नवंबर 2026 को किया जाएगा. अगर किसी का नाम गलती से हटा दिया गया है या वे नए सिरे से आवेदन करना चाहते हैं, तो वे चुनाव आयोग के वोटर सर्विसेज पोर्टल पर जाकर Form-6 भरकर ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें: