EVM Strong Room Security
EVM Strong Room Security
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 दो चरणों में संपन्न हो चुका है. मतगणना 4 मई को है और उसी दिन विधानसभा की कुल 294 सीटों के नतीजे घोषित किए जाएंगे. किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए 148 सीटों पर जीत जरूरी है. मतगणना से पहले ही ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं ने ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम (EVM Strong Room) में गड़बड़ी का आरोप लगाया है. इस दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) और टीएमसी कार्यकर्ताओं में बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली है. सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह से दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत कराया.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद गुरुवार देर शाम सखावत मेमोरियल स्कूल में बने स्ट्रॉन्ग रूम पहुंच गईं, जहां उनकी विधानसभा सीट भवानीपुर की ईवीएम मशीनें रखी हुई हैं. ममता ने स्ट्रॉन्ग रूम से निकलकर ईवीएम में छेड़छाड़ का आरोप लगाया. वह बोलीं किसी भी कीमत पर ईवीएम लूटने नहीं देंगे. एक्स पर टीएमसी ने लिखा है कि यह बंगाल है. हम बिहार, महाराष्ट्र या दिल्ली नहीं हैं. हम आपकी इस साजिश में साथ नहीं देंगे. हर कार्रवाई का बराबर और विपरीत जवाब दिया जाएगा. वोट की रक्षा कीजिए, वरना परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहिए. इस बीच बीजेपी नेता अमित मालवीय ने भी एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि ममता बनर्जी का यह नाटकीय रवैया शायद पश्चिम बंगाल के लिए सबसे साफ एग्जिट पोल है. हालात क्या इशारा कर रहे हैं, यह साफ दिख रहा है और उससे ध्यान भटकाने की बेताबी भी साफ नजर आ रही है. उधर, चुनाव आयोग ने गड़बड़ी के आरोपों को खारिज करते हुए मशीनों को सुरक्षित बताया है. हम आज आपको बता रहे हैं कि ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम की कितनी तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था होती है. उससे पहले जान लेते हैं आखिर क्यों बंगाल में ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर विवाद हुआ है?
बंगाल में क्यों हुआ विवाद
आपको मालूम हो कि गुरुवार को टीएमसी ने एक सीसीटीवी फुटेज जारी कर दावा किया है कि कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम स्थित स्ट्रॉन्ग रूम में रखे बैलेट बॉक्स के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की गई है. इसको लेकर तृणमूल कांग्रेस के नेता डॉ. शशि पांजा और कुणाल घोष स्टेडियम के बाहर ही पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठ गए. इसके बाद सीएम ममता बनर्जी सखावत मेमोरियल स्कूल में बने स्ट्रॉन्ग रूम पहुंच गईं और घंटों तक अंदर रहीं.
टीएमसी ने आरोप लगाया है कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. पार्टी का कहना है कि उनकी जानकारी के बिना स्ट्रॉन्ग रूम के आसपास हलचल हो रही है. उधर, बीजेपी कार्यकर्ता भी मौके पर डटे रहे और उन्होंने साफ किया कि जब तक ममता बनर्जी वहां से नहीं हटेंगी, वे भी पीछे नहीं हटेंगे. टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ताओं में तीखी नोकझोंक भी हुई. हालांकि सुरक्षा बलों ने किसी तरह दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत कराया.
क्या होता है स्ट्रॉग रूम
स्ट्रॉग रूम वह होता है, जहां चुनाव होने के बाद मतदान केंद्रों से ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को निकालकर सुरक्षित घेरे में रखा जाता है. यह रूम पूरी तरह से सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होता है. मतदान समाप्त होने के बाद पोलिंग बूथ पर तैनात प्रीसाइडिंग ऑफिसर सबसे पहले ईवीएम में दर्ज कुल वोटों के रिकॉर्ड का बारीकी से परीक्षण करते हैं. यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी जाती है.
वहां मौजूद सभी राजनीतिक दलों के पोलिंग एजेंटों को एक सत्यापित कॉपी सौंपी जाती है. इसके बाद ईवीएम को सील किया जाता है. इसके बाद ईवीएम को स्ट्रॉग रूम ले जाया जाता है.ईवीएम को जब स्ट्रॉग रूम में अंदर रख दिया जाता है तो दरवाजे को आधिकारिक रूप से सील किया जाता है और उसके ऊपर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि अपने दस्तखत और अपनी सील लगा सकते हैं. यहां मतगणना के दिन तक लोकतंत्र की किस्मत को सुरक्षित रखा जाता है. आपको मालूम हो कि कई बार उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को एक स्क्रीन दी जाती है, जहां से वे बाहर बैठकर स्ट्रॉग रूम के दरवाजे को लाइव देख सकते हैं.
किसके पास होती है स्ट्रॉग रूम की चाबी
आपको मालूम हो कि जिस दिन मतगणना होनी होती है, उस दिन सुबह 7 बजे के आसपास स्ट्रॉग रूम का ताला खोला जाता है. स्ट्रॉग रूम की चाबी किसी एक व्यक्ति के पास नहीं होती है. सुरक्षा मानकों के मुताबिक एक जिले की सभी ईवीएम की कमान डिस्ट्रिक्ट इलेक्टोरल ऑफिसर (DEO) के हाथों में होती है. स्ट्रॉग रूम में डबल लॉक सिस्टम यानी दोहरा ताला लगाया जाता है. ताले की चाबी जिला निर्वाचन अधिकारी और संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर की निगरानी में सुरक्षित रखी जाती है.
चाबियों की सुरक्षा के लिए बकायदा प्रोटोकॉल का पालन होता है. ईवीएम मशीनों को जिस जगह पर रखा जाता है, वहां बिजली के तार तक काट दिए जाते हैं ताकि शॉर्ट सर्किट या किसी तकनीकी हेरफेर का डर न रहे. नियम के मुताबिक जब तक मतगणना का दिन नहीं आता स्ट्रॉग रूम के ताले को चुनाव आयोग की अनुमति के बिना और उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना नहीं खोला जा सकता है. स्ट्रॉग रूम को खोलने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जाती है. ईवीएम की कंट्रोल यूनिट काउंटिंग की टेबल यानी मेज पर रखी जाती है. फिर कंट्रोल यूनिट की यूनिक आईडी और सील का मिलान किया जाता है. इसको पोलिंग एजेंट को भी दिखाया जाता है. किसी प्रत्याशी के एजेंट के आपत्ति नहीं होने पर आगे की प्रक्रिया शुरू होती है.
स्ट्रॉग रूम में रखी ईवीएम की तीन लेयर में होती है सुरक्षा
स्ट्रॉग रूम में रखी ईवीएम की सुरक्षा तीन लेयर में की जाती है. पहले और सबसे अंदर वाले घेरे की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) के पास होती है. CAPF के जवान स्ट्रॉग रूम के दरवाजे के ठीक बाहर 24 घंटे तैनात रहते हैं. दूसरे घेरे में भी केंद्रीय बल ही पहरा देते हैं. सबसे बाहरी लेयर की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य पुलिस बल की होती है. राज्य पुलिस बाहरी भीड़ या किसी भी अनधिकृत प्रवेश को रोकने का काम करती है.