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ओम प्रकाश राजभर के विधानसभा सीट बदलने का राज क्या? जहूराबाद में हार का डर या चुनाव से पहले भाजपा छोड़ सपा में जाने के संकेत?

ओम प्रकाश राजभर ने यह कहकर सबको चौंका दिया है कि वे अपनी मौजूदा जहूराबाद सीट छोड़कर आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ेंगे. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह गाजीपुर और मऊ में अंसारी परिवार का प्रभाव और बदला हुआ समीकरण है.

Om Prakash Rajbhar Om Prakash Rajbhar

उत्तर प्रदेश की सियासत में सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर के उस नए सियासी पैंतरे ने पूर्वांचल की सियासत गरमा दी है, जिसमें उन्होंने अपनी परंपरागत सीट जहूराबाद को छोड़कर आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, जिसके पीछे अंसारी परिवार और बदलती क्षेत्रीय समीकरणों की बड़ी भूमिका है मानी जा रही है यही नहीं  राजभर अपने बेटे के लिए भी आजमगढ़ की ही दीदारगंज सीट पर दावा ठोक रहे हैं जिस सीट पर निषाद पार्टी ने चुनाव लड़ा था। ओमप्रकाश राजभर के बयान ने एनडीए के भीतर सीट शेयरिंग पर रार पैदा कर दी है. वहीं तीसरी अहम खबर राजभर की समाजवादी पार्टी की ओर बढ़ती कथित नजदीकियों और अखिलेश यादव की उन पर नाराजगी के बीच छिपे भविष्य के गठबंधन की संभावनाओं को लेकर है.

जहूराबाद में अंसारी फैक्टर, क्यों सुरक्षित सीट छोड़ना चाहते हैं राजभर?
ओम प्रकाश राजभर ने यह कहकर सबको चौंका दिया है कि वे अपनी मौजूदा जहूराबाद सीट छोड़कर आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ेंगे. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह गाजीपुर और मऊ में अंसारी परिवार का प्रभाव और बदला हुआ समीकरण है. 2022 में राजभर सपा गठबंधन और अंसारी परिवार के समर्थन की वजह से जहूराबाद जीत पाए थे, क्योंकि वहां यादव और मुसलमान वोट निर्णायक हैं. अब जबकि मुख्तार अंसारी का परिवार पूरी तरह सपा के साथ है, राजभर को डर है कि जहूराबाद में उनके पास सिर्फ राजभर वोट ही बचेगा. साथ ही, सवर्णों (ठाकुर, ब्राह्मण, भूमिहार) की नाराजगी ने उनके लिए जहूराबाद में खतरा पैदा कर दिया है, इसलिए वे आजमगढ़ के सेफ जोन की तलाश में हैं.

सीट शेयरिंग पर रार, संजय निषाद ने राजभर को दी 'मर्यादा' की नसीहत
राजभर ने न केवल अपने लिए अतरौलिया बल्कि अपने बेटे के लिए बगल की दीदारगंज सीट पर भी दावा ठोक दिया है. इस पर एनडीए के साथी और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद भड़क गए हैं. अतरौलिया सीट पर निषाद पार्टी का मजबूत दावा रहा है. संजय निषाद ने राजभर को पलटवार करते हुए कहा कि "उन्हें मर्यादा में रहना चाहिए और बिना गठबंधन में चर्चा किए ऐसी घोषणाएं नहीं करनी चाहिए." राजभर का दावा है कि उन्होंने निषाद से बात कर ली है, जबकि संजय निषाद ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. यह खींचतान दिखाती है कि पूर्वांचल में एनडीए के भीतर सीटों को लेकर सब कुछ ठीक नहीं है.

'पीला गमछा' और अखिलेश की नाराजगी, क्या सपा की ओर बढ़ रहे हैं राजभर?
सियासी गलियारों में चर्चा है कि राजभर का अतरौलिया सीट मांगना दरअसल अखिलेश यादव पर दबाव बनाने की एक रणनीति है. अतरौलिया विधायक संग्राम सिंह यादव अखिलेश के बेहद करीबी हैं. राजभर इस परिवार के जरिए सपा में दोबारा एंट्री का रास्ता तलाश रहे हैं. हालांकि, अखिलेश यादव फिलहाल उनसे बेहद नाराज हैं और उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को हिदायत दी है कि 'पीले गमछे वालों' को एंट्री न दी जाए. लेकिन जानकार मानते हैं कि अगर बीजेपी से बात नहीं बनी, तो राजभर एक बार फिर पाला बदलकर सपा गठबंधन की ओर रुख कर सकते हैं.

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