scorecardresearch

Sikandarpur Assembly Election: यूपी में अगले साल होने वाला है विधानसभा चुनाव, यहां जान लीजिए सिकंदरपुर विधानसभा सीट का जातीय समीकरण और इतिहास

Sikandarpur Vidhan Sabha Seet: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. हम आपको आज बलिया जिले की सिकंदरपुर विधानसभा सीट के बारे में बताने जा रहे हैं. इस सीट पर वर्तमान में समाजवादी पार्टी का कब्जा है. यहां से मुहम्मद जियाउद्दीन रीजवी विधायक हैं. 

Sikandarpur Vidhan Sabha Seet Sikandarpur Vidhan Sabha Seet

उत्तर प्रदेश में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. पूरे प्रदेश में अभी से सियासी पारा चरम पर है. बलिया जिले में भी हर तरफ चुनाव को लेकर चर्चा हो रही है. आपको मालूम हो कि बलिया जिले में कुल सात विधान सभा सीटें हैं, जिसमें से दो सीटों पर भाजपा का कब्जा है. चार सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है और एक सीट बसपा के खाते में है. आज हम जिस सीट की बात करेंगे वह है सिकंदरपुर विधानसभा की सीट. इस सीट पर वर्तमान में समाजवादी पार्टी का कब्जा है और यहां से मुहम्मद जियाउद्दीन रीजवी विधायक हैं. जियाउद्दीन रीजवी इस विधानसभा से इस बार तीसरी बार विधायक बने हैं.

विधायक जियाउद्दीन रीजवी निभाएंगे यह वादा
विधायक जियाउद्दीन रीजवी का कहना है कि 2022 के चुनाव में उन्होंने वादा किया था कि सिकंदरपुर विधानसभा में दो सौ बेड का अस्पताल बनवाएंगे और महिलाओं के लिए एक सौ बेड का अलग से अस्पताल बनवाएंगे. हालांकि सरकार नहीं बनी और वो काम अधूरा रह गया लेकिन 2027 में जब समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी तो इस कार्य को वो एक साल के अंदर पूरा कराएंगे. उन्होंने कहा कि इस बार बेरोजगार युवाओं ने और एकजुट पीडीए ने मन बना लिया है कि समाजवादी पार्टी कि सरकार बनाएंगे.

जनता इस बार देगी मुझे मौका
सिकंदरपुर विधानसभा सीट से से भाजपा के हारे हुए प्रत्याशी संजय यादव का कहना है कि 2022 में समाजवादी पार्टी के साथ एक दल ने गठबंधन कर लिया जो 2017 में हमारे साथ था और उस सामाजिक समीकरण कि वजह से मैं कुछ वोटों से हार गया. जब मैं 2017 से 22 तक विधायक था तो मैंने हर गांव में पक्की सड़क बनायीं. 2022 का चुनाव हारने के बाद मैंने लगातार गांव-गांव में जाकर लोगों से सम्पर्क किया है और उनकी समस्याओं को सुना है. जिस भी क्षेत्र कि जनता हमारे यहां आती है, उसकी पूरी सुनवाई होती है. लोगों की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करता हूं. इस नाते मुझे पूरा विश्वास है कि साल 2027 के चुनाव में जनता इस बार फिर मुझे मौका देगी.

...तो बीजेपी रहेगी भारी
उधर, स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि इस बार इस सीट पर बीजेपी भारी रहेगी क्योंकि समाजबादी पार्टी के जो विधायक हैं वो सिर्फ यही कहते आ रहे हैं कि हमारी सरकार नहीं है इसलिए अधिकारी हमारी नहीं सुन रहे हैं. इससे जनता आजीज आ चुकी है और भाजपा कि तरफ मन बना रही है. 2022 के चुनाव में सिर्फ गुटबाजी के चलते भाजपा हारी है. बीजेपी को यहां मंथन करके प्रत्याशी उतारना चाहिए. एक दूसरे स्थानीय पत्रकार का कहना है कि 2022 में बीजेपी के हारने का कारण बीजेपी में अंतरकलह को जाता है. आज भी यदि 2027 के चुनाव को अगर कोई जाना पहचाना और अच्छा चेहरा नहीं आता है तो बीजेपी के लिए बहुत परेशानी होगी. 

क्या है जातीय समीकरण 
यदि पूरे सिकंदरपुर विधानसभा के जातीय समीकरण की बात करें तो यहां सबसे अधिक दलित और यादव मतदाता हैं, जिनकी संख्या करीब 50-50 हजार के आसपास है. उसके बाद क्षत्रिय मतदाता हैं, जिनकी संख्या 35 हजार के आसपास है. ब्राम्हण मतदाताओं की संख्या 25 हजार के आसपास है. इसके अलावा कई ऐसी जातियां हैं, जिनकी संख्या तो कम है मगर इनको मिला दिया जाय तो ये मतदाता जीत-हार का समीकरण बदल सकते हैं.