अगर बात टूटे दिल को सहारा देने की हो तो सबसे पहले हमारे दिमाग में नामों में से एक नाम और आता है, मशहूर लेखक और सॉन्ग राइटर जावेद अख्तर का. जावेद एक नाम नहीं हैं बल्कि अपने आप में शब्दों का पूरा काफिला हैं. जावेद अख्तर ने बॉलीवुड को कई बड़े हिट गाने और शायरी दी है.
उन्होंने सॉन्ग 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' भी लिखा और टूटे दिल को सहारा देने के लिए 'तब हम दोनों वक़्त चुरा कर लाते थे, अब मिलते हैं जब भी फ़ुर्सत होती है' जैसी नायाब शायरी भी की. आज जावेद अख्तर अपना 81वां जन्मदिन मना रहे हैं. उनके इस खास मौके पर चलिए याद करते हैं, उनकी कुछ खास शायरी को. उनकी लिखी ये सारी शायरी आज भी जवां दिल को धड़कना और मुहब्बत में डूबने का हुनर सिखाती है.
'मेरे मुखालिफ ने चाल चल दी है
और अब भी चाल के इंतजार में है'
'न था कुछ तो खुदा था न होता कुछ तो खुदा होता
डुबोया मुझको होने में न होता मैं तो क्या होता
हुआ जब गम से यूं बे-हिस तो गम क्या सर के कटने का
न होता गर जुदा तन से तो जानू पर धरा होता
हुई मुद्दत कि 'गालिब' मर गया पर याद आता है
वो हर इक बात पर कहना कि यू होता तो क्या होता'
'अगर में ये समझूं कि ये मोहरे हैं सिर्फ लकड़ी के हैं खिलौने
तो जीतना क्या है और हारना क्या है'
'अगर पलक पे है मोती तो ये नहीं है काफी
हुनर भी चाहिए अल्फाज में पिरोने का'
'बहाना ढूंढते रहते हैं कोई रोने का
हमें ये शौक है क्या आस्तीन भिगोने का'
'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
जैसे शायर का ख्वाब, जैसे मंदिर में हो कोई जलता दीया'
'नेकी इक दिन काम आती है हमको क्या समझते हो
हमने बे-बेस मरते देखे कैसे प्यारे-प्यारे लोग'
'जो बात कहते डरते हैं
सब तू वह बात लिख
इतनी अंधेरी पहले कभी थी न रात, लिख'