Life-affirming Films (PC: Film Tamasha)
Life-affirming Films (PC: Film Tamasha)
कई बार जिंदगी हमें सालों में भी वह बात नहीं सिखा पाती, जो ढाई घंटे की एक अच्छी फिल्म सिखा देती है. लेकिन इसके लिए फिल्म को सिर्फ देखना काफी नहीं होता, उसे समझना भी पड़ता है. अक्सर हम किसी फिल्म को देखते हुए खुद को एक पीड़ित इंसान (Victim) मान लेते हैं. हमें लगता है कि कहानी में जो गलत हुआ, वैसा ही हमारे साथ भी हुआ है. यहीं हम सीखने का मौका खो देते हैं.
अगर अगली बार कोई फिल्म देखें, तो खुद को उसका शिकार नहीं, बल्कि एक यात्री मानकर देखिए. हर किरदार की जगह खुद को रखिए. यह समझने की कोशिश कीजिए कि उसने वह फैसला क्यों लिया, उसकी मजबूरी क्या थी और अगर आप उसकी जगह होते, तो क्या करते. जब आप ऐसा करते हैं, तो फिल्म सिर्फ कहानी नहीं रहती, बल्कि जिंदगी का आईना बन जाती है. तब समझ आता है कि हर मुश्किल का जवाब लड़ाई नहीं होता, कई बार हालात को लेकर अपना नजरिया बदलना भी जरूरी होता है.
1. Tamasha: खुद को ढूंढना सबसे बड़ी जीत है
हम में से बहुत से लोग ऐसे हैं, जो पढ़ाई, नौकरी और जिम्मेदारियों के बीच कहीं अपना असली सपना भूल चुके हैं. बाहर से सब ठीक दिखता है, लेकिन अंदर हमेशा लगता है कि कुछ छूट गया है. तमाशा इसी खालीपन की कहानी है.
फिल्म में एक सीन आता है, जब वेद आखिरकार यह समझ जाता है कि वह अब खुद में बचा ही नहीं है, बल्कि दूसरों की बनाई जिंदगी जी रहा था, अपनी नहीं. यही इस फिल्म का सबसे बड़ा संदेश है. अगर आपको यह नहीं पता कि आपको सच में खुशी किस चीज से मिलती है, तो सबसे पहले खुद को जानिए. दुनिया की भीड़ में शामिल होने से पहले यह तय कीजिए कि आप जीवन में करना क्या चाहते हैं, आपका उद्देश्य क्या था. कहीं आप भटक तो नहीं रहे. क्योंकि जो इंसान खुद को खो देता है, वह कोई भी मंजिल पा ले, भीतर से अधूरा ही रहता है.
2. English Vinglish: सम्मान हमेशा खुद से शुरू होता है
इस फिल्म की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यह किसी को हराने की नहीं, खुद को पाने की कहानी है. शशि अंग्रेजी नहीं जानती, इसलिए लोग उसे कम समझते हैं. लेकिन वह किसी से लड़ती नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाती है.
फिल्म का एक थीम है जो आज भी दिल को छू जाता है, 'जब इंसान खुद की इज्जत करना सीख जाता है, तब दुनिया भी उसकी इज्जत करने लगती है.' यही पूरी फिल्म का सार है. सीखने की कोई उम्र नहीं होती. अगर कभी लगे कि आपकी पहचान सिर्फ दूसरों से जुड़ी हुई है, तो वहीं से खुद के लिए कुछ नया शुरू कर दीजिए.
3. Zindagi Na Milegi Dobara: पछतावे से बेहतर है पूरी कोशिश करना
हम अकसर भविष्य की चिंता में आज को जीना भूल जाते हैं. यही गलती अर्जुन भी करता है. उसके लिए काम ही सब कुछ होता है, लेकिन स्पेन की यात्रा उसे सिखाती है कि जिंदगी सिर्फ कमाने के लिए नहीं मिली. फिल्म यह नहीं कहती कि सब छोड़कर घूमने निकल जाइए. इसका असली संदेश यह है कि जिंदगी खत्म होने के बाद सबसे ज्यादा दुख उन कामों का होता है, जिन्हें हमने कभी करने की कोशिश ही नहीं की. इसलिए परफेक्ट बनने की बजाय अपना बेस्ट दीजिए. अगर कोशिश ईमानदारी से की है, तो पछतावे की गुंजाइश भी कम रह जाती है.
4. The Pursuit of Happyness: हालात नहीं, हिम्मत इंसान की पहचान बनाती है
जब लगातार असफलताएं मिलती हैं, तब सबसे पहले इंसान का भरोसा टूटता है. इस फिल्म का नायक भी गरीबी, बेघर होने और जिम्मेदारियों से जूझता है, लेकिन एक चीज नहीं छोड़ता, वह है उसकी उम्मीद. जो उसकी सबसे बड़ी ताकत बनती है. फिल्म बार-बार याद दिलाती है कि जिंदगी में मुश्किलें आना सामान्य है, लेकिन हार मान लेना जीवन में ऑप्शन नहीं होना चाहिए. कई बार मंजिल बस एक कोशिश दूर होती है. इसलिए , जब लगे कि अब कुछ नहीं बचा, तब खुद से कहिए एक बार और कोशिश करता हूं. लेकिन हां कोशिश वहां करें जहां कुछ मिलने की उम्मीद हो.
5. Queen: जब खुद को अपनाते हैं, तभी जिंदगी बदलती है
किसी का साथ छूट जाना जिंदगी का अंत नहीं होता. खुद की खुशी के लिए उसे त्यागना हो जो आपको आपसे छिन रहा तो त्याग दो. रानी की शादी टूटती है, लेकिन वह अपने टूटे हुए सपनों के साथ घर में बैठने या उस इंसान के पीछे भागने की बजाय अकेले सफर पर निकलती है. वही सफर उसे खुद से मिलवाता है.
यकीन मानिए, जब आप अकेले सफर पर निकलते हैं, तो खुद को खुद के साथ पाते हैं. जहां अपने आप को समझने का मौका मिलता है. कभी कुछ समझ नहीं आए तो थोड़ा वक्त खुद के साथ बिताएं. कुछ ही दिनों में आप खुद को खुश पाएंगे. जिंदगी में सबसे जरूरी रिश्ता आपका खुद के साथ होता है. जब आप खुद को स्वीकार करना सीख लेते हैं, तब दूसरों की राय आपको तोड़ नहीं पाती. आत्मविश्वास बाहर से नहीं मिलता, वह भीतर से पैदा होता है.
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