Film Director Reema Das
Film Director Reema Das
असम में विधानसभा चुनाव के माहौल के बीच 'पंचायत आजतक असम' कार्यक्रम के मंच पर फिल्म निर्माता रीमा दास ने शिरकत की. इस दौरान रीमा दास ने कहा कि गांव छोटा, दिल बड़ा, वही हैं हम लोग. उन्होंने कहा कि असल में शहर के बारे में कुछ समझ में नहीं आता है. हमें लगता है कि बड़ी-बड़ी बिल्डिंग में हम रहते हैं, बड़ी-बड़ी गाड़ी में घूमते हैं. लेकिन शहर में उतरते हैं तो वही लोग हैं, जो भारत को भारत बनाते हैं, ज्यादातर लोग तो गांव से ही आते हैं.
रीमा दास को बचपन में क्या पसंद था?
उन्होंने कहा कि कुछ लोग पागल होते हैं, जो सपने देखते हैं. मैं भी उनमें से एक हूं. जो सपने देखते हैं, उसके लिए काफी संघर्ष भी करना पड़ता है और हमने भी किया है. उन्होंने कहा कि मैं ऐसे गांव से आती हूं, जहां फिल्में देखा जाता था, लेकिन फिल्म बनाने की कोई वजह नहीं थी. फिल्म बनाने का हमने कभी नहीं सोचा था. उन्होंने कहा कि शुरू से हमें डांस करना पसंद था, एक्टिंग करना पसंद था. खेल-कूदना और नदी में नहाना पसंद था. उन्होंने बताया कि उनके पिता टीचर थे. अब वो नहीं हैं. लेकिन उनका सपना था कि मैं कुछ करूं.
क्या आप नेपाल से हो? जब पूछा गया तो रीमा ने क्या किया?
रीमा दास ने बताया कि जब मैं मुंबई पहुंची और मैं ऑडिशन देने गई तो मुझे पूछा गया कि क्या आप नेपाल से हो? या आप चाइना से हो? उन्होंने कहा कि वो जो मेरी शुरुआत हुई, उसके बाद तो मैं एक्टिंग भूल ही गई. शुरू से मेरी हिंदी बहुत खराब थी. अब तो मैं थोड़ा बहुत बोल लेती हूं.
उन्होंने कहा कि फिल्मों से जुड़ा हर शख्स टैलेंटेड होता है. ऐसा नहीं है कि जो एक्टिंग करते हैं, वही टैलेंटेड होते हैं. वो लोग बहुत ज्यादा टैलेंटेड होते हैं.
विलेज रॉकस्टार्स की शुरुआत कैसे हुई?
रीमा दास ने बताया कि मेरे पास फिल्म इंस्टीट्यूट जाने का समय नहीं था. मेरे पास कोई टेक्निकल नॉलेज नहीं था. मैं कोई भी फिल्म देखती थी तो बारीकी से देखती थी. उसके बाद मैं कैमरा लेकर गांव चली आई. मैंने गांव में छोटे-छोटे बच्चों को देखा, जो थर्मोकोल का गिटार लेकर बड़े मजे करते थे. मैंने देखा कि ये लोग रियल इंस्ट्रूमेंट खरीद नहीं सकते हैं. लेकिन इनका जज्बा देखिए. वे लोग लाइफ को सेलिब्रेट कर रहे हैं और दुखी होकर बैठी हुई. इसके बाद मैंने उनको देखकर फिल्म 'विलेज रॉकस्टार्स' की शुरुआत की.
रीमा दास ने कहा कि विलेज रॉकस्टार्स के लिए मैंने 3 साल तक काम किया. उन्होंने कहा कि नॉन-एक्टर्स के साथ काम ज्यादा आसान था.
किन चुनौतियों का करना पड़ा सामना?
रीमा दास ने बताया कि कई चुनौतियां का सामना किया. लेकिन कभी-कभी मजबूरी रहती है. जब मैंने देखा तो एक पेंटिंग की तरह देखा. मुझे पता था कि मैं इतनी बड़ी टीम जुगाड़ नहीं कर सकती हूं. उन्होंने कहा कि मैं करती गई. बहुत चुनौतियां थी. मेरे पास कोई क्रू नहीं था. मैं शूटिंग के लिए सूरज पर पूरी तरह डिपेंड थी. मुझे सुबह शूट करना होता था या दोपहर के बाद शूट करती थी. कई बार 10 दिन तक इंतजार करना पड़ा. स्टॉर्म आने पर भाग-भागकर जाना पड़ता था.
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