Chalrey Chalrey Waal Goes Viral
Chalrey Chalrey Waal Goes Viral
इंस्टाग्राम खोला और 'छलरे छलरे वाल' गाने पर बनी कोई रील आपके सामने न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. इन दिनों यह गाना Instagram पर इतना वायरल है कि इसकी धुन और गाने के बोल लोगों की जुबान पर चढ़ गए हैं. सोशल मीडिया पर लोग मजाक में कह रहे हैं- गलत समय पर सही ट्रेंड आ गया...दिलचस्प बात ये है कि जिस गाने पर आज की जेनरेशन रील बना रही है, वह कोई नया रिलीज नहीं बल्कि सालों पुराना सराइकी लोकगीत है. सुनंदा शर्मा की रील के बाद एक बार फिर इस गाने की चर्चा तेज हुई और देखते ही देखते पुरानी लोकधुन सोशल मीडिया के नए ट्रेंड में बदल गई.
'छलरे छलरे वाल' का मतलब क्या है?
गाने के नाम में ही इसकी खासियत छिपी है. सराइकी भाषा में 'वाल' का मतलब बाल होता है और 'छलरे वाल' का इस्तेमाल घुंघराले या लहराते बालों के लिए किया गया है. गाने में प्रेमी अपनी प्रेमिका की खूबसूरती की तारीफ करता है. उसके लंबे बाल, काली शॉल और हाथ में लाल रूमाल के जरिए उसकी खूबसूरती का बखान किया गया है.
गाने की लाइनें क्यों लोगों को पसंद आ रही हैं?
गाने में प्रेमी अपनी प्रेमिका की खूबसूरती की तुलना खुशबूदार कस्तूरी फूल से करता है. वह कहता है कि उसकी खूबसूरती की चर्चा हर जगह हो रही है और लोग उसकी मिसाल देते हैं. इसकी चर्चित पंक्ति 'छलरे छलरे वाल, मुंड्ढे रखदे काली शाल' में उसके लहराते बालों और कंधे पर रखी काली शॉल का जिक्र आता है.
सुनंदा शर्मा की रील के बाद फिर चर्चा में आया
यह गाना नया नहीं है. लेकिन सोशल मीडिया ने इसे नई ऑडियंस दे दी है. पंजाबी सिंगर सुनंदा शर्मा की रील में इस गाने की झलक सामने आने के बाद लोगों ने इसे खूब पसंद किया. जिन लोगों ने पहली बार यह ऑडियो सुना, उन्होंने इसका ओरिजिनल वर्जन इंटरनेट पर खोजना शुरू किया. इसके बाद गाने के कई नए और लो-फाई वर्जन सामने आए. देखते ही देखते यह Instagram पर इस्तेमाल होने वाले लोकप्रिय ऑडियो में शामिल हो गया.
2013 से इंटरनेट पर मौजूद है ओरिजिनल वर्जन
'छलरे छलरे वाल' का क्लासिक वर्जन इंटरनेट पर काफी समय से मौजूद है. YouTube पर इसका वर्जन 2013 से देखा जा सकता है. इसे सराइकी लोकगायक मुहम्मद हुसैन बंदियालवी से जोड़ा जाता है. बाद में सराइकी लोकसंगीत के मशहूर नाम शफाउल्लाह खान रोखड़ी और उनके बेटे जीशान खान रोखड़ी ने भी इसे अपने अंदाज में पेश किया.
सराइकी भाषा में है पूरा गाना
'छलरे छलरे वाल' के बोल सराइकी भाषा में हैं. सराइकी पाकिस्तान के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में बोली जाने वाली भाषा है और इसके शब्दों में पंजाबी तथा सिंधी से भी समानता देखने को मिलती है. लोकगीत होने की वजह से इसमें आम बोलचाल के शब्दों के साथ प्रेम, खूबसूरती और पहनावे से जुड़े पारंपरिक बिंब हैं. यही देसीपन आज के लो-फाई म्यूजिक के साथ मिलकर इसे युवाओं के बीच आकर्षक बना रहा है.
'ना कजरे की धार' से भी क्यों जोड़ रहे लोग?
इस गाने की धुन को सुनने के बाद कुछ लोगों को 1994 की फिल्म 'मोहरा' के फेमस गाने 'ना कजरे की धार' की याद आती है. दोनों की धुन में समानता महसूस होने की वजह से सोशल मीडिया पर इनके बीच तुलना भी हो रही है.