Drishyam 3
Drishyam 3
'दृश्यम' फ्रेंचाइजी के फैंस पिछले चार साल से विजय सलगांवकर की कहानी के आखिरी पड़ाव का इंतजार कर रहे थे. दो फिल्मों में पुलिस से आगे निकल चुके विजय की कहानी अब 'Drishyam: The Conclusion' में खत्म होने का दावा करती है. फिल्म में नए सबूत, नए पुलिस अफसर और कई ट्विस्ट हैं. अजय देवगन एक बार फिर विजय के किरदार में दमदार नजर आते हैं. फिल्म एंटरटेन करती है, लेकिन जिस जबरदस्त और यादगार क्लाइमैक्स की उम्मीद थी, वह पूरी तरह सामने नहीं आ पाता.
6 महीने बाद फिर खुला पुराना केस
फिल्म की कहानी 'दृश्यम 2' की घटनाओं के करीब छह महीने बाद शुरू होती है. विजय सलगांवकर और उसका परिवार पुरानी जिंदगी में लौटने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पुलिस केस का डर अभी भी उनके साथ है.
इसी बीच जयदीप अहलावत की एंट्री होती है. वह पुलिस अधिकारी राजवीर सिंह तोमर का किरदार निभा रहे हैं. उसे पुराने केस की दोबारा जांच की जिम्मेदारी मिलती है. नए सबूत सामने आते हैं और विजय का परिवार एक बार फिर पुलिस की नजर में आ जाता है. इसके बाद शुरू होता है करीब ढाई घंटे का वही पुराना खेल, पुलिस विजय को पकड़ने की कोशिश करती है और विजय हर बार उससे एक कदम आगे निकलने की कोशिश करता है.
विजय की 10 कहानियां और वही पुराना भरोसा
फिल्म में एक मजेदार डायलॉग है, जिसमें विजय की तुलना रावण से की जाती है. कहा जाता है कि रावण के दस सिर थे और विजय के पास दस कहानियां हैं. इन सभी कहानियों में एक बात समान है-हीरो कभी जेल नहीं जाता. यही 'दृश्यम' की सबसे खास बात है. दर्शक जानते हैं कि विजय और उसके परिवार ने अपराध किया है और जांच को भटकाने के लिए झूठ बोले हैं. इसके बावजूद जब विजय पुलिस को चकमा देता है तो दर्शक उसके लिए तालियां बजाने लगते हैं.
कहानी में कॉमेडी का तड़का भी
फिल्म में गायतोंडे का किरदार निभा रहे कमलेश सावंत का एक सीन खासा मजेदार है. वह बताते हैं कि उनके बच्चे भी अब 2 अक्टूबर को लेकर मीम भेजते हैं. विजय का पुलिस को चकमा देना अब सिर्फ केस नहीं, बल्कि लोगों के बीच मजाक का हिस्सा बन चुका है. फिल्म में सौरभ शुक्ला का किरदार भी कहानी को हल्का-फुल्का बनाता है. वहीं प्रकाश राज वकील शेट्टी के रोल में नजर आते हैं. उनके कई वन-लाइनर्स हंसाते हैं.
कोर्टरूम से थी सबसे ज्यादा उम्मीद
फिल्म का सबसे अहम हिस्सा कोर्टरूम होना चाहिए था, लेकिन यहीं फिल्म थोड़ी कमजोर पड़ती है. सबूत लगातार बदलते हैं, नए खुलासे होते हैं और विजय के सामने मुश्किलें बढ़ती हैं. इसके बावजूद कोर्टरूम के सीन में वह रोमांच नहीं बन पाता जिसकी उम्मीद इस फ्रेंचाइजी से थी. कई जगह डायलॉग ज्यादा लंबे लगते हैं. ऐसा महसूस होता है कि फिल्म अपनी चालाकी को साबित करने में कुछ ज्यादा समय लगा रही है.
फिल्म को समझने के लिए पिछली दोनों फिल्मों की जानकारी होना काफी मददगार रहेगा. पुराने किरदारों और घटनाओं को जानने वाले दर्शक कहानी से ज्यादा आसानी से जुड़ पाएंगे.
अजय देवगन फिर बने विजय
अजय देवगन फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं. विजय सलगांवकर के किरदार को निभाते हुए उन्हें 11 साल हो चुके हैं और अब यह किरदार उनकी पहचान बन चुका है. उनकी आंखों का तनाव, चेहरे की गंभीरता और मुश्किल हालात में भी शांत रहने का अंदाज शानदार है. श्रीया सरन को भी कुछ अच्छे इमोशनल सीन मिले हैं. तब्बू और रजत कपूर अपने पुराने किरदारों में लौटते हैं, लेकिन उनके हिस्से में ज्यादा कुछ नहीं है. जयदीप अहलावत नए पुलिस अफसर के रूप में प्रभावित करते हैं. वहीं प्रकाश राज का अंदाज फिल्म में अलग ऊर्जा लेकर आता है.
क्लाइमैक्स में रह गई कमी
फिल्म में ट्विस्ट और सस्पेंस की कमी नहीं है. कई जगह कहानी आपको सोचने पर मजबूर करती है कि अब विजय इस मुश्किल से कैसे निकलेगा. लेकिन अंत तक पहुंचते-पहुंचते फिल्म उस स्तर का धमाका नहीं कर पाती, जिसकी उम्मीद एक फाइनल चैप्टर से थी.