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Mahakumbh Viral Girl Monalisa: 18 नहीं 16 साल की है महाकुंभ की 'वायरल गर्ल' मोनालिसा, पति फरमान जाएगा जेल, पॉस्को एक्ट के तहत FIR दर्ज

महाकुंभ से वायरल हुई मोनालिसा भोंसले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. वह नाबालिग निकली हैं. मोनालिसा से शादी करने वाले फरमान खान के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज कराई गई है. अब फरमान को जेल जाना पड़ेगा. 

Mahakumbh Viral Girl Monalisa Under Age Marriage Controversy (photo social media) Mahakumbh Viral Girl Monalisa Under Age Marriage Controversy (photo social media)

मध्य प्रदेश के खरगोन में पिछले दो माह से सुर्खियों में और विवादों में रही महाकुंभ की वायरल गर्ल मोनालिसा भोंसले को लेकर फिर एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. दरअसल, मोनालिसा के बालिग होने के दावे फेल हो चुके हैं. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच के बाद एक चौंकाने वाला मोड़ आया है. महेश्वर की रहने वाली मोनालिसा नाबालिग हैं. उनकी उम्र 18 साल नहीं बल्कि 16 वर्ष है. मोनालिसा से शादी करने वाले फरमान खान के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज कराई गई है. अब फरमान को जेल जाना पड़ेगा. मोनालिसा मामले में अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के नेतृत्व में, आयोग की सक्रियता और पूर्व न्यायाधीश और आयोग सलाहकार प्रकाश उइके के मार्गदर्शन में अधिवक्ता प्रथम दुबे द्वारा की गई कानूनी पैरवी से ये साबित हुआ कि जिस युवती मोनालिसा को बालिग बताकर विवाह कराया गया था, वो वास्तव में पारधी जनजाति समुदाय की एक नाबालिग लड़की है. अधिवक्ता प्रथम दुबे ने इस संवेदनशील मामले को आयोग के समक्ष 17 मार्च 2026 को उठाया था. 

राजनीतिक और PFI कनेक्शन
अधिवक्ता प्रथम दुबे ने आयोग को अवगत कराया कि इस विवाह में केरल के CPI-M नेताओं की सक्रिय भागीदारी और PFI जैसे संगठनों की संलिप्तता एक गंभीर चिंता का विषय है. शिकायत में स्पष्ट किया गया कि ये विवाह केवल एक निजी मामला नहीं, बल्कि 'लव जिहाद' के अस्तित्व को नकारने के लिए वैश्विक स्तर पर एक फॉल्स नैरेटिव सेट करने की रणनीतिक कोशिश थी.

महेश्वर के सरकारी रिकार्ड में नाबालिग मोनालिसा
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के निर्देश पर गठित जांच दल ने केरल से लेकर मध्य प्रदेश के गांवों तक गहन छानबीन की और मात्र 72 घंटे में केरल से लेकर मध्य प्रदेश के महेश्वर तक सारे तार जोड़ कर सच को उजागर कर दिया. सलाहकार प्रकाश ऊईके एवं निदेशक पी. कल्याण रेड़ी  की जांच महेश्वर के सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में मोनालिसा नाबालिग निकली.

महेश्वर नगरपरिषद में गलत जन्मतिथि दर्ज
जांच की शुरुआत केरल के नयनार देवा मंदिर से शुरू किया गया. मंदिर प्रशासन ने जांच में बताया कि मोनालिसा और फरमान की शादी आधार में उल्लेखित आयु के आधार पर की गई है. केरल के पुअर गांव के ग्राम पंचायत कार्यालय में इस शादी का पंजीकरण किया गया है. इसमें मोनालिसा के गलत जन्म प्रमाण पत्र को आधार बनाया गया है. जांच दल ने पाया कि ये गलत जन्म प्रमाण पत्र नगरपालिका महेश्वर से जारी किया गया है. उसके बाद जांचदल ने तत्काल मध्य प्रदेश महेश्वर के सरकारी मेडिकल अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की और पाया कि मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को शाम 5:50 हुआ था. इसके आधार पर वह केरल में संपन्न विवाह 11 मार्च 2026 को मात्र 16 वर्ष 2 माह और 12 दिन की थी. 

साथ ही जांच टीम ने पूर्व में स्थानीय नगर पालिका महेश्वर द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र जो गलत जन्म तिथि के आधार पर जारी किया गया है, जिसमें मोनालिसा की जन्म तिथि 1/1/2008 लिखाई गई थी. उसे निरस्त करवाने में भी कानूनी प्रावधानों का अध्ययन कर स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया. जन्म प्रमाण पत्र के इस दस्तावेजी प्रमाण ने विवाह के पक्षकारों की साजिश को बेनकाब कर दिया. मोनालिसा के माता-पिता द्वारा उनके रक्त संबंधियों के जाति प्रमाण पत्र भी आयोग को उपलब्ध कराए गए, जिससे यह बात भी साबित हो गई की मोनालिसा के माता-पिता अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्य हैं. मध्य प्रदेश के थाना महेश्वर में पॉक्सो बीएनएस और एट्रोसिटी एक्ट के अंतर्गत एफआईआर दर्ज. इस सनसनीखेज खुलासे के बाद आयोग की अनुसंशा पर प्रशासन हरकत में आ गया है. आरोपी फरमान के खिलाफ पुलिस ने गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. 

जांच और कार्रवाई पर आयोग की रहेगी नजर
इस खुलासे के बाद आयोग अब दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है. आयोग ने 22 अप्रैल 2026 को केरल एवं मध्य प्रदेश के डीजीपी को आयोग मुख्यालय नई दिल्ली तलब किया है. नाबालिग के विवाह और इसमें शामिल राजनीतिक व कट्टरपंथी संगठनों की भूमिका की विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जा रही है. पारधी जनजाति की इस नाबालिग बेटी के साथ हुए अन्याय ने केरल पुलिस और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं. आयोग ने स्पष्ट किया है कि वो दोषियों को सजा मिलने तक इस कार्रवाई पर पैनी नजर बनाए रखेगा एवं हर तीन दिन में मध्य प्रदेश और केरल के डीजीपी से उपरोक्त केस की प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी है.

(उमेश रेवलिया की रिपोर्ट)