Broadh Anavil Society Garba Festival
Broadh Anavil Society Garba Festival
गुजरात में नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना और गरबा नृत्य के लिए विशेष पहचान रखता है. नवसारी में बृहद अनाविल समाज की ओर से आयोजित नवरात्रि महोत्सव केवल धार्मिक आस्था और पारंपरिक गरबा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सेवा और मानवता का भी एक अनूठा उदाहरण बन गया है. पिछले 11 वर्षों से आयोजित हो रहे इस महोत्सव में जहां पारंपरिक परिधानों और लोक संस्कृति की खूबसूरत झलक देखने को मिलती है, वहीं आयोजन से प्राप्त राशि जरूरतमंद लोगों के जीवन में बदलाव लाने का माध्यम भी बनती है. नवरात्रि के दौरान नवसारी में बृहद अनाविल समाज के गरबा आयोजन में पारंपरिक संस्कृति का रंग देखने को मिलता है. पारंपरिक परिधानों में सजे महिला-पुरुष, पारंपरिक गरबा नृत्य की लय और मां अंबे की आराधना होती हैं. आधुनिकता के दौर में भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर रखने का यह प्रयास नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का काम करता है.
गरबा केवल मनोरंजन या धार्मिक उत्सव का माध्यम नहीं
इस महोत्सव की सबसे खास बात यह है कि यहां गरबा केवल मनोरंजन या धार्मिक उत्सव का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा से जुड़ी एक पहल भी है. पिछले 11 वर्षों से बृहद अनाविल समाज द्वारा आयोजित इस महोत्सव से प्राप्त राशि का उपयोग जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए किया जाता है. समाज ने उत्सव की खुशियों को सेवा के साथ जोड़कर एक ऐसी परंपरा विकसित की है, जिसमें सामूहिक भागीदारी के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों की मदद करने का प्रयास किया जाता है. इस आयोजन से प्राप्त राशि के माध्यम से सभी समाज के लिए विधवाओं को सहायता, जरूरतमंद विद्यार्थियों की शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों में सहयोग दिया जाता है. कई बार आर्थिक कठिनाइयों के कारण जरूरतमंद परिवार शिक्षा और उपचार जैसी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ होते हैं. ऐसे में समाज की ओर से मिलने वाली सहायता उनके लिए संबल बन सकती है. यह पहल बताती है कि त्योहारों के आयोजन को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़कर जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है.
... तो त्योहारों की वास्तविक खुशी तभी होती है सार्थक
बृहद अनाविल समाज गरबा के आयोजक डॉ. अंकित देसाई और गरबा खिलाड़ी अश्मी देसाई ने बताया कि नवसारी में बृहद अनाविल समाज का यह 11 वर्षों से चला आ रहा प्रयास एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि त्योहारों की वास्तविक खुशी तभी सार्थक होती है, जब उसका लाभ समाज के जरूरतमंद लोगों तक भी पहुंचे. परंपरा के संरक्षण के साथ विधवा सहायता, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग की यह पहल नवरात्रि के उत्सव को सेवा, सहयोग और मानवता के रंगों से और भी खास बना रही है.