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48 घंटे में ही Zee5 से हटाई गई 'सतलुज, जानिए क्यों विवादों में है दिलजीत दोसांझ की यह फिल्म, क्या है पूरा मामला?

3 जुलाई को फिल्म Zee5 पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध हुई थी. लेकिन 5 जुलाई को प्लेटफॉर्म ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि फिल्म को भारतीय कैटलॉग से हटा दिया गया है.

Can we ban a film on OTT where no CBFC certification is required? Can we ban a film on OTT where no CBFC certification is required?

दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म 'सतलुज' एक बार फिर विवादों में आ गई है. 3 जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म Zee5 पर रिलीज हुई यह फिल्म महज 48 घंटे के भीतर भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दी गई. हालांकि, फिल्म अभी भी ZEE5 Global पर विदेशों में उपलब्ध है. यह फिल्म रिलीज से पहले भी कई साल तक सेंसर बोर्ड, नाम बदलने और रिलीज में देरी जैसे विवादों का सामना कर चुकी है.

आखिर 'सतलुज' की कहानी क्या है?
फिल्म 'सतलुज' मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन से प्रेरित है. खालड़ा ने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में कथित तौर पर लावारिस बताकर किए गए हजारों अंतिम संस्कारों की जांच की थी. उनकी जांच ने देशभर का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचा. बाद में 1995 में उनका अपहरण कर लिया गया और उनकी हत्या कर दी गई. इस मामले में 2005 में पंजाब पुलिस के चार कर्मियों को दोषी ठहराया गया था. बाद में उनकी सजा बढ़ाकर उम्रकैद कर दी गई.

रिलीज के 48 घंटे बाद भारत से क्यों हटाई गई फिल्म?
3 जुलाई को फिल्म Zee5 पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध हुई थी. लेकिन 5 जुलाई को प्लेटफॉर्म ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि फिल्म को भारतीय कैटलॉग से हटा दिया गया है. हालांकि, इसे हटाने का कारण नहीं बताया गया. वहीं, फिल्म अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए ZEE5 Global पर उपलब्ध है.

Diljit Dosanjh Satluj

रिलीज से पहले भी कई साल तक विवादों में रही फिल्म
यह फिल्म शुरुआत से ही विवादों में रही है. पहले इसे सिनेमाघरों में रिलीज किया जाना था, लेकिन सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से सर्टिफिकेट मिलने में लंबा समय लगा. सेंसर बोर्ड ने फिल्म में 127 बदलाव (कट्स) सुझाए थे. इन बदलावों के कारण फिल्म की रिलीज कई बार टलती रही और आखिरकार थिएटर रिलीज ही नहीं हो सकी.

तीन बार बदला गया फिल्म का नाम
शुरुआत में इसका नाम 'घल्लूघारा' रखा गया था. बाद में CBFC के निर्देश के बाद इसे 'Punjab '95' कर दिया गया. आखिरकार डिजिटल रिलीज से पहले इसका नाम बदलकर सतलुज रखा गया. निर्देशक हनी त्रेहन ने बताया कि उन्हें पहले वाला टाइटल इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं मिली, इसलिए नया नाम रखना पड़ा.

दिलजीत दोसांझ ने पहले ही जता दी थी आशंका
फिल्म हटाए जाने से पहले दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम लाइव के दौरान कहा था कि उन्हें लगता है कि फिल्म ज्यादा दिन तक भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी. उन्होंने फैंस से कहा था कि जब तक फिल्म उपलब्ध है, तब तक इसे डाउनलोड कर लें. उनका यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है क्योंकि कुछ ही समय बाद फिल्म भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दी गई.

निर्देशक और दिलजीत ने क्या कहा?
निर्देशक हनी त्रेहन ने फिल्म की रिलीज पर कहा था कि उनकी कोशिश शुरू से इस कहानी को ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ दर्शकों तक पहुंचाने की रही है. उनके मुताबिक, यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में इंसानी हिम्मत और संघर्ष को समर्पित फिल्म है.

वहीं, दिलजीत दोसांझ ने कहा था कि जसवंत सिंह खालड़ा के बलिदान और मानवता के लिए उनके योगदान ने उन्हें इस फिल्म का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया. उनके अनुसार, यह उनके करियर की सबसे अर्थपूर्ण फिल्मों में से एक है.