AvirajTiwari
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आजकल AI का जमाना है. सवाल पूछो और तुरंत जवाब मिल जाता है. इंसान ने AI को बनाया है और इसीलिए इंसानी दिमाग की अहमियत है. भारत में तो इस फील्ड में बड़े ही नहीं, छोटे-छोटे बच्चे भी कमाल कर रहे हैं. अब मध्य प्रदेश के रीवा के अविराज अभी 3 साल के भी नहीं हुए. मगर इनका दिमाग कंप्यूटर से भी तेज है. इसे कई देशों के नाम और उनकी राजधानी याद है. इंग्लिश के कठिन शब्द आसानी से बोल लेते हैं. जानवरों और पक्षियों के नाम इसकी जुबान पर रहते हैं. धर्म, अध्यात्म का भी काफी अच्छा नॉलेज है. इनको लोग रीवा का 'गूगल बॉय' कहते हैं.
रीवा के गूगल ब्वॉय-
अविराज तिवारी महज 2 साल 11 महीने के हैं. इनको रीवा का गूगल ब्वॉय कहा जाता है. इतनी छोटी उम्र में इन्होंने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. अभिराज ने इंग्लिश डिक्शनरी के 5 सबसे कठिन और लंबे शब्द सिर्फ 16 सेकंड में बोलकर लंदन के वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करा लिया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती, अविराज की मेमोरी और नॉलेज किसी अजूबे से कम नहीं है. अविराज का दिमाग गजब का चलता है. शब्द को सुनते ही दिमाग में फीड हो जाता है.
कठिन शब्द सीखने का शौक- मां
माँ आकांक्षा तिवारी बताती हैं कि शुरुआत में आम बच्चों की तरह ही बोलचाल के शब्द सिखाती थी. तब वह टूटे फूटे शब्द ही बोल पाते थे. खेल-खेल में उन्होंने कठिन और ज्ञानवर्धक शब्द सीखने शुरू किए. जब वह अविराज से बात करती तो वह नई चीजें सिखाती थी. उन्हें यह पता ही नहीं चला कि अविराज का तेज दिमाग आसानी से शब्दों को याद कर लेता है. अभिराज बचपन से ही बहुत जल्दी सीखता है.
36 देशों के झंडे, 42 देशों की राजधानी याद-
आकांक्षा तिवारी का कहना है कि हमने कभी सोचा नहीं था कि ये इतना बड़ा रिकॉर्ड बना देगा. अविराज को 1150+ डेटा पॉइंट्स की एडवांस मेमोरी की जानकारी है. 79 जानवर, 52 पक्षियों का पहचान और नाम, 42 देशों की राजधानी, 28 भारतीय राज्यों की राजधानी, 36 देशों के झंडों की पहचान, 8 ग्रह, सोलर सिस्टम Q&A, 12 ज्योतिर्लिंग, 13 देवी-देवताओं के वाहन, 25 राष्ट्रीय प्रतीक सब याद हैं.
गायत्री मन्त्र पढ़ना हो या फिर शास्त्र, पुराण इस बच्चे सटीक जानकारी है. भगवान विष्णु के कितने अवतार है. और हनुमान जी ने कौन सा पर्वत उठाया था.
इस साल स्कूल में एडमिशन होगा-
अविराज का इस वर्ष स्कूल में एडमिशन होना है. लेकिन उससे पहले दुनिया भर में डंका बजा दिया है. अविराज की इस उपलब्धि पर पूरा परिवार खुश है. अविराज का ननिहाल रीवा में है. माता-पिता तेलंगाना में रहते हैं. जबकि अविराज के दादा-दादी छत्तीसगढ़ में रहते है. उनका कहना है कि ये हमारे लिए ही नहीं, पूरे रीवा और देश के लिए गर्व की बात है. रीवा के छोटे से गांव बकिया से उठी ये चमक, आज लंदन तक रोशनी फैला रही है. ये कहानी सिर्फ एक बच्चे की नहीं, बल्कि ये कहानी नए भारत के आत्मविश्वास की है.
(विजय विश्वकर्मा की रिपोर्ट)
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