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46 साल से पर्यावरण की सेवा, 1.1 लाख पौधे लगाए... ट्री-मैन के नाम से हैं फेमस

राजस्थान के खैरथल तिजारा में एक बुजुर्ग 46 साल से पौधों की सेवा कर रहे हैं. वो 8-10 किलोमीटर दूर से सिर पर पानी रखकर लाते हैं और पौधों में पानी देते हैं. अब तक वो 1.10 लाख पौधे लगा चुके हैं. कई इलाकों को हरा भरा कर चुके हैं. उनको ट्री मैन के नाम से जाना जात है.

Tree Man Surender Tree Man Surender

कहते हैं प्रकृति की सेवा सबसे बड़ी सेवा होती है. इसका जीता जागता उदाहरण राजस्थान के खैरथल तिजारा जिले में देखने को मिला. एक बुजुर्ग 46 साल से लगातार 8 से 10 किलोमीटर दूर से सिर पर पानी रख कर लाते हैं और अपने आसपास के क्षेत्र के पौधों में पानी देते हैं. अब तक बुजुर्ग एक लाख 10 हजार से ज्यादा पौधे को जीवन दे चुके हैं. इसलिए आसपास क्षेत्र के लोग उनको ट्रीमैन के नाम से जानते हैं.

खैरथल के ट्री मैन-
खैरथल जिले के पेहल गांव के सुरेंद्र सैन उर्फ बंटी क़ो लोग प्यार से 'ट्री-मैन' कहकर पुकारते हैं. पिछले 46 वर्षों से वे पर्यावरण संरक्षण की ऐसी मिसाल पेश कर रहे हैं, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है. उन्होंने सिर्फ पौधे नहीं लगाए, बल्कि उन्हें अपने बच्चों की तरह पालकर विशाल वृक्ष बनाया. उनका दावा है कि उन्होंने अब तक 1 लाख 10 हजार से अधिक पौधे लगाए हैं और यदि कोई देखना चाहे तो वे अपने लगाए अधिकांश पेड़ आज भी दिखा सकते हैं. 

8 साल की उम्र में लगाया था पहला पौधा-
सुरेंद्र बताते हैं कि बचपन में वे अपने गुरु संत घीसा दास जी महाराज के साथ रहते थे. वहीं से उन्हें प्रकृति प्रेम और पौधरोपण की प्रेरणा मिली. आठ साल की उम्र में लगाया गया पहला पौधा धीरे-धीरे जीवन का मिशन बन गया. समय बीतता गया, लेकिन पौधों के प्रति उनका समर्पण कम नहीं हुआ. आज भी वे रोजाना घंटों तक पौधों की देखभाल में जुटे रहते हैं.

1.1 लाख पौधे लगा चुके हैं सुरेंद्र-
सुरेंद्र ने बताया कि अधिकांश पौधे वो खुद अपने घर पर तैयार करते हैं. इसके बाद उन्हें कंधों पर उठाकर कई किलोमीटर दूर पहाड़ियों और चट्टानी इलाकों तक ले जाते हैं. राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में वे अब तक 1.10 लाख से अधिक पौधे लगा चुके हैं. हजारों पौधे आज विशाल वृक्ष बनकर लोगों को छाया, ऑक्सीजन और पर्यावरणीय सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं. गर्मियों में जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाता है, तब भी सुरेंद्र का अभियान जारी रहता है. वे कई बार 8 से 10 किलोमीटर दूर से अपने घर से पानी भरकर लाते हैं और दुर्गम पहाड़ियों पर चढ़कर पौधों को सींचते हैं. सुरेंद्र ने बताया कि वो ऊंची चट्टानों पर घंटों तक पौधों की देखभाल करते है. यही कारण है कि उनके लगाए पौधों की जीवित रहने की दर बेहद अधिक है.

कई इलाकों की बदली तस्वीर-
पेहल गांव और आसपास के जिन इलाकों में कभी केवल पत्थर, झाड़ियां और बंजर जमीन दिखाई देती थी, वहां आज हरियाली की चादर बिछी हुई नजर आती है. सुरेंद्र ने स्कूलों, अस्पतालों, पुलिस थानों, श्मशान घाटों, मंदिर परिसरों, सार्वजनिक पार्कों और सड़क किनारे हजारों पौधे लगाए हैं. उनके अथक प्रयासों ने कई बंजर इलाकों की तस्वीर बदल दी है. सुरेंद्र गांव-गांव जाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं. वे स्कूलों में बच्चों को पौधरोपण के लिए प्रेरित करते हैं और युवाओं को हरियाली अभियान से जोड़ रहे हैं. उनका कहना है कि यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में पांच पौधे लगाकर उनकी जिम्मेदारी ले ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है.

(हिमांशु शर्मा की रिपोर्ट)

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