Alwar news
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राजस्थान के वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. राजसमंद, उदयपुर और पाली जिलों में फैले कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से मंजूरी मिलने के बाद टाइगर रिजर्व का दर्जा मिल गया है. इसके साथ ही कुंभलगढ़ राजस्थान का छठा और देश का 59 वां टाइगर रिजर्व बन गया है. इस फैसले से प्रदेश में बाघों के संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी. साथ ही पर्यटन और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
कुंभलगढ़ बना राजस्थान का छठा टाइगर रिजर्व
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की तकनीकी समिति ने कुंभलगढ़ को टाइगर रिजर्व बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. हालांकि राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि हाल ही में हुई बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई थी. अब एनटीसीए की बैठक के आधिकारिक मिनिट्स आने के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी. इसके बाद भारत सरकार की ओर से औपचारिक घोषणा होने पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
रणथंभौर और सरिस्का से लाए जाएंगे बाघ
मंत्री ने बताया कि रणथंभौर और सरिस्का में लगातार बाघों की संख्या बढ़ रही है. ऐसे में भविष्य में वहां से कुछ बाघों को कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया जाएगा. इसके लिए बाघों के अनुकूल आवास विकसित किए जाएंगे. साथ ही शिकार बनने वाले वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने और संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को भी मजबूत किया जाएगा.
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य पहले से ही पैंथर, भालू, भेड़िया, चिंकारा और कई अन्य वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है. टाइगर रिजर्व बनने के बाद यहां इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नए सफारी रूट विकसित करने की योजना है. इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां तेजी से बढ़ेगी. वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि कुंभलगढ़ को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने से अरावली क्षेत्र में बाघों के संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी. साथ ही राजस्थान के वन्यजीव मानचित्र पर कुंभलगढ़ एक नई और महत्वपूर्ण पहचान बनाएगा.
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