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EPFO 2.0 लॉन्च: अब एक ही पोर्टल पर मिलेगा PF बैलेंस, क्लेम स्टेटस और सभी सेवाएं, करोड़ों कर्मचारियों को बड़ी राहत

EPFO के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF पर मिलने वाले ब्याज को नए ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए खातों में जमा किया जाना शुरू हो गया है. फिलहाल फील्ड वेरिफिकेशन का काम चल रहा है, जो अगले एक-दो दिनों में पूरा होने की उम्मीद है.

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देश के करोड़ों ईपीएफ खाताधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म EPFO 2.0 को लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है. इस नई व्यवस्था का मकसद सदस्यों को पहले से ज्यादा आसान, तेज और बेहतर सेवाएं देना है. ब्लैकआउट पीरियड खत्म होने के बाद इस सप्ताह से इसे पूरी तरह लागू किया जाएगा. नए सिस्टम के जरिए कई प्रक्रियाओं को ऑटोमेटेड बनाया गया है, जिससे दावों के निपटारे में तेजी आएगी और सदस्यों को अलग-अलग पोर्टल पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

अब देश के किसी भी EPFO ऑफिस से मिलेगा काम
अब तक EPFO का सिस्टम विकेंद्रीकृत था. यानी हर क्षेत्रीय कार्यालय अपने स्तर पर काम करता था और खाताधारकों को अपने संबंधित EPFO ऑफिस से ही ज्यादातर सेवाएं लेनी पड़ती थीं. लेकिन EPFO 2.0 के तहत पूरे सिस्टम को केंद्रीकृत कर दिया गया है. इसका मतलब है कि अब सदस्य का काम किसी भी EPFO कार्यालय से किया जा सकेगा. इससे सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज और सुविधाजनक होंगी.

एक ही पोर्टल पर मिलेंगी सभी जरूरी जानकारी
नए यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर लॉग इन करते ही सदस्य अपने PF खाते का बैलेंस, क्लेम स्टेटस और उपलब्ध सभी सेवाओं की जानकारी एक ही जगह देख सकेंगे. पहले इसके लिए अलग-अलग पोर्टल और प्रक्रियाओं का सहारा लेना पड़ता था. अब पूरी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलने से समय और मेहनत दोनों की बचत होगी.

EPF ब्याज जमा होने की प्रक्रिया भी हुई आसान
EPFO के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF पर मिलने वाले ब्याज को नए ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए खातों में जमा किया जाना शुरू हो गया है. फिलहाल फील्ड वेरिफिकेशन का काम चल रहा है, जो अगले एक-दो दिनों में पूरा होने की उम्मीद है. इसके बाद एक सप्ताह के भीतर 34 करोड़ से ज्यादा खातों में करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये का ब्याज जमा किया जाएगा. अगले साल से यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमेटेड हो जाएगी.

कम होंगे क्लेम रिजेक्ट होने के मामले
EPFO 2.0 में क्लेम रिजेक्ट होने की संभावना भी कम होगी. नए पोर्टल पर हर सेवा के लिए पात्रता की शर्तें पहले से साफ दिखाई देंगी. इससे सदस्य सही नियमों के अनुसार क्लेम दाखिल कर सकेंगे और दस्तावेजों या पात्रता से जुड़ी गलतियों के कारण होने वाली अनावश्यक अस्वीकृति में कमी आएगी. इससे क्लेम प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और आसान बनने की उम्मीद है.

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