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Sabarkantha News: 'ज्योतिग्राम योजना' से बदला गांव का रूप, बिजली से मिला रोजगार, तो अंधेरे में पढ़ने को बच्चे भी नहीं मजबूर

जिस गांव में दूर-दूर तक विकास का नाम नहीं था, वहां केवल एक योजना से लोगों को रोजगार मिला. तो वहीं बच्चों को पढ़ने के लिए बिजली, साथ ही अब खुले में लोग निकलते हुए भी सुरक्षित महसूस करते हैं.

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How Scheme Transformed Village How Scheme Transformed Village

गुजरात के साबरकांठा जिले के इडर तालुका के कावा गांव में ज्योतिग्राम योजना से कई बदलाव आए हैं. कभी मजदूरी और तंगहाली के साथ जीने वाला यह गांव आज समृद्धि की नई मिसाल पेश कर रहा है. ज्योति ग्राम योजना से आज गांव की शक्ल ही बदल गई है. लोग अपने बच्चों की पढ़ाई से लेकर पशुपालन को बेहतर रूप दे पा रहे हैं. साथ ही बूढ़े-बुजुर्गों को आरामदायक जीवन मिला है.

योजना ने गांव को बनाया आत्मनिर्भर

ज्योतिग्राम योजना से गुजरात के साबरकांठा के इडर के कावा गांव में बिजली के केवल बल्ब ही नहीं जले, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका मिली, बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की जिंदगी में नई रोशनी भरी. साबरकांठा का कावा गांव में कभी सूरज ढलते ही सन्नाटा हो जाता था. जो परिवार कभी दो वक्त की रोटी के लिए मजदूरी पर निर्भर थे, उनके घरों में अब खुशहाली की नई चमक है. ज्योति ग्राम योजना के 24 घंटे निर्बाध बिजली के वादे ने इस गांव के परिवारों को आत्मनिर्भर बना दिया है.

केवल बिजली से बनी लोगों की जिंदगी

700 लोगों की आबादी वाला कावा गांव 24 घंटे बिजली आने से पहले की जिंदगी संघर्षों से भरा था. पीने का पानी लाने के लिए महिलाओं को मीलों दूर भटकना पड़ता था. लेकिन जब से 24 घंटे बिजली की सप्लाई शुरू हुई, पिछले 25 सालों में इस गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल गई. पानी की समस्या खत्म हुई, तो ग्रामीणों ने बड़े पैमाने पर पशुपालन का रुख किया. आज वही मजदूर परिवार दूध उत्पादन के जरिए हर महीने एक सम्मानजनक आय कमा रहा है. जिससे बच्चों की पढ़ाई से लेकर कई तरह से लोगों की जिंदगी खुशीहाल हुई है.

अंधेरे से नहीं लगता बच्चों की किताबों को डर

पहले अंधेरा होते ही बच्चों की किताबें बंद हो जाती थीं, वहीं आज बच्चे देर रात तक आराम से पढ़ाई कर पा रहे हैं. शिक्षा का स्तर सुधरा है और बच्चों के सपने बड़े हुए हैं. रसोई से लेकर गांव की गलियों तक, हर जगह डर की जगह भरोसे ने ली है. पहले अंधेरा होने के डर से शाम का खाना दिन ढलने से पहले ही बनाना पड़ता था. आज महिलाएं देर रात 12 बजे भी बेफिक्र होकर खाना बना सकती हैं. जिस रात के अंधेरे में कभी बाहर निकलने से डर लगता था, आज रोशनी की चादर ने उस भय को हमेशा के लिए मिटा दिया है.

साबरकांठा के कावा गांव में ज्योतिग्राम योजना ने यह साबित कर दिया है कि 24 घंटे बिजली सिर्फ एक सुविधा नहीं हे बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव है. मजदूरी से आत्मनिर्भरता, अंधकार से शिक्षा और डर से सुरक्षा तक का यह सफर कावा गांव पहचान है.